UP Rajya Sabha Election: स्मृति ईरानी को फिर मिलेगी अहम जिम्मेदारी? यूपी से राज्यसभा भेजने की चर्चा, क्या है पूरा सियासी गणित?
UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने वाली है. खास बात यह है कि इसी के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर सियासी हलचलें भी तेज हो गई हैं. इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. माना जा रहा है कि स्मृति ईरानी को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.
सूत्रों की मानें तो पार्टी उन्हें यूपी के जरिए राज्यसभा भेजने का मन बना रही है. हालांकि अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी या घोषणा सामने नहीं आई है. लेकिन ये जान लेते हैं कि ये चुनाव क्यों काफी अहम माना जा रहा है?
स्मृति ईरानी 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से चुनाव हार गई थीं. इसके बाद वह केंद्र सरकार से बाहर हो गईं, लेकिन अगस्त 2026 में बीजेपी के नए राष्ट्रीय संगठन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई. अब राज्यसभा चुनाव में उनका नाम सामने आसे से यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी उन्हें फिर से संसद के उच्च सदन मं भेजने की तैयारी कर रही है?
यूपी में 10 राज्यसभा सीटों पर क्यों है नजर?
यूपी से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है. चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक,
29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख होगी, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा औऱ उसी दिन शाम 5 बजे से काउंटिंग होगी.
इन 10 सीटों में वर्तमान में आठ बीजेपी, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है. इन सदस्यों का कार्यकाल नवंबर से समाप्त हो रहा है. एक सीट डॉ. दिनेश शर्मा के इस्तीपे के बाद पहले ही रिक्त हो चुकी है.
यानी चुनाव केवल खाली हो रही सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे यूपी की विधानसभा में मौजूद दलों की संख्या के आधार पर राज्यसभा में पार्टियों का प्रतिनिधित्व भी तय होगा.
स्मृति ईरानी का नाम क्यों चर्चा में आया?
अब सबसे अहम सवाल आखिर स्मृति ईरानी का नाम क्यों चर्चा में आया? बता दें कि स्मृति ईरानी का नाम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में खास भूमिका निभा रही हैं. अगस्त में घोषित बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. यह नियुक्ति 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पार्टी संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका की वापसी के रूप में देखी गई.
सितंबर में पार्टी ने उन्हें हरियाणा और छत्तीसगढ़ की संगठनात्म जिम्मेदारी भी दी. इसका मतलब है कि वह फिलहाल पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में सक्रिया भूमिका निभा रही हैं. ऐसे में उनका राज्यसभा जाना हुआ तो वह संगठनात्मक और संसदीय दोनों भूमिकाओं में नजर आ सकती हैं.
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि राज्यसभा उम्मीदवारों की अंतिम सूची गोषित होने तक स्मृति ईरानी का नाम केवल संभावित उम्मीदवार के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
भाजपा के सामने सिर्फ स्मृति ईरानी का नाम नहीं
हालांकि यूपी राज्यसभा को लेकर बीजेपी के अंदर कई नामों पर चर्चा की खबरें सामने आ रही हैं. सूत्रों की मानें तो पार्टी कुछ मौजूदा सदस्यों को दोबारा मौका देने के साथ कुछ सीट पर नए चेहरों के उतारने के विकल्प पर भी सोच रही है. इनमें केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व डीजीपी ब्रजलाल, गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी जैसे नाम भी चर्चा में बताए गए हैं.
स्मृति ईरानी के अलावा कौन से नामों पर चर्चा
स्मृति ईरानी के अलावा हरीश द्विवेदी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में सामने आया है. हरीश द्विवेदी को हाल में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिली है. यही कारण है कि अंति सूची में संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों पहलुओं को ध्यान में रखे जाने की संभावना जताई जा रही है.
राज्यसभा चुनाव में कैसे होता है फैसला?
लोकसभा के विपरीत राज्यसभा के राज्यवार चुनाव में आम मतदाता सीधे वोट नहीं डालता है. राज्सभा के निर्वाचित सदस्य राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायकों की ओर से चुने जाते हैं. चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट का इस्तेमाल होता है.
इसका मतलब है कि किसी प्रत्याशी की जीत के लिए विधानसभा में मौजूद दलों और गठबंधनों के पास पर्याप्त संख्या होना जरूरी है. उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है और एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वाले वोट चाहिए.
यही कारण है कि उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ पार्टियों की विधानसभा में संख्या भी इस चुनाव का महत्वपूर्ण पहलू है.
यूपी का मौजूदा राजनीतिक गणित
रिपोर्टों की मानें तो यूपी विधानसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या है, जबकि समाजवादी पार्टी भी दो प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है. मौजूदा संख्या के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन 8 सीट के लिए आवश्यक संख्या रखता है जबकि सपा के पास दो सीट के लिए संख्याबल है.
