अमेरिकन ड्रीम्स पर बड़ा ग्रहण: भारतीयों के लिए US Visa का इंतजार पहुंचा 346 दिन, टूरिस्ट और कारोबारियों के सामने क्यों गहराया संकट?
अगर आप भी अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, छुट्टियाँ बिताने का इरादा है या फिर किसी जरूरी बिजनेस डील के सिलसिले में अमेरिका की उड़ान भरने वाले हैं, तो यह खबर आपको बड़ा झटका दे सकती है। भारतीय यात्रियों के लिए अमेरिकी वीजा हासिल करना अब किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है। अमेरिकी सरकार के अपने ही आधिकारिक आंकड़ों ने अब इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारतीयों के लिए यूएस वीजा इंटरव्यू का इंतजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सरकार की शीर्ष निगरानी संस्था'गवर्नमेंट एकाउंटेबिलिटी ऑफिस' यानी GAO की एक ताजा ऑडिट रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में नॉन-इमिग्रेंट वीजा यानी खासकर टूरिस्ट और बिजनेस वीजा के लिए भारतीय आवेदकों को इंटरव्यू की तारीख पाने के लिए औसतन 346 दिन यानी लगभग पूरे एक साल का इंतजार करना पड़ा है।
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जरा सोचिए, कोरोना महामारी से पहले यानी साल 2019 में जहां एक भारतीय को इंटरव्यू के लिए औसतन महज 42 दिन का वक्त लगता था, आज यह वेटिंग पीरियड बढ़कर 8 गुना से भी ज्यादा हो चुका है। 28 सितंबर को जारी इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि भारत में अमेरिकी वीजा की मांग और अमेरिकी दूतावासों व कांसुलेट्स की वीजा प्रोसेस करने की क्षमता के बीच एक बहुत बड़ी खाई पैदा हो चुकी है। वीजा स्लॉट की इस भारी किल्लत ने हजारों पर्यटकों, व्यापारियों और परिजनों से मिलने की आस लगाए बैठे भारतीयों के सपनों पर ब्रेक लगा दिया है। आखिर क्यों गहराया है यह संकट और कब तक सामान्य हो पाएंगे हालात? आइए इस वीडियो में समझते हैं इस रिपोर्ट की पूरी इनसाइड स्टोरी।
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भारत में वीज़ा से जुड़ा सबसे ज़्यादा काम का बोझ देखा गया
वित्त वर्ष 2025 में भारत में लगभग 14.5 लाख नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा आवेदन आए। इन आवेदनों को ऐसे वीज़ा के लिए नियुक्त सिर्फ़ 68 कॉन्सुलर अधिकारियों ने संभाला। इसका मतलब है कि हर कॉन्सुलर अधिकारी पर लगभग 21,401 आवेदन थे, जिससे GAO ऑडिट में सबसे ज़्यादा काम के बोझ वाले देशों में भारत का नाम भी शामिल हो गया। रिपोर्ट में लंबी लाइनों के मुख्य कारणों के तौर पर स्टाफ़ की कमी के दबाव और वीज़ा की मांग में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी को बताया गया है।
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भारत में US वीज़ा के लिए इतना लंबा इंतज़ार क्यों करना पड़ रहा है?
यह समस्या सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है। पूरे US कॉन्सुलर सिस्टम में, विज़िटर-वीज़ा आवेदनों पर फ़ैसले लेने की संख्या FY2019 में 92 लाख से बढ़कर FY2025 में 1.17 करोड़ हो गई, जो महामारी से पहले के स्तर से भी ज़्यादा है। वहीं दूसरी ओर, नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा का काम संभालने वाले कॉन्सुलर अधिकारियों की संख्या FY2024 में 1,342 से घटकर FY2025 में 904 रह गई। यह कमी नई भर्तियां रोकने और स्टाफ़ के नौकरी छोड़ने की वजह से आई। जैसे-जैसे मांग बढ़ी और स्टाफ़ की संख्या कम हुई, पूरे अमेरिका में विज़िटर-वीज़ा इंटरव्यू के लिए औसत इंतज़ार का समय FY2019 में 26 दिनों से बढ़कर FY2025 में 201 दिन हो गया। भारत पर इसका असर ज़्यादा पड़ा क्योंकि उपलब्ध कॉन्सुलर स्टाफ़ की तुलना में यहाँ आवेदन की संख्या बहुत ज़्यादा थी। GAO ने यह भी पाया कि चीन और ब्राज़ील की तुलना में भारत और मेक्सिको में इंटरव्यू के लिए ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ा; आवेदन की मांग के मुकाबले स्टाफ़ की संख्या को इसके लिए एक अहम वजह माना गया।
B1/B2 वीज़ा के लिए अप्लाई करने वालों को सबसे लंबी लाइनों का सामना करना पड़ रहा है। B1/B2 वीज़ा (जो बिज़नेस यात्रा और टूरिज़्म के लिए होते हैं) के लिए अप्लाई करने वाले भारतीयों पर यह दबाव खास तौर पर ज़्यादा है। 17 सितंबर को अपडेट की गई US स्टेट डिपार्टमेंट की अपॉइंटमेंट जानकारी के अनुसार, भारत में अगली उपलब्ध B1/B2 अपॉइंटमेंट के लिए अनुमानित इंतज़ार का समय इस प्रकार था:
हैदराबाद: लगभग 12 महीने
मुंबई: लगभग 11.5 महीने
नई दिल्ली: लगभग 10 महीने
चेन्नई: लगभग 7.5 महीने
कोलकाता: लगभग 6.5 महीने
