Responsive Scrollable Menu

क्या गुलवीर एशियन गेम्स में मेडल की हैट्रिक लगा पाएंगे:5000 मीटर में साबले के साथ फाइनल में उतरेंगे, आज भारत के 9 मेडल मुकाबले

भारत एशियन गेम्स के 10वें दिन 9 मेडल इवेंट में उतरेगा। शूटिंग में पुरुष और महिला ट्रैप टीम फाइनल होंगे। बॉक्सिंग में परवीन, अंकुश पंघाल और नरेंद्र सेमीफाइनल खेलेंगे। एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह और अविनाश साबले 5000 मीटर फाइनल में उतरेंगे। गुलवीर के पास गेम्स में तीसरा मेडल जीतकर हैट्रिक पूरी करने का मौका है। उन्होंने 10 हजार मीटर और 1500 मीटर रेस में सिल्वर जीता है। सुबह 4:54 बजे शुरू होंगे भारत के मुकाबले दिन की शुरुआत सुबह 4:54 बजे सर्फिंग से होगी। किशोर कुमार अनबरासु पुरुष शॉर्टबोर्ड क्वार्टर फाइनल में फिलीपींस के टोबी एस्पेजोन के खिलाफ उतरेंगे। क्वालिफाई करने पर उनका सेमीफाइनल 7:47 बजे, ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला 9:26 बजे और गोल्ड मेडल मुकाबला 10:35 बजे होगा। आर्चरी में धीरज बोम्मदेवरा से उम्मीद कुराश में विपिन कुमार विपिन कुमार पुरुष 66 किग्रा कुराश में राउंड ऑफ-16 से अभियान शुरू करेंगे। मुकाबला जीतने पर वे 8 बजे क्वार्टर फाइनल, 10:50 बजे सेमीफाइनल और 11:45 बजे फाइनल खेल सकते हैं। कुराश उज्बेकिस्तान का पारंपरिक मार्शल आर्ट का खेल है। सुबह 6:30 बजे शूटिंग में मेडल का मौका ट्रैक साइक्लिंग में भी मेडल रेस सुबह 6:30 बजे स्क्वॉश में ईरान से मुकाबला बॉक्सिंग में परवीन, अंकुश और नरेंद्र के सेमीफाइनल टेनिस में कई मुकाबले सुबह 10 बजे धक्षिणेश्वर सुरेश पुरुष सिंगल्स के सेकंड राउंड में इंडोनेशिया के गुनावान त्रिस्मुवंतारा से खेलेंगे। इसके बाद सुमित नागल दक्षिण कोरिया के हांग सेओंगचान से पुरुष सिंगल्स सेकंड राउंड में भिड़ेंगे। पुरुष डबल्स में युकी भांबरी/धक्षिणेश्वर सुरेश की जोड़ी कजाकिस्तान की डेनिस येवसेयेव/बेइबिट झुकायेव की जोड़ी से खेलेगी। अनिरुद्ध चंद्रशेखर/एन. श्रीराम बालाजी नेपाल के अभिषेक बस्तोला/प्रदीप खड़का के खिलाफ उतरेंगे। दोपहर 12 बजे के बाद एन. श्रीराम बालाजी/अंकिता रैना मिक्स्ड डबल्स के पहले राउंड में हांगकांग की कैरन थॉम्पसन/यूडिस चोंग से खेलेंगे। युकी भांबरी/रुतुजा भोसले का मिक्स्ड डबल्स सेकंड राउंड मुकाबला भी होना है, लेकिन उसका समय तय नहीं है।

Continue reading on the app

मजरूह सुल्तानपुरी से पहली मुलाकात पर बोले ललित पंडित:उन्होंने कहा था- तुम क्यों आ गए, मैं तो अब काम नहीं करता

