Bhupesh Baghel को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, पाटन चुनाव याचिका के खिलाफ अर्जी खारिज
(फाइल फोटो के साथ जारी) नयी दिल्ली, 28 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका में हस्तक्षेप करने से सोमवार को इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनके निर्वाचन के खिलाफ भाजपा नेता विजय बघेल की चुनाव याचिका को चुनौती दी है। भूपेश बघेल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दलील दी कि चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिन की अनिवार्य समय-सीमा के कारण विचारणीय नहीं थी। सिब्बल ने कहा कि चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजय बघेल द्वारा दाखिल हलफनामे की तारीख का विशेष रूप से हवाला दिया। सिब्बल ने कहा कि हलफनामे पर 22 जनवरी 2024 की तारीख है जबकि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिन की समय-सीमा 17 जनवरी 2024 को समाप्त हो गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘जब हलफनामा समय पर दाखिल नहीं हुआ तो चुनाव याचिका पर कार्यवाही कैसे आगे बढ़ सकती है?
हलफनामा समय पर दाखिल किया जाना जरूरी है।’’ हालांकि, पीठ ने कहा कि तारीखों की सत्यता और उनके कानूनी प्रभाव को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा। सिब्बल ने दलील दी कि समय-सीमा से जुड़ी आपत्ति मामले की जड़ से संबंधित है और इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता के तहत किसी भी चरण में उठाया जा सकता है। इस पर पीठ ने पूछा, ‘‘यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई?’’ सिब्बल ने स्वीकार किया कि यह मुद्दा इस चरण में उठाया जा रहा है लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि संबंधित हलफनामा पहले से रिकॉर्ड में है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस चूक को स्वीकार करता हूं, लेकिन जब कानून इतना स्पष्ट है तो मेरी इस चूक को मेरे खिलाफ न माना जाए। कृपया हलफनामे की तारीख देखिए। यह उनका अपना हलफनामा है।
नीचे 22 जनवरी की तारीख है जबकि अंतिम तारीख 17 जनवरी थी।’’ पीठ ने इस बात पर गौर किया कि हलफनामा रिकॉर्ड का हिस्सा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मौजूदा चरण में कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। उसने साथ ही संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय समय-सीमा के मुद्दे पर कानून के अनुसार विचार कर सकता है।
यह विवाद विजय बघेल द्वारा दायर उस चुनाव याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी है। विजय बघेल ने आरोप लगाया है कि भूपेश बघेल ने मतदान से पहले लागू 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि के दौरान निर्वाचन क्षेत्र में रैली निकाली और उन्होंने उनका चुनाव रद्द करने का अनुरोध किया है।
CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे पर अड़ी Congress, देश भर में किया विरोध प्रदर्शन
28 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन किया और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की। भोपाल में, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक फैसलों के लिए जनता का भरोसा बहुत ज़रूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था को लेकर संदेह पैदा हो गए हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
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पटवारी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, तो हमने माना कि शायद हमारी तरफ़ से कुछ कमियां रही होंगी। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान संविधान चर्चा का विषय बना। इस प्रक्रिया में BJP को 70 सीटों का नुकसान हुआ और माहौल उनके पक्ष में नहीं था; फिर भी, उन्होंने सरकार बनाई। उन्होंने आगे कहा कि शक तब पैदा हुआ जब ऐसा लगा कि चुनाव "चुराया" जा रहा है, और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से छेड़छाड़ के आरोपों का ज़िक्र किया। अपने बूथ का उदाहरण देते हुए पटवारी ने कहा कि मेरे बूथ पर BJP का एक भी कार्यकर्ता नहीं था, फिर भी BJP को 300 वोट मिले।
उन्होंने लोकतंत्र में जनता का भरोसा खोने के नतीजों पर सवाल उठाया कि लोकतंत्र में अगर भरोसा ही खत्म हो जाए, तो जनता किस पर विश्वास करेगी? पटवारी ने मध्य प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हटाए जाने का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को हटा दिया और उनकी जगह 'पर्ची से चुने गए मुख्यमंत्री' को भेज दिया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा खांसी की दवा, ज़हरीली शराब और डूबने से हुई मौतों से निपटने के तरीके की भी निंदा की और इसकी तुलना मुख्यमंत्री की उस प्रतिक्रिया से की जो उन्होंने तीन ईंटें गिरने पर दी थी: "वे राज्य के लोगों को बेवकूफ समझते हैं; मुख्यमंत्री ने खांसी की दवा, ज़हरीली शराब या डूबने से हुई मौतों पर आँसू नहीं बहाए, लेकिन तीन ईंटें गिरने पर वे रो पड़े।
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राजस्थान के जयपुर में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन भी किया। तस्वीरों में प्रदर्शन के दौरान लोगों को नारे लगाते हुए देखा गया। ये विरोध प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ कांग्रेस के देशव्यापी अभियान का हिस्सा थे, जिसमें उनके इस्तीफ़े की मांग और SIR प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई। श्रीनगर में, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने चुनावी जनादेश को चुराया हुआ बताया और SIR प्रक्रिया को पूरी तरह से ग़ैर-क़ानूनी क़रार दिया। उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में चल रहा है। CEC ने इस देश को धोखा दिया है; चुनावी जनादेश चुराए जा रहे हैं। SIR पूरी तरह से ग़ैर-क़ानूनी है। फ़ॉर्म 6 में किसी भी बदलाव के लिए इसे संसद में लाना ज़रूरी है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसलिए, SIR ग़ैर-क़ानूनी हो जाता है। अगर SIR ग़ैर-क़ानूनी है, तो सभी नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया भी ग़ैर-क़ानूनी है। पूरे देश में आक्रोश है। हर कोई विरोध करना चाहता है। देश को बचाने के लिए ज्ञानेश कुमार को हटा दिया जाना चाहिए।
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