गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर दिखेगी भारत के कौशल से सशक्तीकरण की कहानी
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर अपनी भव्य झांकी कौशल से सशक्त: आत्मनिर्भर, भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण का प्रदर्शन करेगा। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह झांकी कौशल द्वारा संचालित, युवा शक्ति द्वारा निर्देशित और नवाचार से सक्षम होकर आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र के रूप में भारत के परिवर्तन की एक शक्तिशाली कहानी पेश करती है।
बयान में आगे कहा गया ति इस झांकी का नेतृत्व औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के अखिल भारतीय टॉपर्स कर रहे होंगे, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कौशल दीक्षांत समारोह 2025 में सम्मानित किया गया था। कौशल के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान को और मजबूत करते हुए मंत्रालय ने हाल ही में ताइपे में आयोजित वर्ल्डस्किल्स एशिया प्रतियोगिता 2025 में पदक और पदक और उत्कृष्टता पदक भी जीते हैं जो अंतर्राष्ट्रीय कौशल प्लेटफार्मों पर देश की बढ़ती उत्कृष्टता का प्रतीक है और उच्च-स्तरीय कौशल में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करता है।
मंत्रालय के मुताबिक, झांकी में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक प्रौद्योगिकीविदों के साथ सम्मानित किया गया, जो आत्मनिर्भरता को दर्शाता है,जहां विरासत कौशल और नए जमाने की क्षमताएं एक साथ प्रगति करती हैं।
झांकी के केंद्र में एक मानव मस्तिष्क दर्शाया गया है, जो एक ओर रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच तथा दूसरी ओर अर्जित विश्लेषणात्मक कौशल का प्रतीक है। इसके दोनों ओर आपस में जुड़े दो हाथ पीएम-सेतु के माध्यम से सुदृढ़ हुए सरकार–उद्योग साझेदारी को दर्शाते हैं-यह 1,000 सरकारी आईटीआई के आधुनिकीकरण की महत्वाकांक्षी योजना है। आईटीआई अग्निवीरों के प्रशिक्षण को भी सहायता प्रदान करते हैं, ताकि वे तकनीकी कौशल से युक्त, अनुशासित और सशक्त युवा बनकर राष्ट्रीय सेवा के साथ-साथ आगे सार्थक करियर बना सकें।
मंत्रालय ने बयान के अंत में कहा कि यह झांकी एक ऐसे राष्ट्र के एकीकृत दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है जहां कौशल, विकास को गति देता है, नवाचार अवसरों को सक्षम बनाता है और युवा शक्ति विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में अग्रिम मोर्चे पर खड़े हैं।
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भारत और ईयू एफटीए से बढ़ेंगे व्यापार के अवसर, ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर से अधिक पहुंचने का अनुमान
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 27 जनवरी को साइन हो सकता है। इसे दोनों पक्षों की ओर से मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है और इससे भारत ईयू के साथ ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 31 तक 51 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है ।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एफटीए पर बातचीत करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी, लेकिन दुनिया में बढ़ती व्यापारिक अनिश्चितता को देखते हुए दोनों देशों ने इसे तेजी से आगे बढ़ाया है।
एमके ग्लोबल द्वारा रविवार को जारी एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता ईयू के साथ भारत की व्यापारिक स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है।
इस समझौते से वित्त वर्ष 2031 तक यूरोपीय संघ के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर से अधिक बढ़ सकता है। इससे भारत के कुल निर्यात में ईयू संघ की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 के 17.3 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर लगभग 22-23 प्रतिशत हो सकती है, जिससे भारत की निर्यात वृद्धि को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, वर्तमान में ईयू के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 0.8 प्रतिशत है, फिर भी यह समझौता यूरोप के लिए भी तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
हाल के वर्षों में भारत के साथ यूरोप के व्यापार संतुलन में तेज बदलाव आया है। वित्त वर्ष 2019 में यूरोपीय संघ का भारत साथ ट्रेड सरप्लस 3 अरब डॉलर था, जो कि वित्त वर्ष 2025 में 15 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में बदल गया है।
यह समझौता चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के यूरोप के व्यापक प्रयासों में भी सहायक है।
इस एफटीए से भारत के अधिक श्रम उपयोग वाले कपड़ा और फुटवियर जैसी इंडस्ट्री के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल इंडस्ट्री को बड़ा बाजार मिल सकता है।
वित्त वर्ष 25 में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 136 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। इस दौरान यूरोपीय यूनियन से भारत ने 60.7 अरब डॉलर का आयात किया था, जबकि 75.9 अरब डॉलर का सामान यूरोप में निर्यात किया था।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यूरोपीय संघ को भारत से होने वाले निर्यात, जिनमें स्मार्टफोन, वस्त्र, जूते, टायर, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स, प्रोसेस्ड फ्यूल और हीरे शामिल हैं, मुख्य रूप से उन आयातों की जगह लेते हैं जो यूरोप पहले अन्य देशों से प्राप्त करता था।
इनमें से कई विनिर्माण गतिविधियां यूरोपीय कंपनियों द्वारा वर्षों पहले ही दूसरे देशों में स्थानांतरित कर दी गई थीं।
वहीं दूसरी ओर, यूरोपीय संघ से भारत को होने वाले निर्यात में उच्च श्रेणी की मशीनरी, विमान, प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटक, रसायन, उन्नत चिकित्सा उपकरण और मेटल स्क्रैप शामिल हैं।
ये उत्पाद भारतीय कारखानों, पुनर्चक्रण इकाइयों और लघु एवं मध्यम उद्यम समूहों को सहयोग प्रदान करते हैं, जिससे उत्पादकता और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है।
प्रस्तावित समझौते से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों पर शुल्क कम होने या समाप्त होने की उम्मीद है, साथ ही यूरोपीय कंपनियों को उच्च श्रेणी की कारों और शराब के लिए भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
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