Explainer: Drishyam: The Conclusion देखने से पहले जान लें ये 10 जरूरी बातें, वरना छूट जाएगा पूरा कनेक्शन
Drishyam: The Conclusion: बॉलीवुड स्टार अजय देवगन की मचअवेटेड फिल्म दृश्यम: द कन्क्लूजन इस साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है. अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर बनकर बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं. साल 2015 में आई दृश्यम और 2022 में रिलीज हुई दृश्यम 2 ने दर्शकों को जबरदस्त सस्पेंस और थ्रिल से बांधे रखा था. वहीं, अब ये कहानी अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है. ऐसे में अगर आप Drishyam: The Conclusion देखने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले पिछली फिल्मों की कुछ अहम बातें जान लेना जरूरी है. तो चलिए जानते हैं, इससे जुड़े 10 अहम बातें.
1. आम इंसान नहीं है विजय सालगांवकर
दृश्यम की कहानी विजय सालगांवकर की है, जो गोवा में रहने वाला एक आम इंसान है. वो केबल टीवी का काम करता है. उसने ज्यादा पढ़ाई नहीं की है, लेकिन उसे फिल्में देखने का बहुत शौक है, फिल्मों से सीखी गई बातों और अपनी तेज सोच की मदद से वो मुश्किल हालात में भी रास्ता निकाल लेता है. वहीं, जब उसके परिवार पर बड़ी मुसीबत आती है, तो वो उन्हें बचाने के लिए ऐसा प्लान बनाता है कि पुलिस भी उसकी चाल को समझ नहीं पाती.
2. वरुण देशमुख केस से शुरू हुई थी पूरी कहानी
पहली फिल्म की सबसे बड़ी घटना वरुण देशमुख की मौत थी. वरुण, आईजी मीरा देशमुख का बेटा था. कहानी में वो विजय की बेटी अंजू को ब्लैकमेल करता है. हालात ऐसे बनते हैं कि झड़प के दौरान वरुण की मौत हो जाती है. इसके बाद विजय अपने परिवार को बचाने के लिए सबूत मिटाने और सच्चाई छिपाने की कोशिश करता है. यहीं से पूरी फ्रेंचाइजी की नींव पड़ती है.
3. विजय ने पुलिस को कैसे चकमा दिया?
'दृश्यम' का सबसे बड़ा ट्विस्ट इसका क्लाइमेक्स था. अपने परिवार को बचाने के लिए विजय ने ऐसा प्लान बनाया कि पुलिस भी उलझ गई. उसने परिवार की यात्रा, होटल में रुकने और दूसरी कई बातों को पहले से ही इस तरह सेट किया कि सब कुछ सच जैसा लगने लगा. इसी वजह से पुलिस को उस पर शक तो हुआ, लेकिन उसके खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं मिल पाया. वहीं, उसकी पत्नी और दोनों बेटियों ने भी उसका पूरा साथ दिया.
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4. बेटे के लिए न्याय चाहती है मीरा देशमुख
दूसरी ओर फिल्म में एक्ट्रेस तब्बू ने मीरा देशमुख का रोल प्ले किया है. एक्ट्रेस वरुण देशमुख की मां है, जो कहानी का अहम हिस्सा है. एक मां के तौर पर वो अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती है. पहली फिल्म में वो विजय से हार जाती है, लेकिन उसकी लड़ाई खत्म नहीं होती, और उसका यही दर्द और गुस्सा फिल्म की कहानी को दूसरे पार्ट तक लेकर जाता है.
5. दृश्यम 2 में फिर से खुला केस?
दृश्यम के दूसरे पार्ट की कहानी कई साल आगे की दिखाई गई है. फिल्म में विजय अब पहले से ज्यादा सफल दिखाया गया. लेकिन वरुण केस का साया अभी भी उसके परिवार पर मंडरा रहा होता है. इसी दौरान कुछ नए सबूत सामने आते हैं और पुलिस एक बार फिर जांच शुरू करती है. यहीं से कहानी में नए ट्विस्ट आने शुरू होते हैं.
