Odisha के DMF फंड में भारी खामियां, CAG रिपोर्ट में स्टेडियम और अतिरिक्त मजदूरी पर खर्च उजागर
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने ओडिशा में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत परियोजनाओं की मंजूरी और उनके क्रियान्वयन में कई खामियों को उजागर किया है। इन फाउंडेशन का उद्देश्य राज्य के खनन प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित एवं लाभ के लिए काम करना है। सोमवार को ओडिशा विधानसभा में पेश की गई अपनी एक रिपोर्ट में कैग ने जांच के लिए चुने गए खनन क्षेत्रों और कार्य प्रभागों में जिला खनिज फाउंडेशन के अंशदान के आकलन, संग्रह और निगरानी में महत्वपूर्ण व्यवस्थागत कमियों को उजागर किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित डीएमएफ अंशदान दरों का गलत तरीके से इस्तेमाल करने, अंतिम रॉयल्टी आकलन के बाद अंशदान का दोबारा आकलन नहीं करने और भुगतान में देरी पर ब्याज नहीं लगाने के कारण डीएमएफ के लिए होने वाले राजस्व संग्रह में काफी कमी आई। ये अंशदान ओडिशा में खनन पट्टाधारकों द्वारा जिला खनिज फाउंडेशन को किया जाने वाला अनिवार्य वित्तीय भुगतान है। लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, छह जिलों ने ब्याज सहित डीएमएफ अंशदान के रूप में 22,568.17 करोड़ रुपये एकत्र किए और वित्त वर्ष 2015-16 से 2023-24 के दौरान डीएमएफ कोष से 20,947.52 करोड़ रुपये की लागत वाली 17,435 परियोजनाओं को मंजूरी दी।
हालांकि, इन छह में से किसी भी डीएमएफ ने परिप्रेक्ष्य योजना और मास्टर प्लान तैयार नहीं किया। जिन छह जिलों का लेखा परीक्षण किया गया, उनमें सुंदरगढ़, क्योंझर, जाजपुर, मयूरभंज, ढेंकानाल और नबरंगपुर शामिल हैं। लेखा परीक्षण के लिए चुने गए छह डीएमएफ में से मयूरभंज, ढेंकानाल और नबरंगपुर जिलों ने वर्ष 2015 से 2024 के दौरान अतिरिक्त डीएमएफ धनराशि के लिए ‘फ्लेक्सी डिपॉजिट/ऑटो स्वीप’ खाते का विकल्प नहीं चुना।
इसके परिणामस्वरूप 9.49 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। इसी तरह, क्योंझर डीएमएफ को 84.51 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। कैग ने कहा कि जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों के डीएमएफ से 171.79 करोड़ रुपये की धनराशि मनरेगा निदेशक को रोजगार मांगने वाले लोगों को अतिरिक्त मजदूरी के भुगतान के लिए जारी की गई, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
उसने कहा कि जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ डीएमएफ में परियोजनाओं के क्रियान्वयन के बाद कार्यान्वयन एजेंसियों ने 470.25 करोड़ रुपये की अप्रयुक्त राशि और उस पर अर्जित 26.51 करोड़ रुपये के ब्याज को डीएमएफ को वापस नहीं किया। इसी तरह, ढेंकानाल और मयूरभंज की कार्यान्वयन एजेंसियों ने क्रमशः अपने संबंधित डीएमएफ को 87 लाख रुपये का अर्जित ब्याज वापस नहीं किया था। लेखा परीक्षा में यह भी पाया गया कि सुंदरगढ़ में डीएमएफ की धनराशि से हॉकी स्टेडियम के निर्माण पर 136.77 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना योजना के दिशा-निर्देशों के तहत अनुमत गतिविधियों में शामिल नहीं है। कैग ने बताया कि कोविड महामारी के दौरान सुंदरगढ़ डीएमएफ से राउरकेला के एक निजी अस्पताल को 98.85 करोड़ रुपये के आवश्यक भुगतान के मुकाबले 109.45 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 10.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। लेखा परीक्षक ने ओडिशा सरकार को सलाह दी कि वह नियमों के प्रावधानों के अनुसार डीएमएफ की धनराशि का उचित लेखा-जोखा सुनिश्चित करे और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा उस पर अर्जित ब्याज की राशि वापस कराए।
कैग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकार मंजूर की गई परियोजनाओं को समय पर पूरा कराए, वित्त वर्ष के भीतर जारी धनराशि का पूरी तरह इस्तेमाल हो और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा कराए जाएं।
FBI की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हुआ Goldy Brar, 10 लाख डॉलर इनाम
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 29 सितंबर अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने सोमवार को कुख्यात अपराधी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को 10 शीर्ष वांछित भगोड़े अपराधियों की सूची में शामिल किया और उसकी गिरफ्तारी में सहायक सूचना देने पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की। एफबीआई ने कहा, ‘‘लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले संगठित अपराध गिरोह में कथित संलिप्तता के लिए सतिंदरजीत सिंह वांछित है। यह गिरोह दक्षिणी कैलिफोर्निया के साथ-साथ पूरे अमेरिका और कनाडा में कई तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल है।’’ जांच एजेंसी ने चेतावनी दी कि गोल्डी बराड़ को हथियारों के साथ रहने वाला और खतरनाक अपराधी माना जाना चाहिए जिसके देश छोड़ने का जोखिम है।
एफबीआई के अनुसार, गोल्डी बराड़ राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की हत्या, गोलीबारी, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, मारपीट तथा मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी जैसी गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल है। एफबीआई ने कहा कि गोल्डी बराड़ अमेरिका में है और उत्तरी अमेरिका में गिरोह का कथित सरगना है। अमेरिकी अटॉर्नी (फर्स्ट असिस्टेंट) बिल एसाइली ने कहा, ‘‘एफबीआई की 10 शीर्ष वांछित भगोड़ों की सूची में इस आरोपी का शामिल होना अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों पर कानून का शिकंजा कसने के सरकार के संकल्प को रेखांकित करता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा, यूरोप और एशिया की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर हम गोल्डी बराड़ जैसे अपराधियों को पकड़ने का अभियान जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वे दोबारा कभी जेल से बाहर न आ सकें।’’ रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की उप आयुक्त लिसा मोरलैंड ने कहा, ‘‘गोल्डी बराड़ और उसके गिरोह ने हत्याओं, गोलीबारी, जान से मारने की धमकियों, रंगदारी, आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया है और मादक पदार्थ की तस्करी कर कई जिंदगियों को तबाह किया है।’’ लॉस एंजिलिस में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मोरलैंड ने कहा, ‘‘अगर हमें पता होता कि वह इस समय कहां है, तो हम आज यहां नहीं होते।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधी के प्रति किसी तरह की हमदर्दी नहीं रखनी चाहिए।
अमेरिका के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की डिस्ट्रिक्ट अदालत ने एक जुलाई को गोल्डी बराड़ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उसके खिलाफ ‘रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस’ (आरआईसीओ) कानून के तहत आपराधिक साजिश, वसूली के जरिए कारोबार को प्रभावित करने, ऐसा करने का प्रयास करने की साजिश तथा मादक पदार्थों की तस्करी और उन्हें तस्करी के इरादे से अपने पास रखने की साजिश के आरोप लगाए गए हैं। गोल्डी बराड़ उन भगोड़े आरोपियों में शामिल है, जिनकी पहचान भारत से संचालित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों के खिलाफ वर्षों तक चली संघीय जांच ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के बाद हुई थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने जुलाई में ऐसे तीन समूहों से जुड़े 37 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे।
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