छिपाने से भी नहीं छिपा सच! ईरान जंग में अधमरे हुए US सैनिक
ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव में अमेरिका के नुकसान को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वजह है पेंटगन के आंकड़ों में अचानक हुआ बड़ा बदलाव। अमेरिकी रक्षा विभाग के सार्वजनिक डाटाबेस में इस हफ्ते 37 और घायल अमेरिकी सैन्य कर्मियों को जोड़ा गया है। इनमें 29 नेवी के नाविक और आठ मरीन शामिल है। इसके साथ ही ईरानी संघर्ष में घायल अमेरिकी सैन्य कर्मियों की दर्ज संख्या बढ़कर अब 861 हो गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन 37 सैनिकों को चोट कब और कैसे लगी?
इसे भी पढ़ें: UP में Rajya Sabha चुनाव: BJP से Smriti Irani और Varun Gandhi के नाम पर चर्चा तेज
वाशिंगटन पोस्ट में पेंटागन के डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम यानी कि डीसीएस के आंकड़ों की समीक्षा के बाद यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक डाटाबेस में इन 37 लोगों की चोटों की तारीख या घटना विवरण नहीं दिया गया। नेवी के एक अधिकारी ने इतना जरूर बताया कि सभी 29 नाविक ड्यूटी पर वापस लौट चुके हैं। पेंटागन ने इन नए आंकड़ों पर तत्काल कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया। इसी बीच 14 सितंबर को स्टेट ऑफ होरमूस में हुए एक कथित ईरानी मिसाइल हमले की जानकारी भी सामने आई। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान की एक एंटीशिप क्रूज मिसाइल ने एक समुद्री जहाज को निशाना बनाया जिस पर अमेरिकी मरीन मौजूद थे। इस हमले में आठ मरीन घायल हुए। अधिकारियों के मुताबिक जवानों को धुआं अंदर जाने की समस्या हुई और कुछ ही सिर की चोट या ट्रामेटिक ब्रेन इंजरी जैसे लक्षणों की आशंका बताई गई। बाद में सभी ड्यूटी पर लौट आए। इस हमले की जानकारी सार्वजनिक होने में भी काफी समय लगा। यही देरी अब अमेरिकी सैन्य नुकसान की रिपोर्टिंग पर चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। पेंटगन पहले ही कह चुका है कि कैजुअल्टी डाटाबेस में एंट्री तुरंत होना जरूरी नहीं है। खासकर कन्फ्यूजशन और ट्रोमेटिक ब्रेन इंजरी जैसे मामलों में लक्षण देर से सामने आ सकते हैं। इसलिए रिकॉर्ड बाद में अपडेट किया जा सकता है। यानी 37 नई एंट्री का मतलब यह जरूरी नहीं है कि सभी सैनिक हाल की किसी घटना में घायल हुए हो।
इसे भी पढ़ें: Hormuz जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर बोले Ayatollah Khamenei, दुश्मनों को भुगतना पड़ेगा भारी नुकसान
लेकिन सवाल इसलिए गंभीर है क्योंकि हाल के महीनों में अमेरिकी सैनिकों के घायल और मारे जाने के आंकड़ों को लेकर पेंटागन की सार्वजनिक जानकारी पर पहले भी सवाल उठे हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सैन्य मौतों की आधिकारिक गिनती में भी पहले विसंगतियां सामने आई थी। इस हफ्ते डाटाबेस में मौतों की संख्या 19 दर्ज हुई। जबकि इससे पहले कुछ मौतों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठे थे। तो क्या अमेरिका ईरान के साथ संघर्ष में हुए अपने नुकसान को छिपा रहा है? फिलहाल उपलब्ध जानकारी से सीधे तौर पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। इतना जरूर साफ है कि पेंटागन के आंकड़ों में देरी से अपडेट और कुछ मामलों में घटना का विवरण सार्वजनिक ना होने की वजह से सवाल बड़े और खड़े हो रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है पेंटगन ने जिन 37 सैनिकों को अचानक घायल सैनिकों की सूची में जोड़ा, वह आखिर कब और किन परिस्थितियों में घायल हुए?
Britain के RAF Fairford एयरबेस पर हमले की साजिश में 5 ब्रिटिश नागरिक गिरफ्तार
(अदिति खन्ना) लंदन, 28 सितंबर ब्रिटेन की आतंकवाद रोधी पुलिस (सीटीपी) ने सोमवार को कहा कि रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) अड्डे पर विस्फोटक से हमले की साजिश के मामले में आतंकवाद से जुड़े आरोपों को लेकर गिरफ्तार किये गए सभी पांच व्यक्ति 20 से 30 साल की उम्र के ब्रिटिश नागरिक हैं। दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में आरएएफ फेयरफोर्ड की ओर जा रही तीन संदिग्ध गाड़ियों को रविवार को अधिकारियों ने रोका, जिसके बाद सीटीपी इस मामले की जांच कर रही है। मामले में, ग्लूसेस्टरशायर के वेल्फोर्ड इलाके में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इन पर ब्रिटिश विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध करने और आतंकवाद रोधी अधिनियम की धारा 5 के तहत, आतंकी घटना को अंजाम देने की तैयारी करने का संदेह है। सीटीपी ने एक बयान में कहा, ‘‘लंदन में रहने वाले इन लोगों को पुलिस एवं अपराध साक्ष्य अधिनियम के तहत हिरासत में रखा गया है और उनकी हिरासत की अवधि बढ़ा दी गई है।’’ सीटीपी की वरिष्ठ राष्ट्रीय समन्वयक, उप सहायक आयुक्त विक्की इवांस ने कहा, ‘‘यह बहुत ही जटिल और बड़े पैमाने का अभियान है। इसमें स्थानीय और राष्ट्रीय पुलिस, रक्षा मंत्रालय और स्थानीय एजेंसियां शामिल हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस घटना के पीछे के कारणों के संबंध में लगाई जा रही अटकलों और उठ रहे भू-राजनीतिक सवालों से अच्छी तरह वाकिफ हूं।
हालांकि, मेरा आग्रह है कि इस समय सीटीपी को सावधानी और स्पष्टता से काम करने दिया जाए।’’ वेल्फोर्ड की एक स्थानीय महिला किसान ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि पेड़ों के पास ‘‘हुड और मास्क पहने हुए लोगों का एक बड़ा समूह’’ देखकर उन्होंने अधिकारियों को इसकी सूचना दी। उन्होंने बीबीसी को बताया, ‘‘मेरा मानना है कि मेरे 999 पर किये गए फोन ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।’’ ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने उनका शुक्रिया अदा किया लेकिन इस बात पर जोर दिया कि किसान को मामले की गंभीरता का शायद पूरा अंदाजा नहीं था। पश्चिम एशिया में जारी जंग के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका के हमले शुरू करने के लिए आरएएफ फेयरफोर्ड का इस्तेमाल किया गया है।
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि रविवार को आरएएफ फेयरफोर्ड के पास गिरफ्तार किये गए लोग ‘‘बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘वे हमारे (वायुसेना) ठिकाने को बड़ा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। मामले की जांच में ब्रिटिश अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना बहुत फायदेमंद रहा।’’ यह घटना जुलाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा आरएएफ फेयरफोर्ड पर हमला करने की धमकी देने और ‘‘ब्रिटिश शासन’’ के खिलाफ परोक्ष धमकियों के बाद हुई है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









