खुल कर आ गई नेतन्याहू के UAE दौरे की कहानी, सऊदी में हलचल! इस Visit पर भारत की क्यों है नजर?
मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक ऐसी कूटनीतिक हलचल हुई है जिसने पूरी दुनिया के शक्ति संतुलन को हिलाकर रख दिया है। अबू धाबी में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान के बीच हुई यह आमने-सामने की बैठक महज एक औपचारिक मुलाक़ात नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। यह हाई-प्रोफ़ाइल बैठक ठीक ऐसे समय में हुई है जब पूरा मध्य पूर्व बारूद के ढेर पर बैठा है। जहाँ एक तरफ ईरान की बढ़ती आक्रामकता और हूथी विद्रोहियों के हमले हैं, तो दूसरी तरफ गाज़ा संकट और क्षेत्र में बनते नए सैन्य गठबंधन। इन भारी दबावों और तनावों के बीच, इज़राइल और यूएई का सार्वजनिक मंच पर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करना यह साफ़ संदेश देता है कि पुरानी कूटनीतिक दीवारें अब नए सुरक्षा समझौतों में तब्दील हो चुकी हैं। तेज़ी से करवट लेती यह क्षेत्रीय सुरक्षा सिर्फ़ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर भारत के सामरिक और आर्थिक हितों पर भी पड़ने जा रहा है। आख़िर मध्य पूर्व के इस बिसात पर कौन सा नया खेल शुरू हो चुका है, और अबू धाबी में बंद कमरों के भीतर क्या तय हुआ? आइए इस वीडियो में समझते हैं इस ऐतिहासिक मुलाक़ात की पूरी इनसाइड स्टोरी।
इसे भी पढ़ें: जिस इलाके में हम तेल नहीं बेचते, वहां कोई और भी तेल नहीं बेचेगा”: ईरान की संसद के स्पीकर ग़ालिबाफ़ ने अमेरिका को चेतावनी दी
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए क्या मतलब हो सकता है
नेतन्याहू 27 सितंबर को एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अबू धाबी पहुंचे, जिसमें इज़राइल के वरिष्ठ सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारी शामिल थे। इज़राइली नेता के साथ उनकी पत्नी, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख, मोसाद प्रमुख और राजनीतिक व सैन्य सलाहकार भी थे। शेख मोहम्मद बिन ज़ायद (जिन्हें MBZ के नाम से भी जाना जाता है) ने उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें कथित तौर पर द्विपक्षीय संबंधों, ईरान, क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य पूर्व की व्यापक स्थिति पर चर्चा की गई।
कई संदेशों वाली एक बैठक
इस बैठक का महत्व इस बात में है कि इज़राइल और UAE अब अपने रणनीतिक सहयोग को लोगों की नज़रों से छिपाकर नहीं रख रहे हैं। 2020 में UAE के अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी, टूरिज़्म, इंटेलिजेंस और रक्षा-संबंधी सहयोग बढ़ा है। हालाँकि, नेतन्याहू का अबू धाबी का दौरा, खासकर इलाके में अस्थिर माहौल के बीच, एक मज़बूत राजनीतिक और सुरक्षा संदेश देता है। पहला संदेश ईरान के लिए है। खाड़ी के प्रमुख आर्थिक और कमर्शियल हब में से एक होने के बावजूद, UAE को हाल के वर्षों में सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा है, जिसमें यमन में ईरान-समर्थित हूती आंदोलन द्वारा किए गए हमले भी शामिल हैं। इज़राइल के साथ सहयोग का सार्वजनिक प्रदर्शन यह बताता है कि अबू धाबी अलग-थलग नहीं है और उसे इलाके की सबसे सक्षम सैन्य और इंटेलिजेंस ताकतों में से एक के साथ सुरक्षा साझेदारी हासिल है। दूसरा संदेश उन दूसरे क्षेत्रीय देशों के लिए है जो मध्य पूर्व में नए गुट और गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बैठक UAE को एक स्वतंत्र रणनीतिक खिलाड़ी के तौर पर दिखाती है। एक ऐसा देश जो अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय रुतबे को बनाए रखते हुए इज़राइल के साथ खुलकर काम करने को तैयार है।
इसे भी पढ़ें: BJP नेता Smriti Irani का हमला, हार के बाद Congress कर रही संवैधानिक संस्थाओं का अपमान
मीटिंग की टाइमिंग अहम
बैठक का समय अहम है क्योंकि इससे इज़राइली और अमीराती नेतृत्व के बीच तनाव की अटकलों को खारिज किया जा सकता है। इज़राइल में राजनीतिक बहस से जुड़ी ऐसी खबरें और संकेत थे कि दोनों के बीच मतभेद हैं, लेकिन इस बैठक से ऐसे दावों को दरकिनार किया जा सकता है। नेतन्याहू और MBZ का शीर्ष स्तर पर बातचीत करना इस बात को पुख्ता करता है कि इज़राइल-UAE चैनल सक्रिय और महत्वपूर्ण बना हुआ है।
