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कामकाज का हिसाब देने की बजाय Statehood की मांग कर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे Omar Abdullah !

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आज पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित होते ही सियासत एक बार फिर तीखी टकराहट में बदल गई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश प्रस्ताव पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने जोरदार विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर पर भी नियमों को कमजोर कर प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार करने का आरोप लगाया और उन्हें उनके पद से हटाने का प्रस्ताव भी पेश किया।

साथ ही विवाद केवल पूर्ण राज्य के दर्जे तक सीमित नहीं रहा। प्रस्ताव पर कुल दस संशोधन लाए गए, जिनमें आठ संशोधन अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष संवैधानिक स्थिति को भी बहाल करने की दिशा में थे। प्रस्ताव में वर्ष 2000 और नवंबर 2024 में पारित विधानसभा प्रस्तावों का संदर्भ भी शामिल है। यही संदर्भ भाजपा के विरोध का बड़ा कारण बना। भाजपा का कहना है कि वह स्वयं जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में है, लेकिन प्रस्ताव की भाषा और उसमें पुराने विशेष दर्जे से जुड़े संदर्भों पर उसे आपत्ति है।

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यहीं उमर अब्दुल्ला सरकार की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर की जनता की दीर्घकालिक आकांक्षा हो सकती है, लेकिन क्या हर प्रशासनिक और राजनीतिक समस्या का समाधान केवल पूर्ण राज्य का दर्जा है? उमर अब्दुल्ला सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि शासन, विकास, रोजगार, भ्रष्टाचार, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक प्रदर्शन से जुड़े सवालों का जवाब वह किस आधार पर दे रही है। विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर देना आसान है, लेकिन जनता के सामने शासन के ठोस परिणाम रखना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2024 में उधमपुर की सभा में जम्मू-कश्मीर का राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था। प्रधानमंत्री ने 2019 में भी कहा था कि परिस्थितियां सामान्य होने, विकास और सुरक्षा मजबूत होने तथा आतंकवाद और अलगाववाद पर प्रभावी नियंत्रण के बाद केंद्रशासित व्यवस्था की आवश्यकता नहीं रहेगी। इसलिए यह कहना भी उचित नहीं होगा कि राज्य का दर्जा हमेशा के लिए टल गया है। प्रधानमंत्री का सार्वजनिक आश्वासन इस मुद्दे पर केंद्र की घोषित दिशा को स्पष्ट करता है।

देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर की संवेदनशील भौगोलिक और सुरक्षा परिस्थितियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार अब भी आतंकवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई, घुसपैठ रोकने और आतंकवादी ढांचे को खत्म करने को अपनी प्राथमिकता बता रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आतंकवादी घटनाओं में दीर्घकालिक गिरावट आई है, लेकिन आतंकवाद का खतरा पूरी तरह समाप्त होने की घोषणा अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूर्ण राज्य के दर्जे को राजनीतिक नारेबाजी का विषय बनाने की बजाय सुरक्षा, स्थिरता और प्रशासनिक परिस्थितियों से जोड़कर देखना होगा। उमर अब्दुल्ला सरकार को भी अपनी शासन संबंधी कमियों की जिम्मेदारी केवल केंद्रशासित प्रदेश की स्थिति पर डालने से बचना चाहिए। राज्य का दर्जा मिलेगा तो संवैधानिक वादा पूरा होगा, लेकिन उसके नाम पर हर विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ना जनता के सवालों से बचने का रास्ता नहीं बन सकता। जम्मू-कश्मीर के लोग नारे नहीं, स्थिरता, सुरक्षा, विकास और जवाबदेह शासन चाहते हैं।

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Fact Check: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दावे से 2024 का वीडियो वायरल

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) समेत कुछ अन्य मुद्दों पर मतभेदों की रिपोर्ट के बाद, कांग्रेस और वामपंथी दलों समेत कई संगठनों ने देशभर में प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों से जोड़कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल […]

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Yashvir Singh-Neeraj Chopra: जयपुर के 22 वर्षीय भाला फेंक एथलीट यशवीर सिंह के लिए ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा का एक फोन कॉल जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया. चोटिल होने के कारण एशियाई खेल 2026 से बाहर हुए नीरज ने यशवीर को टीम में अपनी जगह लेने के लिए प्रेरित किया. राष्ट्रमंडल खेलों में 85.41 मीटर के थ्रो से कांस्य पदक जीतने वाले यशवीर ने एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास कायम किया. Mon, 28 Sep 2026 20:04:14 +0530

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