6. विजय ने दूसरी बार भी खेला बड़ा दांव
दृश्यम2 में दर्शकों को पता चलता है कि विजय ने सिर्फ पुलिस को ही नहीं, बल्कि आगे की जांच को भी ध्यान में रखकर तैयारी की थी. फिल्म के अंत में वो एक बार फिर कानून से बच निकलता है. यही वजह है कि अब दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि तीसरे पार्ट में आखिर क्या होने वाला है.
7. दृश्यम: द कन्क्लूजनमें कई नए किरदारों की एंट्री
दृश्यम: द कन्क्लूजन इस फिल्म का आखिरी पार्ट होने वाला है और इस बार कहानी में कुछ नए और दमदार किरदारों की भी एंट्री हुई है. जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat) और प्रकाश राज (Prakash Raj) जैसे कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं। माना जा रहा है कि ये किरदार कहानी में बड़ा मोड़ ला सकते हैं। नए किरदारों की वजह से विजय के सामने पहले से कहीं ज्यादा मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
8. सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है दृश्यम
दर्शकों की बात करे तो सोशल मीडिया पर लोग दृश्यम को सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री मानते हैं, लेकिन इसकी असली पावर परिवार की कहानी में छिपी है. विजय अपने परिवार को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है. यही इमोशनल जुड़ाव इस फ्रेंचाइजी को दूसरी थ्रिलर फिल्मों से अलग बनाता है. वहीं, फिल्म के तीसरे पार्ट में भी परिवार का ये पहलू अहम रहने की उम्मीद है,
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9. ट्रेलर में मिले कई बड़े हिंट
Drishyam: The Conclusion के ट्रेलर की बात करे तो इसने दर्शकों की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है. ट्रेलर में कई ऐसे सीन दिखाए गए हैं जो ये हिंट देते हैं कि पुराने राज फिर से सामने आ सकते हैं. कुछ डायलॉग और सीन्स ये भी इशारा करते हैं कि इस बार विजय की सबसे कठिन परीक्षा होने वाली है. हालांकि मेकर्स ने कहानी के मेन ट्विस्ट को अभी भी छिपाकर रखा है और इसी चीज ने लोगों की एक्साइटमेंट बढ़ा दी है.
10. क्या इस बार विजय सालगांवकर बच पाएगा?
अब फिल्म को लेकर फैंस के बीच जो सबसे बड़ा सवाल है वो यही है कि क्या इस बार विजय सालगांवकर का सच सबके सामने आ जाएगा. पिछले दो पार्ट में दर्शक विजय के साथ खड़े रहे हैं. लोग चाहते हैं कि वो अपने परिवार को बचा ले. लेकिन दूसरी तरफ ये भी सच है कि एक क्राइम हुआ था और उसका सच अब तक सामने नहीं आया है. बता दें कि, समीर देशमुख का असल में मर्डर विजय की पत्नी से हो जाता है, क्योंकि वो अपनी बेटी को बचा रही होती है. ऐसे में अब विजय अपने परिवार को बचा रहा है.
'दृश्यम द कन्क्लूजन' की स्टारकास्ट
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ की स्टार कास्ट की बात करे तो अजय देवगन, तब्बू (Tabu), श्रिया सरन (Shriya Sharan), रजत कपूर (Rajat Kapoor) और जयदीप अहलावत के अलावा प्रकाश राज, कमलेश सावंत, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर अभिषेक पाठक के साथ आमिल कीयन खान और परवेज शेख ने काम किया है.
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पीएचडी पूरी करने के लिए रिसर्च सामग्री तक पहुंच की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद शरजील इमाम की उस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए जरूरी शोध सामग्री तक पहुंच दिए जाने की मांग की है. मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस संजीव नरूला की अदालत में हुई. अदालत ने तिहाड़ प्रशासन से इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी.
