नेशंस लीग-बाल खींचने पर 2 रेड कार्ड:एंग्विला के एक ही खिलाड़ी के एंटीगुआ एंड बारबुडा के दो खिलाड़ियों ने मैच में बाल खिंचे
कॉन्काकैफ नेशंस लीग के एक मुकाबले में अजीब घटना देखने को मिली। एंग्विला के फॉरवर्ड ईडन सिपिओ के करीब 1.5 मीटर लंबे बाल खींचने पर एंटीगुआ एंड बारबुडा के दो खिलाड़ियों को सीधे रेड कार्ड दिखाया गया। दोनों घटनाएं अलग-अलग समय पर हुईं। एंटीगुआ एंड बारबुडा ने इसके बावजूद मैच 5-0 से जीता। 69वें मिनट में मैदान पर आए सिपिओ सर विवियन रिचर्ड्स स्टेडियम में खेले गए मैच में सिपिओ 69वें मिनट में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर आए। उस समय एंग्विला 0-5 से पीछे थी। सिपिओ अपने लंबे बाल के लिए पहचाने जाते हैं। खुले रखने पर उनके बाल टखनों तक पहुंचते हैं। बांधने पर इन्हें कमर के चारों ओर लपेटना पड़ता है। मैच के 71वें मिनट में सिपिओ अपने डिफेंस एरिया में गेंद लेकर थे। तभी एंटीगुआ एंड बारबुडा के मिडफील्डर कियोन ग्रीन ने पीछे से उनके बाल पकड़कर खींच दिए। सिपिओ ने इसका विरोध किया। रेफरी ने ग्रीन को सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। स्टॉपेज टाइम में फिर बाल खींचे मैच के स्टॉपेज टाइम में ऐसी ही घटना दोबारा हुई। इस बार एंटीगुआ एंड बारबुडा के शालोन नाइट ने सिपिओ के बालों का एक हिस्सा पकड़ लिया। बाल खिंचने के बाद सिपिओ मैदान पर गिर गए। रेफरी ने नाइट को भी सीधे रेड कार्ड दिखाया। इसके बाद एंटीगुआ एंड बारबुडा को मैच के आखिरी पलों में 9 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। बाल खींचने पर रेड कार्ड क्यों? फुटबॉल के नियमों के तहत जानबूझकर किसी खिलाड़ी के खिलाफ हिंसक आचरण करना रेड कार्ड का कारण बन सकता है। बाल खींचना भी परिस्थितियों और इस्तेमाल की गई ताकत के आधार पर इसी श्रेणी में आ सकता है। एंटीगुआ ने 9 खिलाड़ियों के साथ भी मैच जीता दो खिलाड़ियों के रेड कार्ड के बावजूद एंटीगुआ एंड बारबुडा ने मैच 5-0 से जीता। टीम ने सिपिओ के मैदान पर आने से पहले ही पांच गोल की बढ़त बना ली थी। कियोन ग्रीन और शालोन नाइट को रेड कार्ड मिलने के कारण अगले मैच में निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। ------------------------------------ स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… FIDE अवॉर्ड्स - दिव्या देशमुख बनीं बेस्ट फीमेल चेस प्लेयर:भारत की ओपन-विमेंस टीम बेस्ट टीम चुनी गई; लगातार तीसरी बार नोना गैप्रिंडाशविली ट्रॉफी जीती भारतीय चेस ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख को FIDE एक्सीलेंस अवॉर्ड्स में बेस्ट चेस प्लेयर (फीमेल) चुना गया है। पिछले एक साल में विमेंस वर्ल्ड कप में उनके खिताबी प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें यह सम्मान मिला। उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव को बेस्ट चेस प्लेयर (मेल) चुना गया। पूरी खबर
दिल्ली की जज का रेप पीड़ित बच्ची को स्पेशल लेटर:लिखा- तुम्हारा बचपन लौटा नहीं सकते, लेकिन साहस याद रखेंगे, दोषी कभी आजाद नहीं होगा
दिल्ली की ट्रायल कोर्ट जज रजनी रंगा ने 10 साल की रेप पीड़ित बच्ची के लिए फैसला सुनाने के बाद एक खास लेटर लिखा। इसमें उन्होंने कहा- हम तुम्हारा बचपन तो नहीं लौटा सकते, लेकिन तुम्हारी हिम्मत याद रखेंगे। जिसने तुम्हें चोट पहुंचाई वह अब कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस लेटर को बच्ची या उसके परिवार तक पहुंचाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इसे ‘करेज नोट’ यानी साहस का संदेश बताया। नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को इसे प्रिंट कर दो हफ्ते में बच्ची तक पहुंचाने को कहा गया है। मामला 23 जुलाई 2023 का है। उस समय बच्ची 7 साल की थी। उसके माता-पिता ने सुमित शक्य के खिलाफ रेप की शिकायत की थी। बच्ची उसे अंकल कहती थी। पीड़ित ने कोर्ट से कहा था कि अंकल को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए। जज ने बच्ची को क्या लिखा ‘डियर चाइल्ड’ से शुरू हुआ लेटर जज रजनी रंगा ने लेटर की शुरुआत ‘डियर चाइल्ड’ से की। उन्होंने बच्ची के कोर्ट में आने, आरोपी की पहचान करने और सच बताने की हिम्मत की तारीफ की। जज ने लिखा- तुम चुप नहीं रही, बल्कि अपनी मां को पूरी बात बताई। तमने जिस हिम्मत के साथ सच बताया, उससे आरोपी को किसी दूसरे बच्चे को नुकसान पहुंचाने से रोका जा सका। कोर्ट तुम्हारी इस बहादुरी को याद रखेगा। लेटर में ‘अंकल’ का भी जिक्र जज ने लेटर में लिखा- कोर्ट ने तुम्हारी बात सुनी है। दोषी अपनी जिंदगी के बाकी समय तक जेल में रहेगा। वह जेल में ही बूढ़ा होगा और वहीं उसकी जिंदगी खत्म होगी। वह तुम्हें, तुम्हारी छोटी बहन या किसी दूसरे बच्चे को दोबारा नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। ‘अब अपनी जिंदगी जियो’ लेटर के आखिर में जज ने बच्ची से कहा- अब बेटा, अपनी जिंदगी जियो। स्कूल जाओ। दोस्त बनाओ। हंसो। खेलो। सपने देखो। आरोपी को उम्रभर जेल की सजा सुमित शक्य को POCSO के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के मामले में प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक कठोर कारावास की सजा मिली है। उस पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। आपराधिक धमकी के मामले में उसे 5 साल की कठोर कैद और ₹20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। बच्ची को ₹10.50 लाख मुआवजा ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के लिए ₹10.50 लाख मुआवजा तय किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली DLSA के सचिव से मुआवजे के भुगतान की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट ने जमानत पर राहत नहीं दी दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा पर तत्काल रोक लगाने और जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले में मौजूद सबूतों, जिनमें फोरेंसिक सबूत भी शामिल हैं, को ध्यान में रखा। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी, जबकि आरोपी की अपील 20 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध है।
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