आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर अमेरिका की असंवेदनशीलता आपसी रिश्तों के लिए समस्या : जयशंकर
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जब ऋषिकेश दा ने राजेश खन्ना की जिद पर बदला फिल्म का क्लाइमेक्स, फिर भी अमिताभ ले गए बाजी
नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी पर्दे पर खत्म होने के बाद भी दर्शकों के जेहन में लंबे समय तक चलती रहती है। ऋषिकेश मुखर्जी की 1973 में आई फिल्म 'नमक हराम' भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की जोड़ी दूसरी और आखिरी बार बड़े पर्दे पर साथ नजर आई थी। इससे पहले दोनों को फिल्म 'आनंद' में खूब पसंद किया गया था। 'नमक हराम' की शूटिंग के दौरान दोनों सितारों के बीच स्टारडम की बदलती तस्वीर भी साफ दिखाई देने लगी थी।
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