इन तारीखों को पक्की समय-सीमा नहीं माना जाना चाहिए। स्टेट डिपार्टमेंट समय-समय पर अपॉइंटमेंट के लिए नए स्लॉट जारी करता है, जिसका मतलब है कि आवेदकों को कभी-कभी पहले की तारीख मिल सकती है। जिन आवेदकों ने पहले ही अपॉइंटमेंट ले लिया है, वे भी समय-समय पर सिस्टम चेक कर सकते हैं और अगर कोई पहले का स्लॉट खाली हो जाता है, तो अपना अपॉइंटमेंट उस समय के लिए बदल सकते हैं। स्टूडेंट और वर्क वीज़ा के लिए अप्लाई करने वालों को कम इंतज़ार करना पड़ रहा है। लंबी लाइनों का असर सभी तरह के US वीज़ा पर एक जैसा नहीं होता है। F, M और J वीज़ा (जो स्टूडेंट और एक्सचेंज विज़िटर के लिए होते हैं) के लिए अप्लाई करने वालों को भारतीय कॉन्सुलर पोस्ट पर आम तौर पर कम इंतज़ार करना पड़ता है। हाल के अपॉइंटमेंट डेटा से पता चला है कि इंतज़ार का समय चेन्नई में आधे महीने से भी कम से लेकर मुंबई में लगभग 2.5 महीने तक है। H, L, O, P और Q वीज़ा जैसी नौकरी से जुड़ी कैटेगरी के लिए भी B1/B2 एप्लीकेशन के मुकाबले आम तौर पर कम इंतज़ार करना पड़ता है, हालांकि अलग-अलग जगहों पर अपॉइंटमेंट में देरी अलग-अलग हो सकती है।
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US वीज़ा की फ़ीस भी बढ़ रही है
US जाने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए लंबा इंतज़ार ही एकमात्र चिंता की बात नहीं है। वीज़ा आवेदकों को ज़्यादा लागत का भी सामना करना पड़ रहा है। B1/B2 विज़िटर वीज़ा के लिए स्टैंडर्ड एप्लीकेशन प्रोसेसिंग फ़ीस $185 है। यही फ़ीस F, M और J वीज़ा सहित कई अन्य नॉन-पिटीशन-बेस्ड कैटेगरी पर भी लागू होती है। H, L, O और P वीज़ा जैसी पिटीशन-बेस्ड कैटेगरी के लिए एप्लीकेशन फ़ीस $205 है। इसके अलावा, US कांग्रेस ने 2025 के इमिग्रेशन कानून के तहत नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा आवेदकों के लिए $250 की नई 'वीज़ा इंटीग्रिटी फ़ीस' का कानून बनाया है। इस कानून में प्रावधान है कि यह फ़ीस अन्य अधिकृत वीज़ा फ़ीस के अलावा ली जाएगी, और FY2026 से इसमें सालाना महंगाई के अनुसार बदलाव किया जाएगा।
Kapil Dev ने Virat Kohli के जज्बे को किया सलाम, 15000 ODI रन बनाने पर सराहा
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने वनडे इंटरनेशनल (ODI) में 15,000 रन पूरे करने पर विराट कोहली की तारीफ़ की है। उन्होंने कोहली के टैलेंट, लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता और खुद पर भरोसे की सराहना की। मंगलवार को बात करते हुए, कपिल ने कोहली की इस उपलब्धि को उनके शानदार हुनर का सबूत बताया और उनके बेहतरीन बैटिंग औसत का ज़िक्र किया। कपिल ने कहा कि मुझे लगता है कि उनमें खास टैलेंट है। उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। दुनिया में बहुत कम लोग हैं जिनका औसत 60 से ज़्यादा है। उन्हें सलाम। और सबसे ज़रूरी बात, मुझे लगता है, खेल के प्रति उनका जुनून। मुझे नहीं पता कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट क्यों छोड़ा, लेकिन फिर भी, वह जो कुछ भी कर रहे हैं, ज़रूर अपने लिए कुछ खास कर रहे होंगे ताकि वह उसी लेवल पर प्रदर्शन करते रहें।
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रविवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में भारत के 296 रनों के सफल पीछा (चेज़) के दौरान कोहली ने यह उपलब्धि हासिल की। इस मैच में उन्होंने 88 गेंदों पर नाबाद 139 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और नौ छक्के शामिल थे और उनका स्ट्राइक रेट 157.95 रहा। 37 वर्षीय खिलाड़ी ने नियंत्रण और संयम के साथ-साथ ज़बरदस्त हिटिंग का प्रदर्शन किया, जो उनके करियर के दौरान कई सफल रन चेज़ और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शनों में देखे गए उनके खास बैटिंग स्टाइल को दर्शाता है।
यह पारी कोहली का 86वां इंटरनेशनल शतक था और इसके साथ ही उनके वनडे में कुल रनों की संख्या 15,080 हो गई। सचिन तेंदुलकर के बाद वे 50-ओवर के फॉर्मेट में 15,000 रनों का आंकड़ा पार करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। 315 वनडे मैचों और 303 पारियों में, कोहली ने 59.13 की औसत से 15,080 रन बनाए हैं, जिसमें 55 शतक और 79 अर्धशतक शामिल हैं और उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रहा है।
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जब उनसे पूछा गया कि क्रिकेट के दिग्गजों के बीच, खासकर वनडे में, कोहली को क्या चीज़ अलग बनाती है, तो कपिल ने कोहली के आत्मविश्वास पर ज़ोर दिया। कपिल ने कहा कि उनमें काबिलियत है, और मुझे लगता है कि उन्हें यह पता है; उन्हें खुद पर भरोसा है और वे खुद पर यकीन रखते हैं, जो बहुत-बहुत ज़रूरी है। कोहली ने लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे ज़्यादा शतक (60-60) लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है और घरेलू मैदान पर वनडे में तेंदुलकर के 42 शतकों के रिकॉर्ड की भी बराबरी की है।
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