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धामी सरकार का बड़ा फोकस! पहाड़ की इन 7 समस्याओं का विज्ञान-तकनीक से निकलेगा हल, उत्तराखंड को क्या-क्या होगा फायदा?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल में वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बैठक कर नीति का विमोचन किया. इस दौरान ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) से जुड़ी वर्ष 2023-24 और वित्तीय वर्ष 2024-25 की तकनीकी रिपोर्ट भी जारी की गई. बैठक में प्राकृतिक संसाधनों की आर्थिक अहमियत, पर्यावरणीय सेवाओं और कार्बन क्रेडिट जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई.

पहाड़ की समस्याओं का स्थानीय तकनीक से निकलेगा हल

उत्तराखंड के लिए इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वैज्ञानिक शोध को सीधे राज्य की स्थानीय जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया गया है. नीति में हिमनद विज्ञान, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और पलायन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है.

 जल स्रोतों के संरक्षण और कृषि में नई तकनीक का होगा इस्तेमाल

इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में शोध और तकनीकी समाधान उत्तराखंड की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जा सकते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और आपदा की बेहतर निगरानी से लेकर जल स्रोतों के संरक्षण और कृषि में नई तकनीक के इस्तेमाल तक, कई क्षेत्रों में इसका उपयोग संभव है. 

पानी की समस्या पर भी तकनीक से काम

उत्तराखंड में जल स्रोतों और पानी की उपलब्धता से जुड़ी चुनौती को देखते हुए वाटर हार्वेस्टिंग को आम लोगों के लिए आसान और कम खर्चीला बनाने पर भी जोर दिया गया है. सरकार की कोशिश ऐसे मॉडल विकसित करने की है जिन्हें बड़े सरकारी प्रोजेक्ट के बजाय आम लोग अपने घर और आसपास के स्तर पर भी अपना सकें. इससे वर्षा जल के संरक्षण और स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. 

जंगल और प्राकृतिक संपदा सिर्फ पर्यावरण नहीं, आर्थिक ताकत भी

GEP रिपोर्ट के जरिए उत्तराखंड के जंगल, जल, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण और कार्बन अवशोषण जैसी पर्यावरणीय सेवाओं का आर्थिक मूल्यांकन करने पर जोर दिया जा रहा है.यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में प्राकृतिक संसाधनों का योगदान केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है. जंगल और जल स्रोत पर्यटन, कृषि, स्थानीय आजीविका और अर्थव्यवस्था से भी जुड़े हैं. GEP के जरिए इन संसाधनों के आर्थिक योगदान को वैज्ञानिक तरीके से समझने का प्रयास किया जा रहा है. 

कार्बन क्रेडिट से उत्तराखंड को मिल सकता है नया आर्थिक अवसर

सीएम धामी ने विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने के निर्देश भी दिए हैं. उत्तराखंड की बड़ी वन संपदा और कार्बन अवशोषण की क्षमता को देखते हुए यह क्षेत्र भविष्य में राज्य के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है. हालांकि कार्बन क्रेडिट से वास्तविक आर्थिक लाभ कितना होगा, यह आगे बनने वाली व्यवस्था, परियोजनाओं और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.फिलहाल सरकार ने इसे नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. 

युवाओं और स्टार्टअप के लिए भी खुल सकते हैं नए रास्ते

विज्ञान एवं तकनीक नीति में अनुसंधान संस्थानों, नवाचार केंद्रों और स्थानीय स्तर पर शोध को मजबूत करने की बात कही गई है. नीति में AI, ड्रोन, रोबोटिक्स, ब्लॉकचेन, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों को भी महत्व दिया गया है. इससे उत्तराखंड के युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए स्थानीय समस्याओं पर आधारित तकनीकी समाधान विकसित करने के अवसर बढ़ सकते हैं. सरकार ने शोध, नवाचार और स्थानीय जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में काम करने की बात कही है. 

आपदा प्रबंधन से लेकर खेती तक, कई क्षेत्रों में असर

उत्तराखंड में हर साल प्राकृतिक आपदाएं बड़ी चुनौती बनती हैं.ऐसे में विज्ञान आधारित आपदा प्रबंधन, हिमनद अध्ययन और तकनीकी निगरानी का विस्तार महत्वपूर्ण हो सकता है.इसी तरह कृषि में नई तकनीक, जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी समाधान और पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौतियों पर शोध से स्थानीय स्तर पर सुविधाओं को बेहतर बनाने की संभावना है.

 

 

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