यूएस की नई रक्षा रणनीति : शक्ति के माध्यम से 'शांति' की तलाश में अमेरिका
वाशिंगटन, 25 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका का कहना है कि वह अपने संभावित विरोधियों के साथ एक सम्मानजनक और टिकाऊ शांति चाहता है। यह शांति टकराव या लगातार युद्ध से नहीं, बल्कि मजबूत सैन्य शक्ति और व्यवहारिक सोच के जरिए हासिल की जानी चाहिए। यह बात वर्ष 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में कही गई है।
इस रणनीति के अनुसार, अमेरिकी सेना की ताकत का उद्देश्य शांति स्थापित करना है, ताकि अमेरिका के लोगों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि बनी रहे। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर दूसरे देश अपनी मांगें उचित और सीमित रखें, तो उनके हितों का भी सम्मान किया जा सकता है। यह सोच उन पुरानी नीतियों से अलग बताई गई है, जिनमें लंबे युद्ध, सत्ता परिवर्तन और विदेशी धरती पर वैचारिक अभियान शामिल थे।
दस्तावेज में साफ कहा गया है कि अमेरिका का मकसद आक्रमण या अंतहीन युद्ध नहीं है, बल्कि शांति है। लेकिन यह भी ज़ोर दिया गया है कि शांति के नाम पर अपने नागरिकों की सुरक्षा, आजादी और समृद्धि से समझौता नहीं किया जाएगा।
रणनीति में शीत युद्ध के बाद की कुछ पुरानी नीतियों की आलोचना की गई है। कहा गया है कि वे नीतियाँ अमेरिका के वास्तविक हितों से जुड़ी नहीं थीं। उनकी जगह अब एक लचीली और व्यावहारिक नीति अपनाई गई है, जिसमें खतरों को उनकी गंभीरता और अमेरिका पर पड़ने वाले सीधे असर के आधार पर परखा जाएगा।
दस्तावेज़ इस बात पर ज़ोर देता है कि यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया की सभी समस्याओं को हल करने की कोशिश नहीं करता है, न ही वह विदेशों में खतरों को अमेरिकी मातृभूमि के लिए खतरों के बराबर मानता है। अमेरिका जबरदस्ती अपने जीवन-शैली या व्यवस्था को दूसरे देशों पर थोपने के विचार को भी खारिज करता है। सेना का ध्यान केवल उन्हीं जिम्मेदारियों पर रहेगा जो सीधे तौर पर अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि से जुड़ी हों।
साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि केवल संयम और इच्छा से शांति नहीं मिलती। शांति की कामना करना और उसे हासिल करना, दोनों अलग बातें हैं। अगर शांति के प्रयास ठुकरा दिए जाते हैं, तो अमेरिकी सेना देश के युद्ध लड़ने और जीतने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी, और वह भी ऐसे तरीके से जो अमेरिकी हितों के अनुकूल हों।
रणनीति में कहा गया है कि कूटनीति को प्रभावी बनाने के लिए सैन्य शक्ति ज़रूरी है। सेना को इस स्थिति में होना चाहिए कि वह विरोधियों को रोकने में सक्षम हो और जरूरत पड़ने पर अमेरिका के हितों के खिलाफ सबसे बड़े खतरों को परास्त कर सके। यदि सेना सबसे मजबूत बनी रहती है, तो राष्ट्रपति के पास ज़रूरत के समय निर्णायक कार्रवाई करने की पूरी आजादी रहती है।
दस्तावेज के अनुसार, शक्ति के माध्यम से शांति कायम की जा सकती है। जब संभावित विरोधी अमेरिका की सैन्य क्षमता और दृढ़ निश्चय को साफ देखते हैं, तो वे उसके हितों को चुनौती देने से पहले कई बार सोचते हैं। इसी तरह अमेरिका अपने देश के भीतर और बाहर स्थायी शांति की स्थिति बनाना चाहता है।
यह भी साफ किया गया है कि यह नीति न तो पीछे हटने की है और न ही दुनिया से अलग-थलग रहने की। इसे अलगाव की नीति नहीं बताया गया है। इसके बजाय, विदेशों में सीमित और सोच-समझकर जुड़ाव रखने की बात कही गई है, जिसमें प्राथमिकताएं स्पष्ट हों और उपलब्ध संसाधनों का ईमानदारी से आकलन किया जाए।
इस पूरी रणनीति के केंद्र में यह विचार है कि अमेरिकी हित सबसे पहले आते हैं। इसमें कहा गया है कि खतरों को लेकर आंखें बंद नहीं की जा सकतीं। साथ ही सहयोगी देशों और साझेदारों से भी साफ तौर पर कहा गया है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए खुद ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी। यह अमेरिका को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि उनके अपने हित में है।
--आईएएनएस
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Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज क्या हुआ बदलाव? जानें आपके शहर में क्या है तेल के रेट
Petrol Diesel Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज यानी रविवार (25 जनवरी, 2026) को जबरदस्त उछाल देखने को मिला. इसके बाद देश के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बदल गईं. रविवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में 1.71 डॉलर यानी 2.88 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया. डिसके बाद ये बढ़कर 61.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. जबकि ब्रेंट क्रूड का भाव 1.82 डॉलर यानी 2.84 फीसदी तेजी के साथ 65.88 डॉलर प्रति बैरल हो गया.
रोजाना तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
बता दें कि देश के तेल विपरण कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतें जारी करती है. तेल के दाम वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में समीक्षा और डॉलर, रुपये की विनमय दरों के हिसाब से तय होते हैं. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों के साथ डीलर कमीशन भी शामिल होता हैं.
देश के चार प्रमुख महानगरों में तेल का भाव
| शहर | पेट्रोल (₹ प्रति लीटर) | डीज़ल (₹ प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| मुंबई | 103.50 | 90.03 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| चेन्नई | 100.84 | 92.39 |
अन्य शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीज़ल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| नोएडा | 94.90 | 88.01 |
| गुरुग्राम | 95.65 | 88.10 |
| बेंगलुरू | 102.92 | 90.99 |
| भुवनेश्वर | 101.19 | 92.76 |
| चंडीगढ़ | 94.30 | 82.45 |
| हैदराबाद | 107.50 | 95.70 |
| जयपुर | 104.72 | 90.21 |
| लखनऊ | 94.69 | 87.81 |
| पटना | 105.23 | 91.49 |
| तिरुवनंतपुरम | 107.48 | 96.48 |
| मेरठ | 94.47 | 87.54 |
| देहरादून | 93.43 | 88.33 |
| बरेली | 95.11 | 88.28 |
| अहमदाबाद | 94.49 | 90.16 |
| पुणे | 104.19 | 90.71 |
| नासिक | 104.34 | 90.86 |
| पुडुचेरी | 96.32 | 86.53 |
| गंगटोक | 103.35 | 90.45 |
| गुवाहाटी | 98.35 | 87.57 |
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