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नशे के खिलाफ CBSE की नई पहल: छात्रों के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ टॉकाथॉन आयोजित; एक्सपर्ट्स ने दिए सवालों के जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ विषय पर विशेष टॉकाथॉन का आयोजन किया। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को आयोजित इस 45 मिनट के संवादात्मक कार्यक्रम में विशेषज्ञों, शिक्षकों और छात्रों ने हिस्सा लिया।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों के साथ सीधे संवाद स्थापित करना और उन्हें नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में युवाओं को स्वस्थ और जिम्मेदार विकल्प चुनने के महत्व के बारे में बताया गया।

सोशल मीडिया के जरिए छात्रों से किया संवाद
CBSE ने इस टॉकाथॉन के जरिए छात्रों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, Instagram और YouTube पर विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने का अवसर दिया। बोर्ड ने छात्रों से #NashaMuktYuva और #CBSETalkathon हैशटैग के साथ अपने सवाल साझा करने के लिए आमंत्रित किया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए आज के बच्चों और युवाओं को मजबूत आधार देना जरूरी है। ऐसे में उन्हें स्वस्थ आदतों और जिम्मेदार फैसलों के प्रति जागरूक करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

AIIMS और NCB के विशेषज्ञों ने दिए छात्रों के सवालों के जवाब
टॉकाथॉन में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल शामिल हुआ। इसमें AIIMS नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. नंद कुमार, नोएडा के मयूर स्कूल की प्रिंसिपल अलका अवस्थी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), नई दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक अनीस सी. शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर लाइव आए छात्रों के सवालों को सुना और उनके जवाब दिए। चर्चा के दौरान छात्रों की जिज्ञासाओं और चिंताओं को प्रमुखता से शामिल किया गया।

मानसिक स्वास्थ्य, पीयर प्रेशर और नशे की लत पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं, दोस्तों के दबाव यानी पीयर प्रेशर से निपटने और नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए जरूरी कदमों पर सवाल पूछे।

विशेषज्ञों ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना और उनके सवालों पर चर्चा की। इस संवाद के माध्यम से युवाओं को नशे से जुड़े मुद्दों को समझने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के महत्व से अवगत कराने का प्रयास किया गया।

CBSE की यह पहल छात्रों के बीच नशे की रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाने और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत करने का अवसर देने की दिशा में आयोजित की गई।

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नेपाल पीएम बालेन शाह ने UN में भारत की दिल खोलकर की तारीफ, हिमालय को लेकर रखा ये प्रस्ताव

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु संकट को लेकर क्षेत्रीय सहयोग का प्रस्ताव रखा। शाह ने नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में एक साझा हिमालयी जलवायु तंत्र स्थापित करने की बात कही। इसका मकसद जलवायु से जुड़ी सूचनाओं और विशेषज्ञता को साझा करना, खतरनाक ग्लेशियल झीलों पर नजर रखना और आपदाओं से पहले चेतावनी देने की व्यवस्था को मजबूत करना है।

शाह ने प्रस्तावित तंत्र के तहत सैटेलाइट से मिलने वाले आंकड़ों और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करने की बात कही। इसके अलावा खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी और संयुक्त प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने का सुझाव दिया।

नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा आती है, तो सीमाओं के पार राहत और बचाव के प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। उनके मुताबिक हिमालय को ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए, जहां अलग-अलग देशों के बीच सूचनाओं के बिखराव के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिले।

'भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा दुनिया के लिए चेतावनी'
बालेंद्र शाह ने अपने संबोधन में नेपाल में आई भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे केवल स्थानीय त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी बताया। शाह ने सवाल उठाया कि क्या दुनिया ने इस चेतावनी को गंभीरता से सुना है।

उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए जलवायु आपदा सिर्फ मानवीय संकट नहीं है, बल्कि यह देश के विकास के सामने भी एक आपात स्थिति पैदा करती है।

भारत और चीन की मदद का जताया आभार
नेपाल के प्रधानमंत्री ने बाढ़ के बाद सहायता के लिए भारत और चीन समेत विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों ने तेजी से और उदार सहायता उपलब्ध कराई।

शाह ने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, मानवीय सहायता एजेंसियों, परोपकारी संगठनों और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से मदद के लिए आगे आए लोगों के प्रति भी नेपाल की ओर से धन्यवाद व्यक्त किया।

जलवायु जिम्मेदारी पर भी उठाया सवाल
बालेंद्र शाह ने उन देशों से अधिक जिम्मेदारी लेने की अपील की, जो ऐतिहासिक रूप से जलवायु परिवर्तन के लिए अधिक जिम्मेदार रहे हैं और जिनके पास इससे निपटने के लिए अधिक संसाधन और क्षमता है।

उनके संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पहले से निगरानी, डेटा साझा करने, शुरुआती चेतावनी और सीमा-पार समन्वय की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

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  Sports

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