ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से नहीं हटेंगे पीछे, असम में हिरासत से छूटते ही गरजे आशुतोष रांका
आशुतोष रांका ने कहा, 'सीजेपी पूर्वोत्तर के सभी राज्यों तक पहुंचेगी और अब तक प्रतिक्रिया अच्छी रही है। पूर्वोत्तर हमारे लिए अहम है।' उन्होंने यह बात असम पुलिस की ओर से CJP के 40 से सदस्यों को हिरासत में रखने के एक दिन बाद कही।
सोलापुर में तुलशी गांव बेचने का बोर्ड लगा:जलसंकट के कारण 350 लड़कों की शादी नहीं हो रही; महाराष्ट्र की 265 तहसीलें सूखा घोषित
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलशी गांव में पानी की कमी से परेशान लोग गांव बेचने जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एक बोर्ड भी लगाया है। हालांकि गांव की कीमत सिर्फ पानी रखी गई है। बोर्ड में यह भी लिखा है कि आखिर अन्याय कब तक सहन करें। माढा तहसील के तुलशी गांव की आबादी करीब 7 हजार है। अधूरे सिंचाई प्रोजेक्ट के कारण गांव कई साल से पानी के टैंकरों पर निर्भर है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के पास से नहरें गुजरती हैं। इसके बावजूद उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। इस साल बारिश कम होने से संकट और बढ़ गया है। गांव के सरपंच ने यह भी दावा किया है कि जल संकट के कारण गांव के करीब 350 युवकों की शादी नहीं हो पा रही है। राज्य सरकार ने 26 सितंबर को राज्य की 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है। साथ ही राहत पैकेज की घोषणा भी की है। 26 साल से अधूरा खुदाई का काम तुलशी के सरपंच शरद मोरे ने कहा, “गांव में हर साल पानी की कमी रहती है। “गांव बिक्री के लिए, कीमत-पानी” का बोर्ड लगाकर सरकार का ध्यान समस्या की ओर खींचने की कोशिश की गई है। मोरे ने पहले बताया था कि सीना-माढा योजना के 7वें और 8वें आउटलेट के पास करीब 800 मीटर खुदाई का काम 26 साल से अधूरा है। यह काम पूरा होने पर तुलशी की पानी की समस्या हमेशा के लिए दूर हो सकती है। प्रदर्शन के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर 14 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने माढा तहसील कार्यालय के बाहर थाली-नाद यानी बर्तन बजाकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है। पानी मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। जल जीवन मिशन भी बेअसर, 14 कुएं-तालाब सूखे ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत काम कराया गया है। लेकिन स्थानीय जलस्रोत सूख जाने से यह योजना काम की नहीं रही। तुलशी में 14 तालाब और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें भरने से पीने और सिंचाई के पानी की कमी काफी कम हो सकती है। तुलशी के ज्यादातर लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं। पानी के संकट ने उनकी आजीविका पर बुरा असर डाला है। जल संकट का असर लोगों की निजी जिंदगी पर भी पड़ा है। गांव के करीब 350 युवकों की शादी नहीं हो पा रही है। मोरे ने दावा किया कि कोई भी परिवार उन्हें अपनी बेटियां देने को तैयार नहीं है।
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