भगवान राम-शिव पर टिप्पणी से हिंदू समाज को बांट रहे CM Revanth Reddy, BJP ने मांगी माफी
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि रेड्डी चुनावी फायदे के लिए हिंदू समुदाय को बांटने की कोशिश कर रहे हैं और उनसे तुरंत सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने की मांग की। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीएम रेवंत रेड्डी ने भगवान राम और भगवान शिव की तुलना करते हुए टिप्पणी की। रेड्डी ने दावा किया कि भगवान शिव "गरीबों के देवता" हैं, जबकि भगवान राम "अमीरों के देवता" हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर भारत में बीजेपी का भगवान राम पर राजनीतिक नियंत्रण है और वे भगवान शिव को नज़रअंदाज़ करते हैं। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचंद्र राव ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में देवताओं के बीच कोई अंतर नहीं है और कांग्रेस पर बांटने वाली राजनीति करने का आरोप लगाया।
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राव ने ANI से कहा राम और शिव के बारे में रेवंत रेड्डी का यह बयान कि राम अमीरों के हैं और शिव गरीबों के हैं, और यह कहना कि PM मोदी हमेशा जय श्री राम तो कहते हैं लेकिन 'हर हर महादेव' नहीं कहते, हिंदू धर्म के लिए एक बेतुका और अपमानजनक बयान है। असल में यह बयान हिंदू समुदाय को तोड़ने के इरादे से दिया गया है।" उन्होंने आगे कहा, "हाल ही में रेवंत रेड्डी ने खुद को रेवंतउद्दीन में बदल लिया है क्योंकि उनका कहना है कि मुस्लिम ही कांग्रेस हैं और कांग्रेस ही मुस्लिम है। इसलिए शायद उन्हें लग रहा होगा कि वह अभी भी मुस्लिम हैं और इसीलिए हिंदू समुदाय को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।" एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने BJP नेताओं द्वारा धार्मिक नारों के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाया और पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जय श्री राम का नारा तो लगाते हैं लेकिन हर हर महादेव का नहीं। रेड्डी ने भगवान शिव को गरीबों का और भगवान राम को अमीरों का प्रतिनिधि बताया और BJP को अमीर लोगों के हितों से जोड़ा।
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तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष ने आगे आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी चाहते हैं कि देश में मुसलमान एकजुट रहें, जबकि हिंदू समुदाय कई गुटों में बंट जाए। उन्होंने इस तुलना को खारिज करते हुए कहा कि भगवान राम और भगवान शिव, दोनों की ही पूरे भारत में बिना किसी क्षेत्रीय या सामाजिक-आर्थिक भेदभाव के पूजा की जाती है। बीजेपी नेतृत्व ने रेड्डी की टिप्पणियों को आगामी स्थानीय चुनावों से पहले अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने के मकसद से की गई तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। तेलंगाना बीजेपी प्रमुख ने कहा, "सबसे पहली बात, किसी भी हिंदू के लिए राम और शिव में कोई अंतर नहीं है। वे हर देवता की पूजा करते हैं, हम हर देवता का सम्मान करते हैं, हम हर पंथ का सम्मान करते हैं और हम हर जाति का सम्मान करते हैं। लेकिन रेवंत रेड्डी हिंदू समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि इस देश में मुसलमान एकजुट हों और हिंदू बंट जाएं। यह हिंदू समुदाय को बांटने और इस तरह भारतीय सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने को कमजोर करने की कांग्रेस पार्टी की एक चाल है। इसलिए, हम रेवंत रेड्डी के बयान की निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि वे दुनिया भर के सभी हिंदुओं से माफी मांगें।
North India की जेलों में तैयार हो रहे खालिस्तानी गुर्गे! खुफिया एजेंसियों के बड़े खुलासे से मचा हड़कंप, Pannun Network पर Prahaar शुरू
उत्तर भारत की जेलें अब केवल अपराधियों को बंद रखने की जगह नहीं रह गई हैं, बल्कि आतंकी नेटवर्क के लिए नए गुर्गे तैयार करने का माध्यम भी बनती जा रही हैं। हम आपको बता दें कि खुफिया एजेंसियों ने ऐसे प्रयासों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है, जिनमें खालिस्तान समर्थक संगठन, खासकर सिख्स फॉर जस्टिस जेलों के भीतर बंद कैदियों को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल में हिरासत में लिए गए एक आरोपी से पूछताछ में सामने आई जानकारी ने इस पूरे नेटवर्क की जड़ें जेलों तक पहुंचने के संकेत दिए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी प्रीतपाल सिंह ने खुलासा किया कि जेल में सजा काटने के दौरान ही उसे खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़े लोगों ने अपने प्रभाव में लिया था। इसी दौरान उसे विदेश में बैठे खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू से संपर्क करने के लिए फोन नंबर भी उपलब्ध कराया गया। जेल से बाहर आने के बाद उसने सीधे पन्नू से संपर्क स्थापित किया और कथित तौर पर आगे के काम के लिए धन भी प्राप्त किया।
