ICC टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड जिस दबाव में है, उसी के बीच एक बार फिर “हम शाकिब को टीम में चाहते हैं” वाला बयान सामने आया। बता दें कि शनिवार को शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम में करीब आठ घंटे चली बोर्ड बैठक के बाद 40 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
इसी दौरान अचानक शाकिब अल हसन के नाम को आगे बढ़ाया गया, लेकिन इस पर कोई साफ रोडमैप या ठोस जानकारी नहीं दी गई। पत्रकारों के सवालों के बीच बीसीबी मीडिया कमेटी चेयरमैन अमजद हुसैन की प्रतिक्रिया भी स्थिति को और उलझाती दिखी।
गौरतलब है कि ICC ने आगामी टी20 वर्ल्ड कप के लिए बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल करने का फैसला लिया है। इसके बाद से ही बोर्ड की बैठक पर सभी की नजरें थीं। ऐसे में शाकिब का नाम सामने आना कई लोगों को एक सोची-समझी रणनीति लगा, ताकि वर्ल्ड कप से बाहर होने की नाकामी चर्चा से हट जाए।
यह पहला मौका नहीं हैं। पूर्व बीसीबी अध्यक्ष नजमुल हुसैन भी अक्सर सार्वजनिक मंचों पर शाकिब को लेकर बयान देते रहे हैं। अंदरूनी तौर पर खिलाड़ी जानते थे कि ये टिप्पणियां मीडिया को शांत करने के लिए होती हैं। एक सीनियर क्रिकेटर के मुताबिक, शाकिब इस खेल को समझते थे और इसी कारण उन्होंने अपने करियर में कई बार इन हालातों को संभाल लिया।
नजमुल के बाद अध्यक्ष बने फारूक अहमद ने भी कई बार शाकिब की वापसी की इच्छा जताई थी, लेकिन हर बार यह साफ किया गया कि अंतिम फैसला सरकार के हाथ में है। शाकिब की राजनीतिक पहचान और अपदस्थ अवामी लीग से जुड़ाव के कारण उन्हें राष्ट्रीय टीम से दूर रखा गया। फिर भी ऐसे बयान सुर्खियां बटोरने में सफल रहे हैं।
खुद शाकिब भी बोर्ड की नीयत को लेकर आशंकित रहे हैं। पहले दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यह तय करना मुश्किल है कि बोर्ड वाकई उन्हें वापस चाहता है या सिर्फ उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा हैं।
शनिवार को अमजद हुसैन ने दावा किया कि बोर्ड शाकिब की वापसी को लेकर गंभीर है। उनके मुताबिक, 27 कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ियों की चर्चा के दौरान एक निदेशक ने शाकिब का नाम रखा और बताया कि खिलाड़ी खुद भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि फिटनेस, चयन और कानूनी पहलुओं को लेकर गेंद अब भी सरकार के पाले में बताई गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बोर्ड ने सरकार से कोई औपचारिक अनुमति ली है या नहीं। इस पर भी स्थिति साफ नहीं हो सकी। बोर्ड अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के सरकार से बात करने की बात जरूर कही गई, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला हैं।
राजनीतिक माहौल भी इस चर्चा से जुड़ा हुआ हैं। फरवरी में आम चुनाव होने हैं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के मजबूत दावेदार के रूप में उभरने से अटकलें तेज हैं कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में शाकिब की वापसी का रास्ता खुल सकता हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ तो बोर्ड यह कहने में पीछे नहीं रहेगा कि कोशिशें पहले से चल रही थी।
फिलहाल, बीसीबी ने ICC के फैसले के खिलाफ किसी भी कानूनी चुनौती से इनकार कर दिया है। वर्ल्ड कप का सपना टूट चुका है और अब बोर्ड एक बार फिर नई चर्चा खड़ी कर आलोचनाओं से ध्यान हटाने की कोशिश में नजर आ रहा है।
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