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3 अक्टूबर को भोपाल आएंगे अमित शाह, सीएम मोहन यादव ने की तैयारियों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

भोपाल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को मध्यप्रदेश दौरे पर आने वाले हैं। उनके प्रस्तावित दौरे को लेकर भोपाल प्रशासन एवं सरकार की ओर से तैयारियां शुरू हो गई हैं। अमित शाह के प्रस्तावित दौरे को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मत्रालय में तैयारियों की समीक्षा की।

जानकारी के अनुसार, सीएम मोहन यादव ने मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों से कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी ली। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सीएम ने कार्यक्रम के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को तैयारियों में किसी भी तरह की कमी नहीं रहने के निर्देश दिए।

भेल दशहरा मैदान में अमित शाह करेंगे संबोधित

जानकारी अनुसार, केंद्रीय मंत्री अमित शाह राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में पशुपालकों और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी सहकारी समितियों के सदस्यों और पदाधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भोपाल, सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन नर्मदापुरम जिलों के साथ प्रदेश के 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों की भागीदारी रहेगी।

इस अवसर पर दुग्ध संयंत्र, डेयरी प्रसंस्करण एवं गुणवत्ता जांच लैब सहित विभिन्न परियोजनाओं की सौगात मिलेगी, जिसमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला डेयरी प्लांट और भोपाल में फर्मेंटेड प्रोडक्ट मिल्क प्लांट भी शामिल हैं। भोपाल पश्चिमी बायपास का भूमिपूजन भी होगा।

गोपालक दीदियों का होगा सम्मान, सौंपे जाएंगे स्वीकृति पत्र

अमित शाह को प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत सम्पन्न गतिविधियों और बलराम कृषि महोत्सव के अभिनव आयोजन की विस्तृत जानकारी भी दी जाएगी। कार्यक्रम में गृह विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, सहकारिता विभाग, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग के कार्यों के प्रेजेंटेशन भी होंगे। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ पशुपालकों को बोनस वितरण, गौशालाओं की सहायता के लिए राशि प्रदान करेंगे। साथ ही गोपालक दीदीयों के सम्मान और उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र वितरित किए जाएंगे।

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MSP की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग, खंडवा में 500 किसानों ने निकाली बाइक रैली, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

खंडवा में किसानों की मांगों को लेकर मंगलवार को संयुक्त कृषक संगठन के नेतृत्व में बाइक-वाहन रैली निकाली गई। दरअसल यह रैली अनाज मंडी से शुरू हुई और शहर के प्रमुख रास्तों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। देर शाम किसानों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कलेक्टर और कृषि संचालक के नाम अलग-अलग ज्ञापन दिए गए। रैली में किसान नेता नरेंद्र पटेल, जय पटेल सहित संगठन के पदाधिकारी और करीब 500 किसान शामिल हुए।

वहीं किसानों ने अपने ज्ञापन में खेती से जुड़े कई अलग-अलग मुद्दे उठाए। इनमें सभी बैंकों के ऋणी और डिफाल्टर किसानों की एकमुश्त कर्जमाफी, कृषि उपज के लिए MSP की कानूनी गारंटी और फसल बीमा व्यवस्था में बदलाव प्रमुख मांगों में शामिल रहे। किसानों का कहना है कि फसलों का उचित दाम नहीं मिलने और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। इसी वजह से उन्होंने सरकार से अलग-अलग स्तर पर राहत और नीतिगत बदलाव की मांग की है।

किसानों की कर्जमाफी और MSP गारंटी की मांग

दरअसल प्रधानमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में किसानों ने सभी बैंकों के ऋणी और डिफाल्टर किसानों का एकमुश्त कर्ज माफ करने की मांग रखी। किसानों का कहना है कि फसलों के सही दाम नहीं मिलने और प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। इसी के साथ उन्होंने कृषि उपज के लिए MSP की कानूनी गारंटी की मांग भी रखी है। किसानों के मुताबिक खेती से जुड़े खर्च और फसल के दाम के बीच संतुलन जरूरी है ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

निर्यात को लेकर भी अपनी मांग रखी

वहीं किसानों ने कृषि उपज के निर्यात को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने राज्यों को कृषि उपज के निर्यात में अधिक स्वतंत्र अधिकार देने की मांग की। उनका कहना है कि केंद्र की अनुमति या अनुशंसा में देरी होने पर कई बार बाजार में कृषि उपज के दाम प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही कृषि को उद्योग का दर्जा देने और इसके लिए अलग प्राधिकरण बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है। सोयाबीन और विदेशी खाद्य तेल के आयात शुल्क को लेकर भी किसानों के हित में नीति जारी रखने की मांग रखी गई।