हिंदी सिनेमा में 90 के दशक के संगीत की बात हो और संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। इस जोड़ी ने ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘खामोशी’, ‘कभी हां कभी ना’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी फिल्मों के संगीत से अपनी अलग पहचान बनाई। इसी दौर में गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी के साथ उनका खास रिश्ता बना। अब मजरूह सुल्तानपुरी की बर्थ एनिवर्सरी पर संगीतकार ललित पंडित उनका लिखा पुराना गीत ‘बात नजर की है’ रिलीज करने जा रहे हैं। यह गीत कई साल पहले रिकॉर्ड किया गया था और मूल रूप से ललित और जतिन के प्राइवेट एल्बम का हिस्सा बनने वाला था। खास बात यह है कि इसकी धुन ललित पंडित ने बनाई थी और मजरूह सुल्तानपुरी ने उसी धुन पर बोल लिखे थे। ललित पंडित ने दैनिक भास्कर से बातचीत में मजरूह सुल्तानपुरी के साथ अपने रिश्ते, काम करने के अनुभव और धुन पर गीत लिखने की प्रक्रिया से जुड़े कई किस्से साझा किए। सवाल: मजरूह सुल्तानपुरी की बर्थ एनिवर्सरी पर आप उनका लिखा गीत रिलीज कर रहे हैं। इसके बारे में बताइए? जवाब: पहली अक्टूबर को मजरूह साहब का जन्मदिन होता है। जो गाना मैं रिलीज करने जा रहा हूं, वह हमने बहुत पहले रिकॉर्ड किया था। एक वक्त था जब मैं और जतिन एक एल्बम करना चाहते थे और मजरूह साहब उसके गाने लिख रहे थे। यह उन्हीं गानों में से एक है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह मजरूह साहब का लिखा हुआ गीत है और उनके जन्मदिन पर ही रिलीज हो रहा है। मजरूह साहब के साथ हमारा बहुत अच्छा रिश्ता रहा। उन्होंने हमारे साथ काफी काम किया। ‘जो जीता वही सिकंदर’ उन्हीं की लिखी हुई थी। मेरे करियर के शुरुआती दौर में फिल्म ‘यारा दिलदारा’ के गीत ‘बिन तेरे सनम’ ने जतिन-ललित को जो पहचान दिलाई, उसके बोल भी मजरूह साहब ने लिखे थे। इसके अलावा ‘कभी हां कभी ना’ और ‘खामोशी’ जैसी फिल्मों में उनके साथ काम करने का मौका मिला। मजरूह साहब से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे मन में हमेशा था कि उनके जन्मदिन पर उनका लिखा कोई गीत रिलीज करूं। अब पहली अक्टूबर को यह गाना सभी म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। सवाल: मजरूह साहब के साथ काम करते हुए आपको कब एहसास हुआ कि आपके पसंदीदा कई गाने उन्हीं ने लिखे हैं? जवाब: जब मैंने उनके साथ काम करना शुरू किया था, तब मुझे भी इतनी जानकारी नहीं थी कि उन्होंने कितना बड़ा काम किया है। बाद में एहसास हुआ कि मेरे जितने पसंदीदा गाने हैं, उनमें से कई मजरूह साहब के लिखे हुए हैं। बेशक आनंद बख्शी साहब और कई दूसरे बड़े गीतकार भी थे, लेकिन मेरे व्यक्तिगत पसंदीदा गानों में, जिन्हें मैं अक्सर गाता हूं, मजरूह साहब के कई गाने शामिल हैं। इसलिए जतिन और मुझे उनसे बहुत लगाव था। हमारे संगीत के शुरुआती दौर में उनकी बहुत गाइडेंस रही। वह हमारे लिए गुरु जैसे थे। उनके गानों के अलावा उनकी बातें सुनने में भी बहुत मजा आता था। वह हमारे साथ काफी फ्रेंडली हो गए थे। वह दौर हमारे लिए बहुत यादगार रहा। सवाल: जब आपने संगीत में करियर शुरू करने के बारे में सोचा, तब मजरूह साहब से मुलाकात कैसे हुई? जवाब: जब मैं और जतिन ‘यारा दिलदारा’ फिल्म पर काम कर रहे थे, तब हम सोच रहे थे कि किस गीतकार के साथ काम किया जाए। हमारी दीदी सुलक्षणा पंडित ने मजरूह साहब के साथ काम किया था। उन्होंने ही सुझाव दिया कि तुम लोग मजरूह साहब के साथ काम करो। उस समय वह काम नहीं कर रहे थे। इसके बाद हम मजरूह साहब से मिलने उनके घर गए। रिजवी कॉलेज के पास उनका घर था। वहीं हमारी पहली मुलाकात हुई और उसके बाद एक अच्छा सिलसिला शुरू हुआ। सवाल: पहली मुलाकात में मजरूह साहब का क्या रिएक्शन था? जवाब: मजरूह साहब उस समय इंडस्ट्री से थोड़े नाराज थे, क्योंकि काफी समय से लोग उनके साथ काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने हमसे कहा, ‘तुम क्यों आ गए हो? मैं तो काम नहीं करता। तुम मेरे पास क्यों आ गए?’ हमने कहा कि हम दोनों आपके साथ काम करना चाहते हैं और अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने हमसे बात की। जब उन्हें पता चला कि हम सुलक्षणा से जुड़े हैं और हमारे परिवार का संगीत से रिश्ता है, तो वह समझ गए कि हम संगीत से जुड़े परिवार के लड़के हैं। इसके बाद उन्होंने प्यार से कहा कि वह हमारे साथ जरूर काम करेंगे। सवाल: इसके बाद जब आपके गाने सफल हुए तो मजरूह साहब के साथ आपकी बॉन्डिंग कैसी हो गई? जवाब: जब कोई काम सफल होता है तो अपने आप एक बॉन्डिंग बन जाती है। एक-दूसरे पर विश्वास बढ़ता है। मजरूह साहब ने हमारे साथ काम शुरू किया तो उनके कई शानदार गाने आए। उन्हें नॉमिनेशन मिले और अवॉर्ड भी मिले। इसके बाद इंडस्ट्री में दूसरे लोग भी उनके साथ काम करना चाहते थे। वह दौर उन्होंने भी देखा। वह हमसे बहुत खुश रहते थे, क्योंकि हमारा म्यूजिक उनके साथ बहुत अच्छा चल रहा था। काम में बहुत मेहनत होती थी, लेकिन उसके साथ बहुत मजा भी आता था। सवाल: मजरूह साहब के साथ गाने तैयार करने की प्रक्रिया कैसी होती थी? आप उन्हें सिचुएशन और धुन कैसे समझाते थे? जवाब: मजरूह साहब ने हमारे साथ जितने भी गाने लिखे, उनमें से ज्यादातर धुन पर लिखे गए थे। हम धुन बनाकर उन्हें देते थे और वह उस पर बोल लिखकर लाते थे। जो गाना अब रिलीज हो रहा है, उसकी धुन भी मैंने मजरूह साहब को दी थी। उन्होंने उसी पर बोल लिखे थे। यह उस समय की रिकॉर्डिंग है। इसमें आपको उस दौर का एनालॉग फील मिलेगा। इस गाने की खास बात यह है कि इसे उसी दौर में रिकॉर्ड किया गया था, जब हमने ‘कुछ कुछ होता है’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी बड़ी फिल्मों के गाने रिकॉर्ड किए थे। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि यह गीत उस समय लिखा गया था, जब मजरूह साहब हमारे बीच थे और उनके साथ बैठकर तैयार हुआ था। सवाल: क्या यह गाना किसी फिल्म के लिए रिकॉर्ड किया गया था? जवाब: नहीं, मैं और जतिन अपना एक प्राइवेट एल्बम करना चाहते थे। हमने मजरूह साहब से बात की थी और उन्होंने कहा था कि वह हमारे लिए जरूर लिखेंगे। यह उसी समय का लिखा हुआ गीत है। सवाल: इस गाने को किसने गाया है? जवाब: यह हमारा एल्बम था, इसलिए यह गाना मैंने खुद गाया है। जतिन के जो गाने थे, उन्हें जतिन ने गाया था। सवाल: मजरूह साहब को चुनने के पीछे उस समय आपकी क्या सोच थी? दूसरे कई गीतकार भी सक्रिय थे? जवाब: सच कहूं तो यह हमारा नसीब था और हमारी दीदी की अच्छी सलाह थी, जो बहुत काम आई। हम मजरूह साहब को क्या चुनते? उन्होंने हमें चुना, यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात थी। वह बहुत नॉलेजेबल इंसान थे। मैंने उनके जैसा इंसान फिर कभी नहीं देखा। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। उनके साथ बैठने में बहुत मजा आता था। वह हमें इस तरह ट्रीट नहीं करते थे कि हम नए म्यूजिक डायरेक्टर हैं। उनका व्यवहार बहुत सहज था। उनमें एक अलग तरह का ह्यूमर था। वह बहुत जिंदादिल इंसान थे और कलाकार तो बहुत बड़े थे ही। सवाल: क्या मजरूह साहब के घर पर महफिल जमती थी? वहीं गाने लिखे जाते थे? जवाब: नहीं, वह हमारे म्यूजिक रूम में आते थे। वहीं हमारे सारे म्यूजिशियन होते थे और गाने बनते थे। कभी-कभी वहीं करेक्शन भी करते थे, लेकिन ज्यादातर वह धुन घर लेकर जाते थे। हम उन्हें सिचुएशन और धुन समझाते थे। वह डायरेक्टर से भी बात करते थे कि गाने की सिचुएशन क्या है। इसके बाद घर जाकर गीत लिखते थे और फिर गाना लेकर आते थे। सवाल: धुन पर गीत लिखना और लिखे हुए गीत पर धुन बनाना, दोनों में क्या चुनौती होती है? जवाब: मजरूह साहब ने एक बार