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विश्वकर्मा पूजा: श्रम, कौशल और सृजन को नमन

भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्माण्ड के दिव्य वास्तुकार और वास्तु शास्त्र के जनक माना जाता है। उन्हें सृष्टि के प्रथम अभियंता तथा वास्तु सृजन का देवता भी कहा जाता है। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर पुराणों में एक कथा का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार, सृष्टि की रचना की शुरूआत में भगवान विष्णु क्षीरसागर में प्रकट हुए और उनके नाभि-कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। ब्रह्मा जी के पुत्र का नाम धर्म रखा गया। धर्म का विवाह संस्कार वस्तु नामक स्त्री से हुआ। धर्म और वस्तु के सात पुत्र हुए और सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया। वास्तु शिल्प शास्त्र में अत्यंत निपुण थे। वास्तु के ही पुत्र का नाम विश्वकर्मा था, जो अपने माता-पिता की ही भांति महान शिल्पकार हुए और इस सृष्टि में अनेकों प्रकार के अद्भुत निर्माण विश्वकर्मा द्वारा ही किए गए। शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा का जन्म माघ शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था, इसलिए इन्हें भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है। वैसे तो हमारे देश में प्रायः घर की सुख-शांति के लिए ही प्रत्येक पर्व-त्यौहार, पूजा-पाठ इत्यादि का आयोजन किया जाता है किन्तु एक पूजा ऐसी भी है, जो केवल पारिवारिक सुख-शांति के लिए नहीं बल्कि व्यापार में उन्नति के लिए की जाती है। प्रतिवर्ष 17 सितम्बर को ‘विश्वकर्मा पूजा’ एकमात्र ऐसी ही पूजा है, जो काम में बरकत के लिए की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है।

विभिन्न धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना ब्रह्मविद्या जानने वाली थी, जिनका विवाह अष्टम् वसु महर्षि प्रभास के साथ हुआ था, उन्हीं से सम्पूर्ण शिल्प विद्या के ज्ञाता प्रजापति विश्वकर्मा का जन्म हुआ। कुछ प्रचलित कथाओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का जन्म देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। वैसे हमारे धर्म शास्त्रों तथा ग्रंथों में विश्वकर्मा के पांच स्वरूपों व अवतारों का उल्लेख मिलता है। सृष्टि के रचयिता ‘विराट विश्वकर्मा’, महान शिल्प विज्ञान विधाता प्रभात पुत्र ‘धर्मवंशी विश्वकर्मा’, आदि विज्ञान विधाता वसु पुत्र ‘अंगिरावंशी विश्वकर्मा’, महान शिल्पाचार्य विज्ञान जन्मदाता ऋषि अथवी के पुत्र ‘सुधन्वा विश्वकर्मा’ तथा उत्कृष्ट शिल्प विज्ञानाचार्य शुक्राचार्य के पौत्र ‘भृंगुवंशी विश्वकर्मा’। धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि दधीचि द्वारा दी गई उनकी हड्डियों से ही विश्वकर्मा ने वज्र का निर्माण किया था, जो देवताओं के राजा इन्द्र का प्रमुख हथियार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि एक बार असुरों से परेशान देवताओं की गुहार पर विश्वकर्मा ने महर्षि दधीचि की हड्डियों से देवताओं के राजा इन्द्र के लिए वज्र बनाया था, जो इतना प्रभावशाली था कि उससे असुरों का सर्वनाश हो गया।

