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Govinda की रूमर्ड गर्लफ्रेंड Komal Rani ने Sunita Ahuja पर लाए आरोप! Kashmera Shah ने किया फुल सपोर्ट

Kashmera Shah Support Sunita Ahuja: एक्ट्रेस रानी स्वर्णकार ने एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट में सुनीता आहूजा पर आरोप लगाए हैं. इस मामले पर एक्ट्रेस कश्मीरा शाह ने सुनीता का बचाव किया है. ये बयान गोविंदा और उनकी 'रूपा' की को-स्टार रानी को लेकर चल रही अटकलों के बीच आया है. 

कश्मीरा ने किया सुनीता का बचाव

इंस्टाग्राम पर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए कश्मीरा ने कहा कि अपने परिवार की रक्षा करने वाली महिलाओं को अक्सर बुरे नामों से बुलाया जाता है. मगर ये पहली बार है जब उन पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं. उन्होंने लिखा, 'हमें अक्सर बदतमीज, घमंडी, हावी होने वाली, फोकस्ड और मतलबी कहा जाता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि हम अपने परिवार का ध्यान रखती हैं. मगर ये पहली बार है जब हमें 'कातिल' कहा जा रहा है. तो अगर हर मां, पत्नी, बहन, मौसी/बुआ को उस एक आदमी की रक्षा करने के लिए कातिल कहा जाता है, जिसे वे प्यार करती हैं- चाहे वो पिता हो, पति हो, भाई हो, तो ठीक है.' उन्होंने सीधे सुनीता को टैग करते हुए अपना समर्थन जताया.

इतना ही नहीं उन्होंने ये भी लिखा, 'मेरे करियर की शुरुआत से लेकर अब तक, 30 साल और कुल 50 फिल्मों में, मेरे किसी भी को-स्टार को मेरी निजी जिंदगी या भावनाओं के बारे में कुछ भी पता नहीं था. मैंने सब कुछ सिर्फ उस व्यक्ति को बताया, जिससे मैंने शादी की- कृष्णा अभिषेक. मैंने काम की जगह पर कभी ऐसे रिश्ते के बारे में नहीं सुना, जहां कोई सहकर्मी इतनी निजी बातें जानता हो.'

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EVM और VVPAT पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- जनता के मन में शक लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं

UP Politics: देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में मतदान सबसे बड़ा अधिकार है, लेकिन जब इस अधिकार के इस्तेमाल पर ही संदेह के बादल मंडराने लगें तो सियासत का गरमाना तय है. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान को लेकर बड़ा बयान दिया.

उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के भरोसे पर टिकी होती है. अगर किसी भी नागरिक के मन में यह हिचकिचाहट रह जाए कि उसका दिया गया वोट सही प्रत्याशी को मिला भी है या नहीं, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए एक गंभीर स्थिति बन जाती है. उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया इतनी साफ और स्पष्ट होनी चाहिए कि समाज के हर तबके को उस पर अटूट विश्वास रहे.

मतपत्रों के पुराने दौर से मशीनों तक का सफर

मायावती ने चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि भारत में आजादी के बाद दशकों तक मतपत्रों के जरिए चुनाव कराए जाते थे. उस दौर में वोटर अपने हाथ से मुहर लगाकर मतपेटी में पर्ची डालता था, जिससे उसे अपनी पसंद पर पूरा भरोसा रहता था. बाद में समय के साथ चुनाव आयोग ने आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ईवीएम का चलन शुरू किया. बसपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी पहले दिन से ही मशीनी मतदान के तौर तरीकों पर ऐतराज जताती रही है. उनका मानना है कि आधुनिक बदलाव भले ही सुविधा लाते हों, लेकिन चुनावी व्यवस्था में सुविधा से कहीं ज्यादा महत्व निष्पक्षता और जनभावना के सम्मान का होता है.

कमजोर तबके का भरोसा बनाए रखना जरूरी

बसपा सुप्रीमो ने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां आज भी बहुत बड़ा तबका आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है. इनमें से कई मतदाता कम पढ़े लिखे या ग्रामीण अंचलों में रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई गरीब, वंचित या मजदूर कतार में लगकर अपना वोट डालता है, तो उसके मन में रत्ती भर भी संशय नहीं रहना चाहिए. अगर ऐसे वर्ग चुनावी प्रक्रिया पर संदेह करने लगेंगे, तो उनका विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं से डगमगाने लगेगा. इसलिए चुनाव आयोग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक व्यवस्था की शुचिता का संदेश पूरी मजबूती से पहुंचाए.

वीवीपैट पर्चियों की पूरी गिनती की मांग

मतदान की पुष्टि के लिए जोड़ी गई वीवीपैट व्यवस्था को लेकर भी मायावती ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि वोट डालने के बाद निकलने वाली पर्ची को देखने भर से व्यवस्था पारदर्शी नहीं बन जाती. मौजूदा नियमों के तहत हर मतदान केंद्र पर सभी पर्चियों की गिनती नहीं की जाती, बल्कि कुछ चुनिंदा मशीनों का ही मिलान होता है. मायावती का कहना है कि जब तक हर बूथ पर मशीन में दर्ज कुल मतों और वीवीपैट से निकली पर्चियों का शत प्रतिशत मिलान नहीं होगा, तब तक आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हो सकतीं. मतदाता को इस बात की पूरी तसल्ली मिलनी चाहिए कि स्क्रीन पर दिखा निशान और बक्से में दर्ज हुआ फैसला एक ही है.