जनवरी 2020 से जेल में शरजील इमाम
सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से अदालत को बताया गया कि वह जनवरी 2020 से हिरासत में हैं. जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उस समय वह अपनी पीएचडी के अंतिम वर्ष में थे. उनके वकील ने अदालत को बताया कि शोध कार्य से जुड़ा उनका सिनॉप्सिस विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मंजूर हो चुका है.
याचिका में कहा गया है कि जेल में रहते हुए अपनी पीएचडी का काम पूरा करने के लिए इमाम को उनके शोध से जुड़ी सामग्री देखने की अनुमति दी जाए. इसके लिए इंटरनेट या वाई-फाई से जुड़े कंप्यूटर के बजाय ऐसा कंप्यूटर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो इंटरनेट से कनेक्टेड न हो. शोध सामग्री पेन ड्राइव के जरिए उपलब्ध कराने की मांग की गई है.
कंप्यूटर पर सामग्री देखने की और शोध की मांगी थी अनुमति
याचिका के मुताबिक, जेल प्रशासन की निगरानी में इमाम को कंप्यूटर पर यह सामग्री देखने और अपने शोध कार्य से संबंधित काम करने की अनुमति दी जा सकती है. इस व्यवस्था के जरिए जेल की सुरक्षा से जुड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपनी अकादमिक गतिविधि जारी रखने का अवसर देने की मांग की गई है.
अदालत को बताया गया कि पेन ड्राइव में करीब 2,132 फाइलें मौजूद हैं. इनमें शोध से जुड़े लेख, किताबें और ऐतिहासिक दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट शामिल हैं. इमाम की ओर से कहा गया कि यह सामग्री उनके शोध कार्य के लिए जरूरी है और इसके बिना पीएचडी पूरी करने में कठिनाई हो रही है.
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने इस मांग को लेकर किसी आपत्ति की बात नहीं कही. अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि ट्रायल कोर्ट के सामने भी पुलिस ने इस अनुरोध का विरोध नहीं किया था. उनके मुताबिक, इस मामले में आपत्ति जेल प्रशासन की ओर से की गई थी.
तिहाड़ जेल प्रशासन से अपना पक्ष रखने को कहा
इस पर हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन से पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है. अदालत अब जेल प्रशासन की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे विचार करेगी. फिलहाल अदालत ने इमाम को शोध सामग्री उपलब्ध कराने को लेकर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है.
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल में रहते हुए किसी बंदी को शैक्षणिक या शोध कार्य के लिए डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने का सवाल जेल की सुरक्षा और बंदी की अकादमिक जरूरतों, दोनों से जुड़ा है. याचिका में जिस व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है, उसमें इंटरनेट और वाई-फाई की सुविधा के बिना कंप्यूटर के इस्तेमाल की बात कही गई है और सामग्री को जेल अधिकारियों की निगरानी में देखने का अनुरोध किया गया है.
गिरफ्तारी के समय अंतिम चरण में थी इमाम की पीएचडी
शरजील इमाम की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि उनका शोध कार्य पहले से निर्धारित अकादमिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा था और गिरफ्तारी के समय वह पीएचडी के अंतिम चरण में थे. ऐसे में शोध सामग्री तक सीमित और निगरानी में पहुंच दिए जाने की मांग की गई है.
अब इस मामले में तिहाड़ जेल प्रशासन की रिपोर्ट अहम होगी. रिपोर्ट में जेल प्रशासन को यह बताना होगा कि पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री को बंदी तक किस तरह उपलब्ध कराया जा सकता है और इस संबंध में जेल के नियमों के तहत क्या स्थिति है. अदालत अगली सुनवाई में इन पहलुओं पर विचार करेगी. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की गई है. उस दिन तिहाड़ जेल प्रशासन की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्यवाही पर फैसला करेगा.
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