मुझसे कहा था कि वह उन लोगों में से थे, जिन्होंने धुन पर लिखने की शुरुआत की। पहले आमतौर पर शब्दों पर काम होता था और उसके बाद धुन बनाई जाती थी। हमारे लिए धुन पर गाना बनाना ज्यादा सुविधाजनक था, क्योंकि इससे कंपोजर को ज्यादा क्रिएटिव लिबर्टी मिलती है। वह गाने को अलग-अलग तरीके से आगे ले जा सकता है। अगर कोई माहिर गीतकार हो तो वह धुन पर भी अच्छा लिख सकता है। मजरूह साहब के लिए भी यह एक तरह की चुनौती होती थी कि धुन के हिसाब से शब्दों को कैसे खूबसूरती से बैठाया जाए। ‘खामोशी’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ के हमारे कई गाने ऐसे थे, जिनकी धुन पहले बनाई गई थी। ‘पहला नशा’ जैसे गाने के बोल पहले लिखे जाते और फिर उन पर धुन बनाने की कोशिश होती, तो जरूरी नहीं कि वही खूबसूरती आती। कंपोजर की भी एक उड़ान होती है कि वह धुन को कहां लेकर जाता है। हमारा सक्सेस रेशियो इसलिए अच्छा रहा, क्योंकि हमने ज्यादातर धुन पहले बनाई और फिर उस पर बड़े गीतकारों से लिखवाया। हालांकि कुछ गाने ऐसे भी हैं, जिन्हें मैंने पहले से लिखे हुए बोलों पर कंपोज किया। जैसे ‘लवरिया हो राजू बन गया जेंटलमैन’ का गाना ‘सीने में दिल है, दिल में है धड़कन’। वह भी अच्छा बना। लेकिन हर बार जरूरी नहीं है कि लिखे हुए बोल पर बनाई गई धुन उतनी ही अच्छी बने। सवाल: जब मजरूह साहब के गाने दोबारा लोगों के बीच आए और उन्हें काम मिलने लगा, तब उनका क्या रिएक्शन था? जवाब: वह कहते थे कि अब मैं इतना काम नहीं कर सकता और मुझे इतना काम करना भी नहीं है। वह कहते थे कि मुझे तुम लोग पसंद हो और मैं तुम्हारे साथ काम करूंगा। उनके ये शब्द मुझे आज भी याद हैं। सवाल: मजरूह साहब का अपना कोई पसंदीदा गीत उन्होंने आपको बताया था? जवाब: एक बार मैंने उनसे पूछा था कि आपको अपना लिखा कौन सा गाना पसंद है। मैं उनसे बहुत सवाल करता था, क्योंकि जानना चाहता था कि उन्हें अपना कौन सा काम पसंद है। उन्होंने दो गानों का जिक्र किया था। उनमें से एक था, ‘वाह वादियों में मेरा दामन, रास्ते मेरी बाहें...’। उन्हें यह गाना बहुत पसंद था। मुझे याद है, जब उन्होंने ‘रास्ते मेरी बाहें’ कहा था तो उन्होंने अपने दोनों हाथ फैला दिए थे। उनका अंदाज ही बहुत खूबसूरत था। एक और गाना था, ‘तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है’। इस गाने से जुड़ा सुंदर किस्सा वह सुनाया करते थे। उन्होंने जिस तरह से बताया था, वह सुनने लायक था। सवाल: गाने के म्यूजिक वीडियो में कौन-कौन से आर्टिस्ट नजर आएंगे? जवाब: यह अभी सरप्राइज है। मैं यूरोप गया था और वहीं इस गाने का वीडियो शूट किया है। बाकी चीजें आप वीडियो देखकर जानेंगे। सवाल: मजरूह साहब के जन्मदिन को लेकर कोई और खास किस्सा साझा करना चाहेंगे? जवाब: फिलहाल इतना ही करते हैं, क्योंकि अभी हम इसी गाने को प्रमोट कर रहे हैं। मजरूह साहब के साथ बहुत सारी यादें हैं। उनके बारे में फिर कभी विस्तार से बात करेंगे। अभी मेरा फोकस इसी गाने पर है।

Continue reading on the app

  Sports

Asian Games Cricket 2026: भारत-पाक- श्रीलंका- बांग्लादेश… सेमीफाइनल की लाइन अप तय, बारिश से धुला मैच तो कौन खेलेगा फाइनल?

एशियन गेम्स 2026 में मेंस क्रिकेट के सेमीफाइनल की लाइन अप तय हो गई है. टूर्नामेंट के दोनों सेमीफाइनल 1 अक्टूबर को होने हैं. Tue, 29 Sep 2026 10:43:00 +0530

  Videos
See all

Maharashtra: Angarki Sankashti पर Ganpati मंदिर में भक्तों की भारी भीड़, देखें Visuals #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-29T05:02:25+00:00

Bihar Flood Update: नेपाल में बारिश बिहार में भीषण बाढ़! | Gandak | Koshi | Nepal Flood | CM Samrat #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-29T05:00:15+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers