चीन डब्ल्यूटीओ के सुधार में सक्रिय रूप से भाग लेगा: ली छंगकांग
बीजिंग, 24 जनवरी (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड के दावोस में 22 जनवरी को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एक लघु मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता स्विस संघीय राष्ट्रपति और आर्थिक मामलों, शिक्षा और अनुसंधान मंत्री गाय पार्मेलिन ने की।
चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया सहित लगभग 30 डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों के मंत्रियों या प्रतिनिधियों के साथ-साथ डब्ल्यूटीओ महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला ने भी बैठक में भाग लिया। चीनी वाणिज्य उप मंत्री और चीन के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वार्ता प्रतिनिधि ली छंगकांग ने भी बैठक में भाग लिया और भाषण दिया।
ली छंगकांग ने कहा कि डब्ल्यूटीओ के मूलभूत सिद्धांत और नियम वैश्विक व्यापार वृद्धि के लिए स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करते हैं और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के निरंतर विकास की नींव भी हैं। वर्तमान अस्थिर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार स्थिति में, डब्ल्यूटीओ का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। सदस्य देशों को व्यावहारिक सहयोग में संलग्न होना चाहिए, समय के साथ तालमेल बिठाने के लिए बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में सुधार को बढ़ावा देना चाहिए, डब्ल्यूटीओ की प्रभावशीलता और अधिकारिता को बनाए रखना चाहिए और वैश्विक आर्थिक प्रशासन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका का बेहतर लाभ उठाना चाहिए।
ली छंगकांग ने बताया कि चीन बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का एक प्रबल समर्थक और सक्रिय भागीदार है। चीन 14वें विश्व व्यापार संगठन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का समर्थन करता है, ताकि डब्ल्यूटीओ सुधार कार्य योजना तैयार करने, निवेश सुविधा समझौते को डब्ल्यूटीओ कानूनी ढांचे में शामिल करने, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन के लिए टैरिफ छूट के विस्तार और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चीन डब्ल्यूटीओ सुधार में सक्रिय भाग लेता रहेगा, और सुधार के परिणामों को सभी सदस्यों तक पहुंचाने में योगदान देता रहेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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ट्रंप का कनाडा को अल्टीमेटम, चीन के साथ ट्रेड डील हुई तो लगेगा 100 फीसदी टैरिफ
Terrif Row: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को लेकर एक बार फिर तीखा और आक्रामक रुख अपनाया है. चीन के साथ संभावित ट्रेड डील को लेकर ट्रंप ने खुली चेतावनी दी है कि अगर कनाडा ने बीजिंग से किसी भी तरह का व्यापारिक समझौता किया, तो अमेरिका कनाडाई उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देगा. ट्रंप का यह बयान न सिर्फ आर्थिक दबाव का संकेत है, बल्कि उत्तर अमेरिका की राजनीति में बढ़ते तनाव को भी उजागर करता है.
‘कनाडा कोई ट्रांजिट पोर्ट नहीं’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर तंज कसा. उन्होंने कार्नी को 'अमेरिका का गवर्नर' बताते हुए लिखा कि अगर कनाडा चीन के लिए अमेरिका में सामान भेजने का रास्ता बनने की कोशिश करेगा, तो यह उसकी बड़ी भूल होगी. ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में चीन को कनाडा के जरिए अपने बाजार तक पहुंचने नहीं देगा.
‘चीन कनाडा को निगल जाएगा’
ट्रंप ने अपने बयान में सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि कनाडा के भविष्य को लेकर भी डर जताया. उन्होंने कहा कि चीन के साथ नजदीकी बढ़ाने का मतलब कनाडा के कारोबार, सामाजिक ढांचे और जीवनशैली के लिए खतरा है. ट्रंप के मुताबिक, चीन की आर्थिक ताकत इतनी बड़ी है कि वह कनाडा को 'पूरी तरह निगल' सकता है. यह बयान ट्रंप की उस पुरानी सोच को दर्शाता है, जिसमें वे चीन को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं.
100 फीसदी टैरिफ की खुली धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी को और सख्त करते हुए कहा कि अगर कनाडा-चीन के बीच कोई भी ट्रेड डील होती है, तो अमेरिका में आने वाले सभी कनाडाई सामानों पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा कदम कनाडा की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.
दावोस से शुरू हुआ विवाद
ट्रंप का यह गुस्सा दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान पीएम कार्नी की टिप्पणियों के बाद सामने आया. कार्नी ने बिना नाम लिए बड़ी शक्तियों द्वारा छोटे देशों पर दबाव बनाने की आलोचना की थी. इसके बाद ट्रंप ने न सिर्फ प्रतिक्रिया दी, बल्कि कार्नी को अपने प्रस्तावित ‘पीस बोर्ड’ से जुड़ने का न्योता भी वापस ले लिया.
चीनी ईवी डील बनी चिंगारी
हाल ही में कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ कम करने के बदले अपने कृषि उत्पादों पर टैक्स में राहत पाने का समझौता किया था. ट्रंप पहले ही इस डील पर नाराजगी जता चुके थे. उनका मानना है कि ऐसे समझौते अमेरिका के हितों को कमजोर करते हैं.
बढ़ता तनाव, बढ़ती अनिश्चितता
ट्रंप के बयानों से साफ है कि अमेरिका, चीन और कनाडा के बीच व्यापारिक संतुलन एक बार फिर अस्थिर हो रहा है. अगर बयानबाजी आगे बढ़कर ठोस कदमों में बदली, तो इसका असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजार भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.
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