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जांच में सामने आया है कि प्रीतपाल सिंह पहले भी खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में शामिल रहा था। वर्ष 2023 में उसे इसी तरह की एक घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। हाल में एजेंसियों ने उसके नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए उसे गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ दिल्ली और पंजाब में ब्रिक्स विरोधी तथा खालिस्तान समर्थक नारे दीवारों पर लिखे, उनका वीडियो बनाया और उसे पन्नू तक पहुंचाया।
जांच का सबसे गंभीर पहलू जेल के भीतर तैयार किए जा रहे नेटवर्क से जुड़ा है। एजेंसियों का मानना है कि जेलों में मौजूद ऐसे कैदियों को निशाना बनाया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हों, कानूनी सहायता से वंचित हों या पहली बार छोटे-मोटे अपराधों में जेल पहुंचे हों। ऐसे बंदियों को पैसे, सहायता और प्रभाव का लालच देकर धीरे-धीरे कट्टरपंथी गतिविधियों में धकेलने की कोशिश की जाती है।
इस पूरे नेटवर्क में धन और हथियार पहुंचाने का तरीका भी बदल रहा है। खुफिया एजेंसियों ने पाया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के समर्थन वाले गुट अब सीधे संपर्क और आमने-सामने धन या हथियार पहुंचाने की बजाय गुप्त स्थानों पर सामान छोड़ने की पद्धति का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूनसान राजमार्गों, सीमावर्ती इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से तय स्थानों पर धन, हथियार या अन्य सामग्री छिपाई जाती है। इसके बाद स्थानीय सदस्यों को सुरक्षित मैसेजिंग एप्स के जरिए उस स्थान की जानकारी दी जाती है।
एजेंसियों के मुताबिक, सीमा पार से ड्रोन या गुप्त माध्यमों के जरिए हथियार और नकदी पहुंचाकर उन्हें ऐसे स्थानों पर छिपाया जाता है, जहां से स्थानीय गुर्गे उन्हें उठा सकें। इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि विदेश में बैठे संचालकों और जमीन पर काम कर रहे लोगों के बीच सीधा संपर्क कम हो जाता है, जिससे पूरे नेटवर्क की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए कठिन हो जाता है।
देखा जाये तो जेलों के इस्तेमाल का खतरा नया नहीं है। वर्ष 2016 में नाभा जेल से हुई कुख्यात फरारी ने भी आतंकवादी संगठनों और जेलों में बंद अपराधी गिरोहों के बीच संभावित गठजोड़ की ओर ध्यान खींचा था। अब प्रीतपाल सिंह के मामले ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को चेताया है कि जेलों के भीतर होने वाली कट्टरपंथी गतिविधियों पर निगरानी और कड़ी करनी होगी। फिलहाल एजेंसियां प्रीतपाल सिंह के डिजिटल संपर्कों, धन के गुप्त लेनदेन और जेल के भीतर उसके संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही हैं। जांच का मकसद केवल एक आरोपी तक पहुंचना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि जेलों से बाहर निकलकर कितने लोग इस गुप्त नेटवर्क का हिस्सा बने और उनके पीछे विदेश में बैठे संचालकों का तंत्र कितना व्यापक है।
दूसरी ओर, जेलों में भर्ती के इस खतरे के बीच ‘प्रहार’ अभियान की भूमिका भी बेहद अहम हो जाती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘प्रहार’ को आतंकवाद-रोधी कार्रवाई का हिस्सा बनाने और आतंकवादी नेटवर्क को 360 डिग्री से खत्म करने पर जोर दिया है। इसके तहत केवल आतंकियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उनकी भर्ती, धन, हथियार, संपर्क, डिजिटल नेटवर्क और विदेश में बैठे संचालकों तक पूरी कड़ी को निशाना बनाने की बात कही गई है। ऐसे में जेलों के भीतर बंद कैदियों की कट्टरपंथी गतिविधियों पर निगरानी, संदिग्ध संपर्कों की पहचान, खुफिया सूचनाओं का समय पर साझा होना और राज्य पुलिस तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय इस तरह की भर्तियों को शुरुआती स्तर पर रोकने में मदद कर सकता है। ‘प्रहार’ का जोर आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करने पर भी है, इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर या आसानी से प्रभावित होने वाले बंदियों को कट्टरपंथी नेटवर्क के निशाने पर आने से बचाने के लिए निगरानी के साथ परामर्श और सुधारात्मक कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण होंगे। देखना होगा कि आगे चलकर यह अभियान कितनी सफलता हासिल कर पाता है।
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