ऐसे में इस गणित में अन्य दलों के लिए अपनी मौजूदा राज्यसभा सीट बचाना मुश्किल हो सकता है. क्योंकि पार्टी के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या नहीं है. यही कारण है कि रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा से बसपा का प्रतिनिधित्व खत्म हो सकता है.
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन में संगठन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दे रहे हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी इस बार कुछ नए चेहरों को मौका देने और सामाजिक संतुलन
साधने पर विचार कर रही है.
वहीं स्मृति ईरानी का नाम भी इसी व्यापक चर्चा या फिर प्रक्रिया का हिस्सा है. उनके पक्ष में सबसे प्रमुख तथ्य उनका लंबा संसदीय और केंद्रीय मंत्री के रूप में अनुभव माना जा रहा है. हालांकि दूसरी ओर पार्टी के सामे अन्य वरिष्ठ और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने का सवाल भी है.
क्या राज्यसभा के रास्ते फिर संसद पहुंचेंगी स्मृति?
इस सवाल का जवाब फिलहाल देना मुश्किल है. इसका जवाब आधिकारिक रूप से नहीं दिया जा सकता. उपलब्ध रिपोर्टों में स्मृति ईरानी को संभावित उम्मीदवार बताया गया है, लेकिन भाजपा ने अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है. पार्टी की प्रदेश इकाई से नामों का पैनल केंद्रीय स्तर पर भेजे जाने और उसके बाद अंतिम फैसला होने की प्रक्रिया बताई गई है.
ऐसे में आने वाले दिनों में 29 सितंबर से शुरू होने वाले नामांकन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी होंगी. लेकिन असली तस्वीर 6 अक्टूबर तक साफ हो सकती है.
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव केवल उच्च सदन की खाली सीटें भरने की कवायद नहीं है. यह विधानसभा में मौजूदा संख्या, दलों के संगठनात्मक समीकरण और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक तैयारियों से भी जुड़ा हुआ है. स्मृति ईरानी का नाम इस पूरी प्रक्रिया में सामने आया प्रमुख नामों में से एक है, लेकिन अंतिम फैसला उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा.
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Explainer: Drishyam: The Conclusion देखने से पहले जान लें ये 10 जरूरी बातें, वरना छूट जाएगा पूरा कनेक्शन
Drishyam: The Conclusion: बॉलीवुड स्टार अजय देवगन की मचअवेटेड फिल्म दृश्यम: द कन्क्लूजन इस साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है. अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर बनकर बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं. साल 2015 में आई दृश्यम और 2022 में रिलीज हुई दृश्यम 2 ने दर्शकों को जबरदस्त सस्पेंस और थ्रिल से बांधे रखा था. वहीं, अब ये कहानी अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है. ऐसे में अगर आप Drishyam: The Conclusion देखने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले पिछली फिल्मों की कुछ अहम बातें जान लेना जरूरी है. तो चलिए जानते हैं, इससे जुड़े 10 अहम बातें.
1. आम इंसान नहीं है विजय सालगांवकर
दृश्यम की कहानी विजय सालगांवकर की है, जो गोवा में रहने वाला एक आम इंसान है. वो केबल टीवी का काम करता है. उसने ज्यादा पढ़ाई नहीं की है, लेकिन उसे फिल्में देखने का बहुत शौक है, फिल्मों से सीखी गई बातों और अपनी तेज सोच की मदद से वो मुश्किल हालात में भी रास्ता निकाल लेता है. वहीं, जब उसके परिवार पर बड़ी मुसीबत आती है, तो वो उन्हें बचाने के लिए ऐसा प्लान बनाता है कि पुलिस भी उसकी चाल को समझ नहीं पाती.
2. वरुण देशमुख केस से शुरू हुई थी पूरी कहानी
पहली फिल्म की सबसे बड़ी घटना वरुण देशमुख की मौत थी. वरुण, आईजी मीरा देशमुख का बेटा था. कहानी में वो विजय की बेटी अंजू को ब्लैकमेल करता है. हालात ऐसे बनते हैं कि झड़प के दौरान वरुण की मौत हो जाती है. इसके बाद विजय अपने परिवार को बचाने के लिए सबूत मिटाने और सच्चाई छिपाने की कोशिश करता है. यहीं से पूरी फ्रेंचाइजी की नींव पड़ती है.
3. विजय ने पुलिस को कैसे चकमा दिया?
'दृश्यम' का सबसे बड़ा ट्विस्ट इसका क्लाइमेक्स था. अपने परिवार को बचाने के लिए विजय ने ऐसा प्लान बनाया कि पुलिस भी उलझ गई. उसने परिवार की यात्रा, होटल में रुकने और दूसरी कई बातों को पहले से ही इस तरह सेट किया कि सब कुछ सच जैसा लगने लगा. इसी वजह से पुलिस को उस पर शक तो हुआ, लेकिन उसके खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं मिल पाया. वहीं, उसकी पत्नी और दोनों बेटियों ने भी उसका पूरा साथ दिया.