ईरान, हूती और खाड़ी देशों की सुरक्षा
इस बैठक का मुख्य मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा है। ईरान के सहयोगी हथियारबंद समूहों का नेटवर्क जिसमें लेबनान का हिज़्बुल्लाह और यमन के हूथी शामिल हैं—इज़राइल, खाड़ी देशों और अमेरिका के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बन गया है। हूती के मिसाइल और ड्रोन हमलों के पिछले अनुभवों को देखते हुए, UAE के लिए एयर डिफेंस, खुफिया जानकारी साझा करने और खतरे की पहले से चेतावनी देने की क्षमताएं बहुत अहम हो गई हैं। इज़राइल के पास ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और हवा से होने वाले अन्य खतरों का मुकाबला करने का बेहतर अनुभव है। आने वाले खतरों की पहचान करने और उन पर नज़र रखने में इज़राइल की खुफिया और रडार क्षमताएं UAE के लिए बहुत काम की साबित हो सकती हैं। इसलिए, नेतन्याहू की इस यात्रा का मकसद शायद अपनी ताकत का अहसास कराना है न सिर्फ़ हूतियों के खिलाफ़, बल्कि खाड़ी देशों पर दबाव बनाने की ईरान की किसी भी बड़ी कोशिश के खिलाफ़ भी।
Asian Games Cricket: बारिश से Nepal मैच रद्द, Semifinal में Sri Lanka और India की होगी टक्कर
एशियाई खेलों में पुरुष क्रिकेट टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल बारिश के कारण श्रीलंका और नेपाल के बीच मुकाबला बिना एक भी गेंद फेंके रद्द हो गया। इसके साथ ही श्रीलंका ने बेहतर वरीयता के आधार पर सेमीफाइनल में जगह बना ली है, जहां अब उसका सामना भारत से होगा।
निसिन, जापान में खेले जाने वाले इस मुकाबले में बारिश कई घंटे पहले ही शुरू हो गई थी। मुकाबला स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे शुरू होना था, लेकिन लगातार बारिश के कारण मैदान खेलने लायक नहीं हो सका और मैच रद्द करने का फैसला लिया गया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, श्रीलंका को इस मैच में जीत या बराबरी के जरिए आगे बढ़ने की जरूरत नहीं पड़ी। आईसीसी की टी20 रैंकिंग के आधार पर टूर्नामेंट में भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश को वरीय टीमों का दर्जा मिला हुआ है। बारिश के कारण मैच रद्द होने की स्थिति में बेहतर वरीयता वाली टीम को अगले दौर में जगह मिलती है। इसी नियम का फायदा श्रीलंका को मिला है।
बता दें कि भारत भी सोमवार को इसी तरह क्वार्टर फाइनल मुकाबला पूरा किए बिना सेमीफाइनल में पहुंचा था। अफगानिस्तान के खिलाफ उसका मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था। बेहतर वरीयता के कारण भारत को अगले दौर में जगह मिली। पाकिस्तान को भी अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में इसी तरह फायदा मिला। हांगकांग के खिलाफ उसका मैच भी बारिश के कारण नहीं हो सका था और बेहतर वरीयता के आधार पर पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंच गया।
गौरतलब है कि एशियाई खेलों के पिछले संस्करण में श्रीलंका का सफर क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया था। 2022 के एशियाई खेलों में अफगानिस्तान ने श्रीलंका को हराकर उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था। इस बार श्रीलंका के पास आगे बढ़ने का मौका है, लेकिन अब उसके सामने मजबूत भारतीय टीम की चुनौती होगी।
हालांकि, सेमीफाइनल में भी बारिश एक बड़ा सवाल बनी हुई है। अगर भारत और श्रीलंका के बीच होने वाला मुकाबला भी बारिश के कारण रद्द होता है, तो बेहतर वरीयता के नियम के चलते भारत फाइनल में पहुंच जाएगा। ऐसे में दोनों टीमों के फैंस की नजर मौसम और मैदान की स्थिति पर भी बनी रहने वाली है।
कुछ घंटे बाद बांग्लादेश और मलेशिया के बीच चौथा क्वार्टर फाइनल भी बारिश की भेंट चढ़ गया। यह मुकाबला भी बिना गेंद फेंके रद्द करना पड़ा। इसके साथ ही बांग्लादेश ने बेहतर वरीयता के आधार पर सेमीफाइनल में जगह बना ली है।
अब टूर्नामेंट के दोनों सेमीफाइनल 1 अक्टूबर को खेले जाएंगे। पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में भारत और श्रीलंका के बीच मुकाबला होगा। लगातार बारिश के कारण अब यह देखना अहम होगा कि सेमीफाइनल मुकाबलों में मौसम कितना साथ देता है और क्या दोनों मैचों में मैदान पर गेंद और बल्ले के बीच पूरा मुकाबला देखने को मिलता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










