दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदला:अब 'नौरू' नहीं 'नाओएरो' कहलाएगा; UN रिकॉर्ड्स में आज से नया नाम लागू
प्रशांत महासागर में बसे दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश नौरू ने ऐसा ही एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब यह देश आधिकारिक तौर पर 'रिपब्लिक ऑफ नाओएरो' कहलाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी अपने रिकॉर्ड में नया नाम लागू कर दिया है। करीब 12 हजार आबादी वाले इस द्वीपीय देश का कहना है कि 'नाओएरो' उसका असली नाम है, जबकि 'नौरू' विदेशी लोगों की सुविधा के लिए प्रचलन में आया था। अब सरकार का मानना है कि समय आ गया है कि देश दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। नाम बदलने का यह फैसला सिर्फ औपचारिकता नहीं है। सरकार इसे अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को सम्मान देने की पहल मान रही है। इसी सोच के तहत देश ने दशकों पुराना नाम छोड़कर अपनी पारंपरिक पहचान को आधिकारिक रूप से वापस अपना लिया है। आखिर नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? नाओएरो का कहना है कि 'नौरू' उसकी पसंद नहीं, बल्कि विदेशियों की सुविधा का नाम था। असली नाम हमेशा 'नाओएरो' ही रहा, लेकिन इसका उच्चारण आसान नहीं होने की वजह से दुनिया ने धीरे-धीरे उसे 'नौरू' कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यही नाम आधिकारिक पहचान भी बन गया। राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने जनवरी में संसद में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि देश दुनिया के सामने उसी नाम से जाना जाए, जिसे उसके अपने लोग पीढ़ियों से बोलते आए हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ नाम बदलने का फैसला नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को उसकी वास्तविक पहचान लौटाने की कोशिश है। संसद ने दो चरणों में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने पहले इस पर जनमत संग्रह कराने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में फैसला बदला गया। सरकार का तर्क था कि 'नाओएरो' कोई नया नाम नहीं है। यह पहले से ही संविधान, राष्ट्रीय प्रतीक और स्थानीय भाषा का हिस्सा है। इसलिए इसे औपचारिक रूप से अपनाना लोगों की इच्छा के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी पुरानी पहचान को सम्मान देने वाला कदम है। फॉस्फेट बेचकर अमीर बना देश, अब गंभीर आर्थिक संकट में नाओएरो का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। यह छोटा-सा द्वीप कभी जर्मनी का उपनिवेश था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद इसका प्रशासन ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के संयुक्त नियंत्रण में चला गया। आखिरकार 31 जनवरी 1968 को इसे आजादी मिली और यह एक स्वतंत्र गणराज्य बना। 1970 के दशक में यहां फॉस्फेट के विशाल भंडार की वजह से देश की किस्मत बदल गई। फॉस्फेट के निर्यात से सरकार को इतनी आमदनी होने लगी कि नाओएरो दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाने लगा। लेकिन यह दौर ज्यादा समय तक नहीं चला। कुछ ही वर्षों में खनन घटने लगा, आय का मुख्य स्रोत खत्म हो गया और देश गंभीर आर्थिक संकट में पहुंच गया। अब जलवायु परिवर्तन से अस्तित्व पर खतरा आर्थिक चुनौतियों के बीच अब नाओएरो के सामने सबसे बड़ा संकट जलवायु परिवर्तन है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर इस द्वीपीय देश के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। कई वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दशकों में देश के कई हिस्से रहने लायक नहीं बचेंगे। इसी खतरे से निपटने के लिए सरकार ने विदेशी नागरिकों को निवेश के बदले नागरिकता देने की योजना शुरू की है। इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल लोगों और जरूरी बुनियादी ढांचे को सुरक्षित ऊंचे इलाकों में बसाने और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर किया जाएगा। चार साल पहले तुर्किये ने भी नाम बदला था नाओएरो का फैसला दुनिया में बढ़ रहे उस चलन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें देश अपनी स्थानीय भाषा और ऐतिहासिक पहचान को फिर से प्रमुखता दे रहे हैं। इससे पहले 2018 में अफ्रीकी देश स्वाजीलैंड ने अपना नाम बदलकर इस्वातिनी कर लिया था। वहीं 2022 में तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना आधिकारिक नाम तुर्किये करवा लिया था। नाओएरो का मानना है कि किसी देश की पहचान केवल उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, संस्कृति और इतिहास से भी तय होती है। इसी सोच के साथ उसने दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान को आधिकारिक रूप से वापस स्थापित करने का फैसला किया है।
आज सोने-चांदी के दाम में बढत:10 ग्राम सोना ₹1.43 लाख का बिक रहा, एक किलो चांदी ₹2.18 लाख पर पहुंची
सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 3 अगस्त को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 105 रुपए बढ़कर 2.17 लाख रुपए पर पहुंच गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 3 रुपए बढ़कर 1.43 लाख रुपए हो गया है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 12 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.18 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है।
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