अजमेर के प्रिंसिपल बोले- पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई:आजादी मिली तो देश में तीन ही नेता थे- गांधी, जिन्ना और अम्बेडकर; नेहरू का नाम नहीं था
अजमेर के राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने कहा- 14 अगस्त 1947 को भारत के राजनीतिक पटल पर और विश्व के पटल पर एक देश का नाम आया। वह देश पाकिस्तान था। 15 अगस्त 1947 सुबह दस-साढ़े 10 बजे भारत का उदय हुआ। पाकिस्तान हमसे 12 घंटे बड़ा है, पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई है। जब आजादी मिली तो देश में तीन ही नेता थे- गांधी, जिन्ना और अम्बेडकर। यहां नेहरू नाम नहीं था, ध्यान रखना। ये तीन ही नेता लोकप्रिय थे। विदेशी पत्रकार इंटरव्यू के लिए आए तो पहले गांधी जी के पास गए। रात के आठ बज चुके थे। गांधी सो गए थे। करीब दस बजे जिन्ना के पास गए। वहां पता चला कि वे बाहर गए या सो गए। इसके बाद रात करीब 12 बजे अम्बेडकर के पास गए। अम्बेडकर हिन्दू कोड बिल की तैयारी कर रहे थे। जब पत्रकारों ने कहा कि अब तक आप जाग रहे हैं। इस पर अम्बेडकर ने कहा- उन दोनों के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो गए हैं। मेरा समाज अभी सो रहा है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है। समाज व देश एक ही है, यही भारतीय ज्ञान परम्परा है। ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में हुए राजस्थान सोशियो लॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस 23 और 24 जनवरी को हुई थी। 24 जनवरी को मनोज बेहरवाल ने ये बातें कही थीं। 3 देशों के प्रतिनिधियों ने पहुंचे थे कॉन्फ्रेंस में राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत के सात राज्यों और राजस्थान के 20 से अधिक जिलों के प्रतिभागियों के साथ-साथ तीन देशों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। यह सेमिनार भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित थी और इसका आयोजन ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में किया गया था। पाकिस्तान ने पहले घुट्टी पी मुख्य मेहमान के रूप में बोलते हुए, प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने पाकिस्तान के निर्माण पर टिप्पणी की। बेहरवाल ने कहा- पाकिस्तान ने पहले घुट्टी पी उसके गीत गाए, उसे नहलाया गया और उसका सब कुछ कराया गया, जिसके कारण वह बड़ा भाई बन गया। भारत बाद में अस्तित्व में आया। बेहरवाल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया और सोचा कि वह बहुत कुछ हासिल कर लेगा, लेकिन बाद में भारत ने उसे 45 करोड़ रुपए दिए ताकि वह अपनी जिंदगी जी सके। हालांकि, पाकिस्तान ने उन पैसों को आतंकवाद पर सट्टा लगाने में बर्बाद कर दिया। राजनीति भारत के समाज को तोड़ने का काम करती थी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बेहरवाल ने यह भी कहा कि 2014 के बाद भारतीय राजनीति और भारत के समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का कनेक्शन पहली बार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले, राजनीति भारत के समाज को तोड़ने का काम करती थी, जिससे समाज परेशान था और यह नहीं जानता था कि क्या करना है। कौम अपना इतिहास नहीं जानती बेहरवाल ने कहा- भारतीय ज्ञान परम्परा, जिसे आईकेएस कहते हैं, लेकिन बीकेएस होना चाहिए। आई हटा देना चाहिए और बी लगाना चाहिए। थोड़ी गड़बड़ है। अम्बेडकर ने कहा कि जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, उसका पतन निश्चित है। पढ़े लिखे लोगों का समाज से कनेक्शन कट हो चुका है। ऐसे लोगों को समाज के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। ये अतिथि इनको मिला सम्मान विशिष्ट अतिथि सी ए अंकुर गोयल थे। मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रोफेसर एम एल शर्मा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ रेखा मंडोवरा ने की। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समन्वयक डॉ दुष्यंत पारीक व सह समन्वयक डॉ मानक राम सिंगारिया थे। सर्वश्रेष्ठ पत्र वाचन का पुरस्कार शोधार्थी तन्मय शर्मा, लकी बिरजानिया, कृष्णा गोसाई एवं टीना शर्मा को प्राप्त हुआ। ऑनलाइन प्रस्तुतकर्ता आसिफ अहमदी और अफगानिस्तान से आए शोधार्थी जकारिया को भी पुरस्कार मिला। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर हरीश कुमार (हिंदी) एवं श्वेता स्वामी (अंग्रेजी) ने किया।
अविमुक्तेश्वरानंद बोले- केशव मौर्य को डांटा जा रहा:उन्हें आने नहीं दिया जा रहा, समझदार नेता को दबा दिया गया
प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की तारीफ की। सोमवार सुबह उन्होंने कहा, "अगर केशव मौर्य का बस चलता तो वो कब का हमें नहलाकर चले गए होते। उनको डांटा जा रहा है। यहां आने नहीं दिया जा रहा है। एक समझदार नेता को दबा दिया गया।" दरअसल, रविवार को केशव मौर्य प्रयागराज पहुंचे। सर्किट हाउस में शंकराचार्य विवाद से जुड़े सवाल पर कहा, "जब मुझसे बात करने को कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना कर सकता हूं, उनके चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करता हूं कि संगम में स्नान कर विवाद खत्म करें।" माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच 9 दिन से विवाद चल रहा है। कम या खत्म होने की बजाए मामला बढ़ता जा रहा है। रविवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था, "कितना भी जुल्म कर लो, पीछे नहीं हटूंगा।" वहीं, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आ गए। उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति को यह साबित करना पड़े कि वह शंकराचार्य है, इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है।" अब तक क्या हुआ, जानिए- 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। मारपीट हुई। पुलिस उनकी पालकी खींचकर दूर ले गई। इसके बाद वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने दो नोटिस दिए। पहले में शंकराचार्य की पदवी लिखने पर और दूसरे में मौनी अमावस्या के दिन हंगामा करने पर सवाल पूछे। चेतावनी दी गई कि माघ मेले से बैन किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया। 24 जनवरी की रात उनके शिविर में कट्टर सनातनी सेना के 8–10 युवक नारे लगाते पहुंचे और घुसने की कोशिश की। ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- जितना जुल्म होगा, उतनी मजबूती से कदम उठाऊंगा। शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए...
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