दवाओं की MRP और PTR में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रिटेलर मार्जिन 16 प्रतिशत तक रखने का सुझाव
दवाओं की कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली रकम के बीच बड़े अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जरूरी दवाओं के मामले में जिस तरह रिटेलर का मार्जिन 16 प्रतिशत तय किया जाता है, क्या दूसरी दवाओं के लिए भी ऐसी ही सीमा तय नहीं की जा सकती।
अदालत ने यह सवाल दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी और रिटेलर को मिलने वाली कीमत यानी पीटीआर के बीच अंतर को लेकर उठाया। हालांकि, 16 प्रतिशत की सीमा को लेकर अभी कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है मामले पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
2700 रुपये की दवा की एमआरपी 27 हजार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दवाओं की कीमतों में भारी अंतर का एक उदाहरण भी सामने आया। कोर्ट को बताया गया कि कैंसर की एक दवा रिटेलर को करीब 2700 रुपये में मिलती है, लेकिन उसकी एमआरपी 27 हजार रुपये है। पिछली सुनवाई में इसी अंतर पर कोर्ट ने बेहद कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि मरीजों से इस तरह पैसे लेना दिनदहाड़े डकैती और उगाही जैसा है। कोर्ट की चिंता खासतौर पर उन मरीजों को लेकर है, जिन्हें लंबे इलाज के दौरान लगातार महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
16 प्रतिशत का सवाल क्यों उठा
मामला ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर यानी डीपीसीओ, 2013 की व्यवस्था से जुड़ा है। इसके तहत सरकार कुछ जरूरी दवाओं की अधिकतम कीमत तय करती है। कीमत तय करने की प्रक्रिया में रिटेलर के लिए 16 प्रतिशत मार्जिन का प्रावधान है। लेकिन सभी दवाएं इस मूल्य नियंत्रण के दायरे में नहीं आतीं। गैर निर्धारित दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने में सरकार की भूमिका सीमित है। हालांकि, इन दवाओं के एमआरपी में एक साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की जा सकती।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यही व्यवस्था दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर की वजह बन रही है। उनका कहना है कि जब जरूरी दवाओं के लिए रिटेलर मार्जिन तय है तो बाकी दवाओं के मामले में भी कीमत और मार्जिन को लेकर स्पष्ट सीमा होनी चाहिए।
केंद्र ने भी माना, अंतर का मुद्दा विचार योग्य
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि दवाओं की कीमतों में अंतर का मुद्दा गलत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसका समाधान निकालते समय दवा बनाने वाली कंपनियों से लेकर वितरकों, रिटेलरों और मरीजों तक सभी के हितों को ध्यान में रखना होगा।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल आगे बढ़ाते हुए पूछा कि जब जरूरी दवाओं के लिए 16 प्रतिशत मार्जिन का मॉडल मौजूद है, तो दूसरी दवाओं के लिए भी एमआरपी और पीटीआर के बीच अंतर की कोई सीमा तय करने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
मेडिकल डिवाइस की कीमतों पर भी सवाल
सुनवाई में मेडिकल डिवाइस की कीमतों का मुद्दा भी उठा। याचिकाओं में दवाओं के साथ-साथ मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में आगे की दलीलें सुनेगा। फिलहाल अदालत का 16 प्रतिशत वाला सुझाव कोई नया नियम नहीं है। अगली सुनवाई में यह साफ होगा कि कीमतों और रिटेलर मार्जिन को लेकर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की दिशा में क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
रतलाम: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक ही जगह दो घंटे में दो बड़े हादसे, 4 लोगों की दर्दनाक मौत, जांच में जुटी पुलिस
रतलाम: मध्यप्रदेश में रतलाम जिले से बड़ी खबर सामने आई है। जहां दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को दो बड़े सड़क हादसे हुये हैं। इन हादसों में कुल 4 लोगों की मौत एवं अन्य 8 लोगों के घायल होने की सूचना है। पुलिस ने शवों को पास्टमार्टम के भेज दिया है एवं घायलों को तत्काल अस्पताल इलाज के लिये भेजा। पुलिस हादसे की जांच में जुटी है।
जानकारी अनुसार, पहला हादसा सुबह करीब साढ़े 4 बजे हुआ है। जब तेज रफ्तार कार एक्सप्रेसवे की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 30 फीट नीचे खाई में जा गिरी। इस दुर्घटना में कार सवार दो लोगों की मौत हो गई। वहीं, सुबह करीब साढ़े 6 बजे उसी स्थान के आसपास दूसरा हादसा हुआ। पहली दुर्घटना में क्षतिग्रस्त रेलिंग के कारण दूसरी कार भी अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। इस हादसे में भी दो लोगों की जान चली गई। हादसों के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेजा
हादसे के बाद मौके पर राहगीरों एवं स्थानीय लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। तत्काल ही हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौक पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा। वहीं, घायलों को एंबुलेंस की सहायत से अस्पताल भिजवाया। जहां उनका इलाज जारी है। दोनों कारों में सवार मृतक पंजाब और गुजरात के रहने वाले थे।
एक ही जगह पर दो घंटे के बीच दो बड़े हादसे
पुलिस के अनुसार, पहला हादसा सुबह करीब साढ़े 4 बजे हुआ है। पंजाब का परिवार MH48 AK 4833 नंबर की कार से मुंबई जा रहा था। तभी ड्राइवर की झपकी लगने से उनकी कार एक्सप्रेसवे की रेलिंग तोड़ते हुये करीब 30 फीट खाई में जा गिरी। इस हादसे में दो लोगों नरेंद्र कौर (67) और उनकी बहू मनप्रीत कौर (32) ने अपनी जान गंवाई है।
वहीं दूसरे हादसे की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि दूसरा हादसा करीब साढ़े 6 बजे हुआ है। पुलिसकर्मी मौका मुआयना कर रहे थे, इसी दौरान कार नंबर GJ20 CB 4610 हवा में उछलते हुए रोड के बीच बनी बाउंड्री से टकराकर टूटी रेलिंग से खाई में जा गिरी। कार में गुजरात के दाहोद जिले का एक परिवार सवार था, जो उत्तर प्रदेश से इलाज कराकर लौट रहा था। इस हादसे में रवि हटीला निवासी चंदला, दाहोद और 50 वर्षीय रमेश मकवाना निवासी विजयगढ़, दाहोद की मौत हो गई।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News










