Lauki Juice Benefits: लौकी का जूस है सेहत का खजाना! रोज पीने से मिल सकते हैं ये 5 बड़े फायदे
Lauki Juice Benefits: लौकी ऐसी सब्जी है जिसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह कई जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत है। इसी वजह से कुछ लोग लौकी की सब्जी के साथ-साथ इसका जूस भी पीना पसंद करते हैं। हालांकि, लौकी का जूस हर व्यक्ति के लिए जरूरी या किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसे संतुलित खानपान के हिस्से के तौर पर ही लेना चाहिए।
लौकी के जूस में मौजूद पानी और कुछ पोषक तत्व शरीर को हाइड्रेट रखने और डाइट की पोषण गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन इसके सेवन को लेकर एक अहम सावधानी भी है। यदि लौकी का स्वाद कड़वा हो तो उसका जूस बिल्कुल नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कड़वी लौकी में विषैले कुकुर्बिटासिन की मात्रा अधिक हो सकती है।
शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद
लौकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है। इसलिए इससे बना ताजा जूस शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति में योगदान दे सकता है। गर्मी या शारीरिक गतिविधि के दौरान पर्याप्त पानी पीना जरूरी है और इसके लिए सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प है। लौकी का जूस पानी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
पाचन के लिए हो सकता है उपयोगी
लौकी में मौजूद पानी और यदि जूस में कुछ गूदा शामिल रहे तो थोड़ी मात्रा में फाइबर भी मिल सकता है। संतुलित डाइट में फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, सिर्फ लौकी का जूस पीने की तुलना में पूरी सब्जी खाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि जूस बनाने के दौरान फाइबर कम हो जाता है।
वजन नियंत्रित रखने वाली डाइट
लौकी को आमतौर पर कम कैलोरी वाली सब्जियों में शामिल किया जाता है। बिना चीनी मिलाए लौकी का जूस भी कैलोरी के लिहाज से हल्का पेय हो सकता है। यदि इसे मीठे या अधिक कैलोरी वाले पेय की जगह लिया जाए तो कुल कैलोरी सेवन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि वजन घटाने के लिए केवल किसी एक जूस पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है।
पोषक तत्वों की डाइट में योगदान
लौकी में विटामिन और मिनरल्स की कुछ मात्रा पाई जाती है। संतुलित आहार में इसे शामिल करने से शरीर को विभिन्न पोषक तत्व मिल सकते हैं। बेहतर होगा कि जूस के बजाय अलग-अलग सब्जियों और फलों को पूरी अवस्था में डाइट में शामिल किया जाए, ताकि शरीर को विविध पोषण और पर्याप्त फाइबर मिल सके।
हल्का और ताजा पेय विकल्प
बिना चीनी और अतिरिक्त सामग्री के तैयार किया गया ताजा लौकी का जूस एक हल्का पेय विकल्प हो सकता है। खासकर ऐसे लोग जो मीठे शीतल पेय या ज्यादा कैलोरी वाले ड्रिंक्स कम करना चाहते हैं, वे डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Gorakhpur में बोले Yogi Adityanath, महापुरुषों की दूरदर्शी दृष्टि बनती है भविष्य की मजबूत नींव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सामान्य व्यक्ति अपने परिवार के बारे में सोचता है, लेकिन महापुरुषों की दृष्टि दूरदर्शी होती है। वह यहां गोरखनाथ मंदिर में आयोजित युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। आदित्यनाथ अपने गुरु के गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत एवं अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह में शामिल होने के लिए सोमवार को ही यहां पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि जब देश गुलाम था तब महंत दिग्विजय नाथ ने बालिका शिक्षा और संस्कृत शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी तथा उनके जैसे कुछ ही लोग थे जो कहते थे कि गुलामी की बेड़ियां टूटेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वास्तव में आप जब महापुरुषों के बारे में सुनते हैं, पूज्य संतों के जीवन चरित्र को पढ़ते हैं तो एक नयी प्रेरणा प्राप्त होती है। महापुरुष केवल वर्तमान में नहीं जीता।
जिनके कार्य दूरदर्शी होते हैं, वे हमें भले ही प्रत्यक्ष रूप में वर्तमान में दिखते हों, लेकिन उनकी कार्ययोजना भविष्य के एक सुदृढ़ नींव के रूप में नयी प्रेरणा देती है।’’ आदित्यनाथ ने कहा, आज युगपुरुष महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि है और कल मेरे पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यतिथि है।’ उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद और अन्य संस्थाओं द्वारा किये जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आज से लगभग 94-95 वर्ष पहले जब देश गुलाम था, संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि जब महंत से पूछा गया कि आपने महाराणा प्रताप के नाम पर इसका नामकरण क्यों किया तो उन्होंने कहा था कि जब भी भारत को स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का एहसास कराने के लिए किसी महापुरुष को आदर्श बताना हो, ‘‘तो हम सबके लिए महाराणा प्रताप एक आदर्श उदाहरण हो सकते हैं।’’ मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि महाराणा प्रताप ने अकबर के खिलाफ 28 वर्ष की उम्र में स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म के लिए पहला युद्ध लड़ा था तथा अकबर द्वारा छीने गये सभी दुर्ग को अंतत: वापस लेकर मेवाड़ की धरती पर हिंदुत्व की ध्वजा को पुनर्स्थापित किया था।
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