तकनीकी सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में तकनीकी छेड़छाड़ की संभावनाओं का जिक्र करते हुए बसपा अध्यक्ष ने कहा कि दुनिया भर में चुनावी सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ती रही है. हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई अलग से तकनीकी दस्तावेज या रिपोर्ट पेश नहीं की, लेकिन उनका कहना था कि जब बात करोड़ों लोगों के जनादेश की हो तो किसी भी सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने चुनाव आयोग और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे आगे आकर इन तमाम संशयों का स्थाई निवारण करें.

जनता का विश्वास ही लोकतंत्र की असली बुनियाद

मायावती ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा कि चुनाव केवल सरकार बनाने या किसी पार्टी को जिताने हराने का माध्यम नहीं हैं. यह करोड़ों नागरिकों की उस आस्था का प्रतीक हैं, जो वे अपने देश की व्यवस्था पर जताते हैं. उन्होंने दोहराया कि बहुजन समाज पार्टी लगातार इन मुद्दों को इसलिए उठा रही है ताकि देश का लोकतंत्र और ज्यादा मजबूत बने. अगर चुनाव प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता के मानक और ऊंचे किए जाते हैं, तो इससे न केवल राजनीतिक दलों की आशंकाएं दूर होंगी बल्कि आम वोटर का मनोबल भी कई गुना बढ़ जाएगा.

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  Sports

South Africa ने Australia के खिलाफ Test के लिए 18 सदस्यीय टीम चुनी, Kagiso Rabada की वापसी

साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज़ के लिए मंच तैयार है। वनडे सीरीज़ खत्म होने के बाद, दोनों टीमें तीन टेस्ट मैचों में आमने-सामने होंगी। पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को डरबन के किंग्समीड में शुरू होगा। मैच से पहले, CSA (क्रिकेट साउथ अफ्रीका) ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ पहले टेस्ट के लिए प्रोटियाज़ की शुरुआती 18-सदस्यीय टीम का ऐलान किया। मेज़बान टीम के लिए एक बड़ी अच्छी खबर यह है कि स्टार तेज़ गेंदबाज़ कगिसो रबाडा को टीम में शामिल किया गया है; वे चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रहने के बाद वापसी कर रहे हैं।

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रबाडा के अलावा, एनरिक नॉर्टजे मार्च 2023 के बाद अपना पहला टेस्ट खेल सकते हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि टीम में शामिल किए जाने के बावजूद, इस बात पर संदेह है कि क्या रबाडा पहले टेस्ट के लिए प्लेइंग XI में जगह बना पाएंगे या नहीं। क्रिकेट साउथ अफ्रीका द्वारा टीम की घोषणा के बाद, टीम के हेड कोच शुकरी कॉनराड ने टीम के गठन पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पहले टेस्ट से पहले, टीम ज़बरदस्त ट्रेनिंग और टीम के अंदर ही कुछ मैच खेलेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि मौजूदा WTC चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ पहले टेस्ट में कैसा प्रदर्शन करते हैं।

इससे मैनेजमेंट को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ पहले टेस्ट के लिए प्लेइंग XI तय करने में मदद मिलेगी। CSA की एक रिलीज़ के अनुसार, शुकरी कॉनराड ने कहा कि हमारे पास ट्रेनिंग के लिए कुछ दिन, दो दिन का इंट्रा-स्क्वाड मैच और हालात के हिसाब से ट्रेनिंग का मौका होगा, जिससे हमें अपनी फ़ाइनल 15 खिलाड़ियों की टीम चुनने से पहले ग्रुप और हालात को समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि बड़ा बॉलिंग ग्रुप होने से हमें हर तरह की स्थिति से निपटने में आसानी होती है। हमारे पास टीम में कई विकल्प हैं और अगले हफ़्ते हमें यह तय करने का मौका मिलेगा कि कौन से कॉम्बिनेशन हालात के हिसाब से सबसे अच्छे रहेंगे।

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साउथ अफ्रीका की शुरुआती टेस्ट टीम: टेम्बा बावुमा (कप्तान), मार्केस एकरमैन, डेविड बेडिंगहम, कॉर्बिन बॉश, गेराल्ड कोएत्ज़ी, टोनी डी ज़ोरज़ी, साइमन हार्मर, मार्को जानसेन, केशव महाराज, एडेन मार्करम, वियान मुल्डर, सेनुरन मुथुसामी, एनरिक नॉर्टजे, डेन पैटरसन, कगिसो रबाडा, रयान रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स, काइल वेरिन।

Mon, 28 Sep 2026 16:25:00 +0530

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