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4. बेटे के लिए न्याय चाहती है मीरा देशमुख
दूसरी ओर फिल्म में एक्ट्रेस तब्बू ने मीरा देशमुख का रोल प्ले किया है. एक्ट्रेस वरुण देशमुख की मां है, जो कहानी का अहम हिस्सा है. एक मां के तौर पर वो अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती है. पहली फिल्म में वो विजय से हार जाती है, लेकिन उसकी लड़ाई खत्म नहीं होती, और उसका यही दर्द और गुस्सा फिल्म की कहानी को दूसरे पार्ट तक लेकर जाता है.
5. दृश्यम 2 में फिर से खुला केस?
दृश्यम के दूसरे पार्ट की कहानी कई साल आगे की दिखाई गई है. फिल्म में विजय अब पहले से ज्यादा सफल दिखाया गया. लेकिन वरुण केस का साया अभी भी उसके परिवार पर मंडरा रहा होता है. इसी दौरान कुछ नए सबूत सामने आते हैं और पुलिस एक बार फिर जांच शुरू करती है. यहीं से कहानी में नए ट्विस्ट आने शुरू होते हैं.
6. विजय ने दूसरी बार भी खेला बड़ा दांव
दृश्यम2 में दर्शकों को पता चलता है कि विजय ने सिर्फ पुलिस को ही नहीं, बल्कि आगे की जांच को भी ध्यान में रखकर तैयारी की थी. फिल्म के अंत में वो एक बार फिर कानून से बच निकलता है. यही वजह है कि अब दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि तीसरे पार्ट में आखिर क्या होने वाला है.
7. दृश्यम: द कन्क्लूजनमें कई नए किरदारों की एंट्री
दृश्यम: द कन्क्लूजन इस फिल्म का आखिरी पार्ट होने वाला है और इस बार कहानी में कुछ नए और दमदार किरदारों की भी एंट्री हुई है. जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat) और प्रकाश राज (Prakash Raj) जैसे कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं। माना जा रहा है कि ये किरदार कहानी में बड़ा मोड़ ला सकते हैं। नए किरदारों की वजह से विजय के सामने पहले से कहीं ज्यादा मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
8. सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है दृश्यम
दर्शकों की बात करे तो सोशल मीडिया पर लोग दृश्यम को सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री मानते हैं, लेकिन इसकी असली पावर परिवार की कहानी में छिपी है. विजय अपने परिवार को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है. यही इमोशनल जुड़ाव इस फ्रेंचाइजी को दूसरी थ्रिलर फिल्मों से अलग बनाता है. वहीं, फिल्म के तीसरे पार्ट में भी परिवार का ये पहलू अहम रहने की उम्मीद है,
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9. ट्रेलर में मिले कई बड़े हिंट
Drishyam: The Conclusion के ट्रेलर की बात करे तो इसने दर्शकों की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है. ट्रेलर में कई ऐसे सीन दिखाए गए हैं जो ये हिंट देते हैं कि पुराने राज फिर से सामने आ सकते हैं. कुछ डायलॉग और सीन्स ये भी इशारा करते हैं कि इस बार विजय की सबसे कठिन परीक्षा होने वाली है. हालांकि मेकर्स ने कहानी के मेन ट्विस्ट को अभी भी छिपाकर रखा है और इसी चीज ने लोगों की एक्साइटमेंट बढ़ा दी है.
10. क्या इस बार विजय सालगांवकर बच पाएगा?
अब फिल्म को लेकर फैंस के बीच जो सबसे बड़ा सवाल है वो यही है कि क्या इस बार विजय सालगांवकर का सच सबके सामने आ जाएगा. पिछले दो पार्ट में दर्शक विजय के साथ खड़े रहे हैं. लोग चाहते हैं कि वो अपने परिवार को बचा ले. लेकिन दूसरी तरफ ये भी सच है कि एक क्राइम हुआ था और उसका सच अब तक सामने नहीं आया है. बता दें कि, समीर देशमुख का असल में मर्डर विजय की पत्नी से हो जाता है, क्योंकि वो अपनी बेटी को बचा रही होती है. ऐसे में अब विजय अपने परिवार को बचा रहा है.
'दृश्यम द कन्क्लूजन' की स्टारकास्ट
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ की स्टार कास्ट की बात करे तो अजय देवगन, तब्बू (Tabu), श्रिया सरन (Shriya Sharan), रजत कपूर (Rajat Kapoor) और जयदीप अहलावत के अलावा प्रकाश राज, कमलेश सावंत, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर अभिषेक पाठक के साथ आमिल कीयन खान और परवेज शेख ने काम किया है.
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