Bihar CM Samrat Choudhary ने शुरू किया Aangan Ka Milan अभियान, Anganwadi को मिलेगा बल
पटना: मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज फुलवारीशरीफ उच्च विद्यालय परिसर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-137 में आयोजित कार्यक्रम में राज्यव्यापी 'आंगन का मिलन' कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों एवं सेविका से बातचीत कर केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं तथा संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद के दौरान उनकी पढ़ाई एवं गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने मुख्यमंत्री के समक्ष कविता प्रस्तुत की तथा अपना परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके बीच मिठाइयों का वितरण किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग एवं समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। इस क्रम में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थियों को सांकेतिक चेक प्रदान किया। उन्होंने महिलाओं की गोदभराई की तथा बच्चों का अन्नप्राशन कराया।
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मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका एवं आशा दीदी को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही लाभार्थियों के बीच पौष्टिक किट का वितरण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 'सुपोषित बचपन की रसोई' नामक पुस्तिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने 'आंगन का मिलन कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों से संवाद किया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एवं मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के लाभार्थियों ने योजनाओं से प्राप्त सहायता एवं आंगनबाड़ी केंद्र से मिल रही सेवाओं के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि योजनाओं के माध्यम से प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग पोषण, खान-पान एवं स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण, बच्चों के वजन एवं लंबाई की नियमित निगरानी तथा पोषण संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस दौरान एक लाभार्थी ने मुख्यमंत्री से आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए खिलौनों की सुविधा और बेहतर करने का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी बहनों के आशीर्वाद से सरकार बनी है और सरकार आपके द्वार जाकर हर प्रकार की मदद पहुंचाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को और बेहतर सुविधाएं किस प्रकार उपलब्ध कराई जा सकती हैं, इस संबंध में लाभार्थी एवं स्थानीय लोग अपने सुझाव सरकार तक पहुंचाएं। सरकार द्वारा आवश्यक सुधार के लिए हरसंभव कदम उठाया जाएगा। लाभार्थियों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रसव पूर्व एवं प्रसव उपरांत माताओं तथा बच्चों को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है, वहां भवन निर्माण की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ रखना तथा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण उपलब्ध कराना है। आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका सेवा भाव से कार्य कर रही हैं। राज्य में करीब 1,15,000 आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका बच्चों एवं परिवारों की सेवा में लगी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन, फल एवं दूध उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र से जोड़ने और उन्हें पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज के बच्चे मजबूत होंगे तो राज्य और देश भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी एवं पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों से अपील की कि गांव के सभी छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ने का प्रयास करें।
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कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण मंत्री डॉ० श्वेता गुप्ता ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, समाज कल्याण मंत्री डॉ० श्वेता गुप्ता, सांसद श्री रविशंकर प्रसाद, विधायक श्री श्याम रजक, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री विनोद सिंह गुंजियाल, समाज कल्याण विभाग की निदेशक डॉ० प्रीति, जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के० शर्मा सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, बच्चे एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।
एयरस्पेस बंद कर बहुत अकड़ में था पाकिस्तान, उसी के दोस्त से भारत ने निकाल लिया जुगाड़
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के लगातार बंद रहने के असर को कम करने के लिए भारत चीन के शिनजियांग के ऊपर से एक वैकल्पिक हवाई मार्ग तलाश रहा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से, उत्तरी और पश्चिमी भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए उड़ान भरने वाली भारतीय एयरलाइंस को अरब सागर के ऊपर से मस्कट की ओर घूमकर जाना पड़ रहा है। इस चक्करदार रास्ते की वजह से उड़ान के समय में 45 मिनट से लेकर दो घंटे तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कई रूटों पर ऑपरेशनल लागत और ईंधन की खपत बढ़ गई है। नायडू ने कहा कि दक्षिण-पश्चिमी शिनजियांग में होटन के ऊपर से प्रस्तावित कॉरिडोर एक काफी छोटा रास्ता देगा। नायडू ने पत्रकारों से कहा कि हम दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच होटन रूट पर बातचीत चल रही है। हमारा विदेश मंत्रालय (MEA) उनके देश के साथ बातचीत कर रहा है... देखते हैं क्या होता है, लेकिन हम दूसरे विकल्पों की कोशिश कर रहे हैं।
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अगर बातचीत सफल रही, तो दिल्ली और मुंबई से उड़ान भरने वाली भारतीय एयरलाइंस लेह की ओर जाएंगी, होटन के पास चीनी एयरस्पेस में प्रवेश करेंगी, किर्गिस्तान की ओर मुड़ेंगी और फिर यूरोप, यूके और उत्तरी अमेरिका जाने वाले मौजूदा रूट से जुड़ जाएंगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उत्तर और उत्तर-पश्चिम से आने वाली सभी भारतीय एयरलाइंस पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने के लिए L639 रूट का इस्तेमाल कर रही हैं... जिससे उनका उड़ान का समय 2 घंटे बढ़ जाता है। एक दूसरे व्यक्ति ने कहा इस रास्ते से जॉर्जिया, बाकू, सेंट्रल एशिया और उत्तरी यूरोप जैसी जगहों के लिए काफी बचत हो सकती है। यह घुमावदार रास्ता एयर इंडिया के लिए खास तौर पर महंगा साबित हुआ है, जो दिल्ली और मुंबई के अपने हब से पश्चिमी देशों की लंबी दूरी की उड़ानों पर काफी हद तक निर्भर है। एयर इंडिया के पूर्व CEO कैंपबेल विल्सन ने 2025 में अनुमान लगाया था कि पाकिस्तान के एयरस्पेस के बंद होने की वजह से एयरलाइन को ₹4,000 करोड़ का नुकसान हुआ।
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हालांकि, नायडू ने इस रास्ते को खोलने के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई और न ही यह संकेत दिया कि चीन के साथ कोई समझौता हुआ है। बेशक, किसी भी नए एयर कॉरिडोर के लिए देशों के बीच समझौते और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट व अन्य ऑपरेशनल मुद्दों पर तालमेल की ज़रूरत होगी।
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