‘राजनतीकि पराजय से बौखलाई कांग्रेस’ चुनाव आयोग पर कांग्रेस के हमले पर भड़कीं स्मृति ईरानी
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों के बीच भाजपा ने उन पर राजनीतिक हमला किया है. भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक पराजय से बौखलाकर देश की संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र को निशाना बना रही है.
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता 20 अक्टूबर से लागू, 100% भारतीय निर्यात पर नहीं लगेगा शुल्क
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक दोगुना करना है. इसके तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है.
खालसा वॉक्स न्यूज वेबसाइट के एक लेख के अनुसार, इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के वस्त्र और परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को मिलेगा. आयात शुल्क हटने से भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड में अन्य देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे. इस समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू न्यूजीलैंड की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है. दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का साझा लक्ष्य भी निर्धारित किया है. एफटीए लागू होने के बाद इसके प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे. कुछ उत्पादों पर शुल्क तुरंत समाप्त हो जाएगा, जबकि कुछ श्रेणियों में शुल्क कई वर्षों में धीरे-धीरे कम किया जाएगा. कुछ कृषि उत्पादों के लिए कोटा और सुरक्षा उपाय भी बनाए रखे गए हैं.
भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव न्यूजीलैंड से आने वाले उत्पादों जैसे कीवी फल, सेब और मनुका हनी पर पड़ सकता है. हालांकि, समझौता भारतीय बाजार को पूरी तरह नहीं खोलता। सरकार ने डेयरी क्षेत्र और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को विशेष सुरक्षा प्रदान की है. समझौते के तहत भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है. कुछ उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जिनमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्ची खालें शामिल हैं. कृषि उत्पादों के मामले में भारत ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था अपनाई है, जिसके तहत सीमित मात्रा में आयात कम शुल्क पर किया जा सकेगा, जबकि अधिक आयात पर सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे. इससे बाजार पहुंच और घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है.
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कीवी फल इस व्यवस्था के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल है। समझौते के पहले वर्ष में न्यूजीलैंड से 6,250 टन कीवी फल शुल्क-मुक्त आयात किए जा सकेंगे. यह सीमा छठे वर्ष तक बढ़कर 15,000 टन हो जाएगी। हालांकि, इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू रहेंगी. इसी तरह सेब के लिए भी कोटा तय किया गया है। हालांकि इन पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो वर्तमान 50 प्रतिशत शुल्क का आधा है. यहां भी न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू होंगी. इससे भारतीय फल उत्पादकों पर सस्ते आयात का प्रभाव सीमित रखने का प्रयास किया गया है. समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी क्षेत्र को कम शुल्क वाले आयात के लिए नहीं खोला है. सरकार ने करोड़ों छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए डेयरी सहित कई कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है.
INPUT: IANS
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