भारत में बच्चा पैदा होने के बाद क्या है खाने की परंपरा? घर में बनती है ये खास डिश
भारत में बच्चे के जन्म के बाद मां की देखभाल से जुड़ी कई पारंपरिक खाने की चीजें बनाई जाती हैं. इनमें पंजिरी का नाम खास तौर पर उत्तर भारत के कई परिवारों में लिया जाता है. इसे नई मां के लिए तैयार किया जाता है और इसमें आटा, घी, चीनी, मेवे और गोंद जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है.
Bottle Gourd Kofta Curry: बघेलखंडी लौकी कोफ्ता, स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम, बनाने में भी आसान
Bottle Gourd Kofta Curry: बघेलखंड में लौकी के कोफ्ते एक स्वादिष्ट पकवान है, जिसे घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री से बनाया जा सकता है. इसे ग्रेवी, कढ़ी या नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है. बघेलखंड के घरों में लौकी की सब्जी तो अक्सर बनाई जाती है, लेकिन इसी साधारण सी लौकी से तैयार होने वाले कोफ्ते खाने की थाली का स्वाद बदल देते हैं. देसी मसालों की खुशबू, बेसन का स्वाद और हल्के कुरकुरे कोफ्ते इस व्यंजन को खास बना देते हैं. इन्हें रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसा जाता है. खास बात यह है कि लौकी के कोफ्ते बनाने के लिए किसी खास या महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. घर में आसानी से मिलने वाली लौकी, बेसन और रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों से यह स्वादिष्ट पकवान तैयार किया जा सकता है. कोफ्ते बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से नरम होते हैं, जिससे इनका स्वाद और भी बढ़ जाता है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने बताया कि बघेलखंडी रसोई की खासियत यही है कि यहां रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली साधारण सब्जियों को भी देसी तरीके और मसालों के साथ खास स्वाद दिया जाता है. लौकी का कोफ्ता भी इसी पारंपरिक खान-पान की एक अच्छी मिसाल है. यह स्वादिष्ट होने के साथ बनाने में भी आसान है.
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