IPL में CSK के नए Bowling Coach बनेंगे Mohit Sharma, CEO ने की पुष्टि
चेन्नई सुपर किंग्स के खेमे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। भारत के पूर्व तेज गेंदबाज मोहित शर्मा अगले सीजन से टीम के गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभालते नजर आएंगे। वह मुख्य कोच जहीर खान की अगुवाई वाले सहयोगी स्टाफ का हिस्सा होंगे। इस नियुक्ति की पुष्टि चेन्नई सुपर किंग्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी काशी विश्वनाथन ने की है।
काशी विश्वनाथन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मोहित शर्मा को नए गेंदबाजी कोच के रूप में टीम में शामिल किया जा रहा है। उनके नाम की सिफारिश मुख्य कोच जहीर खान ने की है। उन्होंने कहा कि मोहित बतौर खिलाड़ी भी चेन्नई सुपर किंग्स के साथ शानदार रहे हैं और टीम को उम्मीद है कि वह गेंदबाजी कोच के रूप में भी अच्छा काम करेंगे।
बता दें कि चेन्नई सुपर किंग्स के बाकी सहयोगी स्टाफ में भी आने वाले हफ्तों में बदलाव देखने को मिल सकता है। काशी विश्वनाथन के अनुसार, नए कोचिंग स्टाफ की नियुक्तियां भी जहीर खान की सिफारिश के आधार पर की जाएंगी। मोहित शर्मा टीम के गेंदबाजी कोच के तौर पर एरिक सिमंस की जगह लेंगे।
मोहित का चेन्नई सुपर किंग्स के साथ पुराना रिश्ता रहा है। वह टीम के लिए 2 अलग-अलग दौर में कुल 4 सीजन खेल चुके हैं। आईपीएल में उनका आखिरी कार्यकाल दिल्ली कैपिटल्स के साथ रहा था। उन्होंने पंजाब किंग्स के लिए भी 2016 से 2018 तक खेला है।
गौरतलब है कि मोहित शर्मा ने आईपीएल में 120 मुकाबले खेले हैं और उनके नाम 134 विकेट हैं। गुजरात टाइटंस के साथ उनका प्रदर्शन खास तौर पर चर्चा में रहा था। टीम के साथ बिताए 2 सत्रों में उन्होंने 41 विकेट लिए और अपनी सटीक गेंदबाजी तथा अलग-अलग तरह की गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान किया था।
आईपीएल में मोहित का सबसे यादगार सीजन2014 रहा था। उस समय चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने 23 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज को मिलने वाली पर्पल कैप अपने नाम की थी। यही प्रदर्शन उनके आईपीएल करियर के सबसे खास दौर में शामिल है।
भारतीय टीम के साथ भी मोहित का सफर खास रहा है। 2015 विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे मोहित टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल थे। उन्होंने भारत के लिए 26 एकदिवसीय और 8 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 31 विकेट और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 6 विकेट हैं।
मोहित ने पिछले साल दिसंबर में पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी। अपने भावुक संदेश में उन्होंने हरियाणा से लेकर भारतीय टीम और आईपीएल तक के सफर को याद किया था। उन्होंने हरियाणा क्रिकेट संघ, बीसीसीआई, अपने कोच, साथियों, आईपीएल टीमों और सहयोगी स्टाफ का आभार जताया था।
अब क्रिकेट से खिलाड़ी के रूप में विदाई लेने के बाद मोहित के सामने कोच के रूप में नई जिम्मेदारी होगी। चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उनका पुराना अनुभव और जहीर खान के साथ काम करने का मौका टीम की गेंदबाजी व्यवस्था में उनके लिए अहम भूमिका बना सकता है। अगले सीजनसे वह मैदान के बाहर रहकर गेंदबाजों की तैयारी और रणनीति में योगदान देते नजर आने वाले हैं।
दवाओं की एमआरपी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जनहित याचिका पर 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। दवाओं की कीमत और एमआरपी तय करने के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान पिटीशनर और वकील किशन चंद जैन ने मामले से जुड़े प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह जनहित याचिका वर्ष 2003 में दायर की गई थी, जिसमें जेनेरिक दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं की कीमत निर्धारित करने से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
किशन चंद जैन ने बताया कि जनहित याचिका में दो मुख्य मुद्दे उठाए गए थे। पहला, प्रत्येक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जेनेरिक मेडिसिन लिखे जाने का विषय था। दूसरा मुद्दा दवाओं की एमआरपी और उनकी कीमत तय करने की प्रक्रिया से संबंधित था। उन्होंने बताया कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) 2013 के तहत दवाओं को शेड्यूल और नॉन-शेड्यूल कैटेगरी में बांटा गया है। शेड्यूल दवाओं की कीमत निर्धारित करने का काम नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी करती है और इसमें रिटेलर के लिए 16 प्रतिशत मार्जिन का प्रावधान है।
जैन ने कहा कि बाजार में बड़ी संख्या में दवाएं नॉन-शेड्यूल कैटेगरी में आती हैं और इनकी कीमत निर्धारित करने पर उसी तरह का नियंत्रण नहीं है। उन्होंने दावा किया कि निर्माता अपनी दवाओं की एमआरपी काफी अधिक तय कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई दवा बाजार में 10 रुपए में उपलब्ध है तो उसकी एमआरपी 100 रुपए तक रखी जा सकती है। इससे खास तौर पर उन अस्पतालों में मरीजों को आर्थिक नुकसान होता है, जहां एमआरपी के आधार पर बिलिंग की जाती है। सरकार की ओर से किसी तरह का रीइंबर्समेंट होने की स्थिति में भी अधिक भुगतान का असर पड़ सकता है।
किशन चंद जैन ने बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से यह ऑब्जर्वेशन सामने आया कि रिटेलर के लिए कीमत पर रिटेलर का 16 प्रतिशत मार्जिन जोड़कर एमआरपी निर्धारित करने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का मुद्दा लंबे समय से अदालत के सामने है और सरकार की ओर से भी इस दिशा में प्रयास किए जाते रहे हैं।
जैन ने बताया कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से कहा गया कि वह प्रस्ताव का विरोध नहीं कर रही है, लेकिन अधिकारियों से चर्चा कर ऐसा रास्ता निकालना चाहती है जिससे दवाओं की एमआरपी उचित तरीके से निर्धारित की जा सके। कोर्ट ने मामले को आवश्यक बताते हुए इसे जल्द तय करने की बात कही है। मामले में अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है।
किशन चंद जैन ने बताया कि उन्होंने अदालत के समक्ष यह तर्क भी रखा कि दवा शेड्यूल हो या नॉन-शेड्यूल, दोनों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आवश्यक वस्तु माना जाना चाहिए। उन्होंने मेडिकल डिवाइसेज का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ग्लव्स, इंजेक्शन और अन्य मेडिकल सामान भी आवश्यक वस्तुओं के दायरे में आते हैं। अदालत ने इस तर्क पर सहमति जताई कि यदि सभी दवाएं आवश्यक वस्तु अधिनियम की परिधि में आती हैं तो फिर शेड्यूल और नॉन-शेड्यूल दवाओं के बीच कीमत नियंत्रण को लेकर अलग-अलग व्यवस्था का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
अब मामले में 5 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में दवाओं की एमआरपी निर्धारित करने की व्यवस्था और कीमत नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर आगे की सुनवाई होगी।
--आईएएनएस
पीएसके
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