पूर्व IAS दिव्या मित्तल का ऐलान, बिना किसी पार्टी से जुड़े UP से शुरू करेंगी अपनी राजनीति
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में 13 वर्षों तक कार्यरत रहने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे चुकीं दिव्या मित्तल ने मंगलवार की सुबह घोषणा की कि वह अब राजनीति करेंगी और उसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगी, बल्कि अकेले चलेंगी और देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब मांगेंगी। दिव्या मित्तल ने गत 30 अगस्त को आईएएस से इस्तीफा दे दिया था और खुद एक्स पर 14 सितंबर को बताया कि सरकार ने उनका त्यागपत्र मंजूर कर लिया।
मंगलवार सुबह उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स पर एक पोस्ट में करीब साढ़े नौ मिनट का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, कुछ दिन पहले आईएएस से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। उन्होंने वीडियो में यह भूमिका रखते हुए कहा, ‘‘पहला सवाल अब आगे क्या?
राजनीति। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों ने कहा कि तुम सब कुछ तो बन गईं, आगे क्या बनना है। मैंने कहा कि मुझे उन लोगों की आवाज बननी है, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती।
उन लोगों की तरफ से मुझे देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए। दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए मिर्जापुर जिले में जिलाधिकारी रहने के दौरान की एक कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा कि गांव लहुरिया दह की पहाड़ी पर निरीक्षण के दौरान जब एक महिला ने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल की मांग की तो ‘‘मेरा सर शर्म से झुक गया।
दिव्या ने कहा, उस वक्त उस महिला के घर में पानी तक नहीं था और उसने स्कूल मांगा। मैंने उसे स्कूल दिया लेकिन आज तीन साल बाद भी वह स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ। अब मुझे बताइए कि क्या नहीं था, पैसा था, नियम था, स्वीकृति थी, लेकिन इरादा नहीं था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता और इरादा नहीं था तो एक फाइल पहाड़ बन गई।
मुझे इसका हिसाब चाहिए। उन्होंने लखनऊ में राजस्व परिषद में बतौर विशेष सचिव अपनी तैनाती के एक वाकये का भी उदाहरण दिया और एक भूमिहीन को पट्टे पर जमीन का आवंटन होने के बावजूद कब्जा नहीं मिलने की कहानी भी बताई। मित्तल ने कहा, ‘‘मैंने कब्जा दिलाने के लिए प्रयास किया तो वहां से जवाब आया कि ऊपर से मना किया किया गया है।
सवाल उठाया कि ये ऊपर कौन है, संविधान तो कहता है कि सबसे ऊपर लोग हैं तो उसे न्याय के लिए क्यों भटकना पड़ रहा है। मुझे उन पन्नों में लिपटे अन्याय का हिसाब चाहिए।’’ उन्होंने ऐलान किया कि वह किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ेंगी और अकेले चलेंगी। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मकसद राजनेता बनना नहीं बल्कि पूरी राजनीति को बदलना है।’’ दिव्या मित्तल ने आईआईटी-दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए करने के बाद लंदन में नौकरी की लेकिन बाद में भारत लौट आईं।
मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में अफसर बनकर आई थी लेकिन यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया। अब प्रदेश की मिट्टी ही मेरी कर्मभूमि है और अपनी राजनीति की शुरुआत यहीं से ही करूंगी।’’ उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के रूप में अपनी आखिरी तैनाती से पहले दिव्या मित्तल संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं।
Rahul Gandhi ने X पर उठाया महिला सुरक्षा का मुद्दा, दिल्ली के छात्रों के आंदोलन का साथ दिया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के बेहतर इंतज़ामों की मांग को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर इस मुद्दे पर बात करते हुए युवा महिलाओं, खासकर 'जेनरेशन Z' की महिलाओं से बड़ी संख्या में इस आंदोलन से जुड़ने की अपील की। अपने बयान में गांधी ने महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों के जवाब में उनकी आवाजाही पर रोक लगाने वाले उपायों की आलोचना की।
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राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के लिए उन्हें सज़ा देना बंद करें। हमारे देश में महिलाएं सड़कों पर चलने, परेशान किए जाने और रेप के डर से सहमी हुई हैं। और सरकार का जवाब क्या है? घर पर रहो। उन्होंने इस सोच को "पितृसत्ता (patriarchy) का असर" बताया—एक ऐसा सिस्टम जो पीड़ित को ही दोषी ठहराता है और अपराधी को बचाता है। अब इसे खत्म करने का समय आ गया है।
गांधी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इसका समाधान सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने और दोषियों को तुरंत सज़ा दिलाने में है। उन्होंने कहा कि समाधान महिलाओं को घरों में बंद करना नहीं है। समाधान यह है कि हम अपनी सड़कों को सुरक्षित बनाएं, महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव करने वाले पुरुषों की सोच का सामना करें और उन लोगों को सज़ा दें जो उन पर हमला करते हैं - और यह सज़ा बिना किसी अपवाद के तुरंत दी जानी चाहिए।
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उनकी ये बातें दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के उस विरोध-प्रदर्शन के बीच आईं, जो इस महीने की शुरुआत में दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप के बाद शुरू हुआ था। पहला विरोध-प्रदर्शन 23 सितंबर को हुआ था, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों (जैसे लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन, मिरांडा हाउस, गार्गी कॉलेज और डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी) के लगभग 200 छात्र शामिल हुए। उन्होंने कैंपस के आस-पास उत्पीड़न, अपर्याप्त निगरानी और पुलिसिंग, और शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
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