खंडवा में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग

वहीं किसानों ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने प्रभावित जमीन के लिए चार गुना मुआवजे के साथ प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार का प्रावधान करने की मांग की। किसानों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल मुआवजे की राशि से नई कृषि भूमि खरीदना मुश्किल है इसलिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था जरूरी है।

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  Sports

'लड़कों से बात करती है, तुम्हारी लड़की गलत जा रही':ग्रामीण ने झूठ बोल खेल छुड़वाया, पतंजलि स्टोर पर नौकरी की; एशियन गेम्स मेडलिस्ट किरण की कहानी

हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स में रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर देश-दुनिया में छा गईं। गन्नौर एरिया के गांव गुमड़ की गलियों में भागदौड़ से शुरु हुआ किरण का यह सफर कभी भी आसान नहीं रहा। तीसरी कक्षा में जिम्नास्टिक करतीं लड़कियों को देखकर खेलों की ओर आकर्षित हुई। स्कूल का मैदान दूर था तो पिता ने 300 रुपए में कबाड़ी से पुरानी साइकिल दिलवा दी, ताकि प्रैक्टिस न छूटे। मगर, इसी बीच गांव के एक व्यक्ति ने पिता और चाचा से झूठी शिकायत कर दी कि तुम्हारी लड़की तो लड़कों से बात करती है, गलत जा रही है। इस पर परिवार ने खेल बंद कर दिया। किसी तरह परिवार को मनाया और पांच माह बाद दोबारा मैदान पर लौटीं। प्रैक्टिस के लिए एथलीटों वाले जूते चाहिए थे। बाजार में पता चला कि कीमत 11 हजार रुपए है। ऐसे में सहारा बनी दादी, जिन्होंने अपनी बुढ़ापा पेंशन के रुपए पोती को दे दी। गांव से निकलकर रोहतक स्टेडियम पहुंची तो डाइट और किराए की समस्या खड़ी हो गई। इसका समाधान निकाला पंतजलि स्टोर पर काम करके, जहां से मिलने वाले 4 हजार रुपए से खेल, रहने-खाने की जरूरत पूरी की। साल 2022 में किरण के पिता ओमप्रकाश बीमार हुए तो वह प्रैक्टिस छोड़कर उनके पास पहुंची। पिता ने उससे पूछा कि क्या वह ओलंपिक में जाकर मेडल नहीं ला सकती। किरण ने वादा किया कि वह जरूर मेडल लेकर आएगी। मगर, इसी साल पिता का निधन हो गया। पिता से किया यही वादा किरण के लिए प्रेरणा बन गया। हरियाणवी छोरी के गोल्डन गर्ल बनने की पूरी कहानी… खेल के मैदान में आईं हर मुश्किलों से लड़कर पाया मुकाम… बहन बोलीं- चने के लड्डू पसंद, ओलंपिक में भी साथ ले गई थी किरण की बहन तमन्ना के अनुसार, वह बहुत आध्यात्मिक है और खेल को लेकर पूरी तरह समर्पित रहती है। वह सामान्य तौर पर सुबह-शाम तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करती है। बड़ी प्रतियोगिता आने पर वह दूसरी चीजों को पीछे छोड़कर सिर्फ ट्रेनिंग पर ध्यान देती है। किरण को चने के लड्डू बेहद पसंद हैं। वह ओलंपिक के दौरान भी अपने साथ घर के बने चने के लड्डू लेकर गई थी। अब घर लौटने पर मां अपनी बेटी के लिए फिर से चने के लड्डू बनाएंगी। किरण 2023 तक पूरी तरह शाकाहारी रही। पेरिस ओलंपिक के दौरान पोलैंड में रहने के समय खाने को लेकर उसे परेशानी हुई। वहां उपलब्ध भोजन में नॉनवेज अधिक होने के कारण डाइट संभालना मुश्किल हुआ। इसके बाद उसने नॉनवेज खाना भी शुरू कर दिया। 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेगी मेडल विजेता बेटी एशियाई खेलों में गोल्ड और सिल्वर जीतने के बाद अब गुमड़ गांव में किरण के स्वागत की तैयारी है। वह 1 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगी, जिसके बाद उसे गांव लाकर भव्य स्वागत किया जाएगा। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. जींद की नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड:उधार की गन से शुरू की थी प्रैक्टिस; राशन लेने गई मां को फोन पर मिली खुशखबरी जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में जींद के गांव संगतपुरा की 26 वर्षीय शूटर नीरू ढांडा ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। (पूरी खबर पढ़ें) Tue, 29 Sep 2026 23:30:00

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