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देवताओं का स्वर्ग हो या रावण की सोने की लंका अथवा भगवान श्रीकृष्ण की द्वारिका या पाण्डवों की राजधानी हस्तिनापुर, इन सभी का निर्माण भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही किया गया था, जो वास्तुकला की अद्भुत मिसाल हैं। वास्तुशास्त्र के जनक विश्वकर्मा ने अपने वास्तु ज्ञान से यमपुरी, वरूणपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी, पुष्पक विमान, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल, यमराज का कालदंड, दानवीर कर्ण के कुंडल इत्यादि का भी निर्माण किया। देवताओं के लिए उन्होंने अनेक भव्य महलों, आलीशान भवनों, हथियारों तथा सिंहासनों का निर्माण किया। इसीलिए उन्हें ‘देवताओं के शिल्पी’ के रूप में भी विशिष्ट स्थान प्राप्त है। चार युगों में उन्होंने कई नगरों और भवनों का निर्माण किया। रावण के अंत के बाद जिस पुष्पक विमान में बैठकर राम, लक्ष्मण, सीता और अन्य साथी अयोध्या लौटे थे, वह भी विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित किया गया था। सबसे पहले सत्ययुग में उन्होंने स्वर्गलोक का निर्माण किया, त्रेता युग में लंका का, द्वापर युग में द्वारिका का और कलियुग के आरंभ के 50 वर्ष पूर्व हस्तिनापुर तथा इन्द्रप्रस्थ का निर्माण किया। उन्होंने ही जगन्नाथ पुरी के जगन्नाथ मन्दिर में स्थित कृष्ण, सुभद्रा और बलराम की विशाल मूर्तियों का निर्माण किया।

प्रतिवर्ष 17 सितम्बर को ही विश्वकर्मा जयंती मनाए जाने का भी महत्व है। यह जयंती वर्षा ऋतु के अंत तथा शरद ऋतु के आरंभ में मनाए जाने की परम्परा रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार मकर संक्रांति प्रतिवर्ष प्रायः 14 जनवरी को पड़ती है, उसी प्रकार कन्या संक्रांति 17 सितम्बर को पड़ती है। इसी दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं और इसीलिए विश्वकर्मा जयंती 17 सितम्बर को ही मनाई जाती है। विश्वकर्मा जयंती और विश्वकर्मा पूजा की महत्ता को सिद्ध करने के लिए एक कथा भी प्रचलित है। कथानुसार, धार्मिक प्रवृत्ति का एक रथकार अपनी पत्नी सहित काशी में रहता है, जो अपने कार्य में बेहद निपुण था लेकिन स्थान-स्थान पर घूमने और कड़ा प्रयत्न करने के बाद भी उसे इतना ही धन प्राप्त हो जाता था कि बामुश्किल उसके परिवार के लिए भोजन का प्रबंध हो पाता था। उनकी कोई संतान नहीं थी, इसको लेकर भी पति-पत्नी चिंतित रहते थे और साधु-संतों की शरण में जाते रहते थे। एक दिन एक पड़ोसी ने उन्हें सलाह दी कि तुम भगवान विश्वकर्मा की शरण में जाओ, वही तुम्हारा बेड़ा पार करेंगे। उसके बाद पति-पत्नी ने भगवान विश्वकर्मा की सच्चे मन से पूजा-आराधना की, जिससे और उन्हें पुत्र-रत्न और धन-धान्य की प्राप्ति हुई और वे सुख से जीवन व्यतीत करने लगे। कहा जाता है कि उसी के बाद से विश्वकर्मा पूजा धूमघाम से की जाने लगी।

विश्वकर्मा पूजा के दिन सभी प्रकार की मशीनों, जैसे औजार, गाड़ी, कम्प्यूटर अथवा प्रत्येक ऐसी वस्तु, जो आपके कार्य को पूरा करने में इस्तेमाल होती है, की पूजा की जाती है। तकनीकी जगत के भगवान विश्वकर्मा को सनातन धर्म में निर्माण एवं सृजन का देवता माना जाता है, जिन्हें दुनिया के पहले वास्तुकार और आधुनिक युग के इंजीनियर की उपाधि दी गई है। पुराणों में बताया गया है कि आदि देव ब्रह्मा इस सृष्टि के रचयिता हैं और उन्होंने विश्वकर्मा की सहायता से ही इस सृष्टि का निर्माण किया था। इसी वजह से विश्वकर्मा को दुनिया के पहले वास्तुकार एवं इंजीनियर की उपाधि दी गई। उन्हें औजारों का देवता और धातुओं का रचयिता भी कहा जाता है। वास्तु शास्त्र में महारत हासिल होने के कारण ही विश्वकर्मा को वास्तुशास्त्र का जनक कहा गया। यही कारण है कि वास्तुकार कई युगों से भगवान विश्वकर्मा को अपना गुरू मानते हुए उनकी पूजा करते आ रहे हैं।

- योगेश कुमार गोयल
(लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)

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Fact Check: आंसू गैस का गोला वापस फेंकते प्रदर्शनकारी का यह वीडियो नेपाल का है, ‘संसद मार्च’ का नहीं

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के 20 जुलाई 2026 के ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे थे। इससे जोड़कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक प्रदर्शनकारी को सुरक्षाबल द्वारा दागे […]

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  Sports

Kuldeep Yadav 200 ODI Wickets से 2 कदम दूर, गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ मौका

भारत के स्टार स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव के पास वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में एक खास उपलब्धि हासिल करने का मौका है। वह वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे करने से सिर्फ 2 विकेट दूर हैं। अगर गुवाहाटी में कुलदीप यह मुकाम हासिल कर लेते हैं, तो वह भारत के उन चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने 50 ओवर के प्रारूप में 200 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं।

बता दें कि कुलदीप ने पहले वनडे में तिरुवनंतपुरम में शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट हासिल किए थे। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। अब दूसरे वनडे से पहले उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा हुआ है और टीम को उनसे एक बार फिर अहम योगदान की उम्मीद है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कुलदीप ने अब तक 122 वनडे मैचों में 198 विकेट लिए हैं। इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 26.70 रहा है। उनके नाम 10 बार 4 विकेट और 2 बार 5 विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज है। वनडे में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट रहा है।

200 विकेट पूरे करने के बाद कुलदीप भारत के 9वें ऐसे गेंदबाज बन जाएंगे, जिन्होंने वनडे में यह आंकड़ा पार किया है। भारत के लिए इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड अनिल कुंबले के नाम है। कुंबले ने 269 वनडे मैचों में 334 विकेट लिए हैं।

भारतीय स्पिन गेंदबाजों की बात करें तो कुलदीप से पहले सिर्फ 3 गेंदबाज 200 विकेट का आंकड़ा पार कर सके हैं। अनिल कुंबले के 334 विकेट के अलावा हरभजन सिंह ने 265 और रवींद्र जडेजा ने 232 विकेट लिए हैं। ऐसे में कुलदीप के पास इस खास सूची में अपना नाम दर्ज कराने का मौका है।

हालांकि, इस साल कुलदीप का प्रदर्शन लगातार एक जैसा नहीं रहा है। उन्होंने 2026 में अब तक 5 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें उन्हें 7 विकेट मिले हैं। इस दौरान उनका औसत 37.71 और रन खर्च करने की दर 5.86 रही है। ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले मैच की 4 विकेट वाली गेंदबाजी उनके लिए अहम वापसी के तौर पर देखी जा रही है।

गौरतलब है कि दूसरे वनडे में भारत की टीम की कमान शुभमन गिल संभाल रहे हैं। टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल, रवींद्र जडेजा, नितीश कुमार रेड्डी और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। वेस्टइंडीज की टीम में जॉन कैंपबेल, कीसी कार्टी, शाई होप, रोस्टन चेज, गुडाकेश मोती, अल्जारी जोसेफ और जयडेन सील्स जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं।

कुलदीप के लिए गुवाहाटी का मुकाबला सिर्फ एक और वनडे नहीं होगा। 200 विकेट का आंकड़ा उनके करियर में एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि साबित हो सकता है और इसके लिए उन्हें सिर्फ 2 विकेट की जरूरत है।

Wed, 30 Sep 2026 22:31:00 +0530

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