नर्मदापुरम से शुरू हुई 150 KM की कांवड़ यात्रा, 25वें वर्ष में हजारों शिवभक्त करेंगे जटाशंकर महादेव का जलाभिषेक
सावन का पहला सोमवार नर्मदापुरम के लिए इस बार भी खास बन गया। सुबह होते ही शहर के घाट, मंदिर और सड़कें शिवभक्ति के रंग में रंग गईं। मां नर्मदा के तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए और पूरे विधि-विधान के साथ कांवड़ यात्रा की शुरुआत की।
इस वर्ष जटाशंकर कांवड़ यात्रा अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। पिछले 24 वर्षों से लगातार निकाली जा रही यह यात्रा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि नर्मदापुरम की पहचान बन चुकी है।
24 साल की परंपरा अब 25वें वर्ष में पहुंची
जटाशंकर कांवड़ यात्रा की शुरुआत करीब 24 वर्ष पहले कुछ श्रद्धालुओं के साथ हुई थी। समय के साथ इस यात्रा का स्वरूप लगातार बढ़ता गया। आज यह मध्य प्रदेश की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। इस वर्ष यात्रा अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और हर साल की तरह इसमें बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए हैं।
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, कई श्रद्धालु ऐसे हैं जो यात्रा की शुरुआत से ही हर वर्ष बिना रुके इसमें भाग लेते आ रहे हैं। उनके लिए यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि हर वर्ष नए श्रद्धालु भी इस यात्रा से जुड़ते जा रहे हैं।
सेठानी घाट से शुरू हुई आस्था की यात्रा
सावन के पहले सोमवार की सुबह श्रद्धालु नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पहुंचे। यहां मां नर्मदा की पूजा-अर्चना की गई और पूरे विधि-विधान के साथ पवित्र जल कांवड़ में भरा गया। इसके बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए यात्रा की शुरुआत हुई।
यात्रा शुरू होने से पहले रविवार शाम को मां नर्मदा को 1100 मीटर लंबी चुनरी अर्पित की गई। इसके बाद महाआरती और दीपदान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। घाट पर भक्ति का ऐसा माहौल बना कि पूरा क्षेत्र शिवमय दिखाई देने लगा।
150 किलोमीटर पैदल चलकर करेंगे जलाभिषेक
इस यात्रा में शामिल शिवभक्त करीब 150 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करेंगे। यात्रा का अंतिम पड़ाव पचमढ़ी स्थित प्रसिद्ध जटाशंकर महादेव मंदिर है, जहां मां नर्मदा का पवित्र जल भगवान शिव को अर्पित किया जाएगा।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल पैदल चलने की नहीं, बल्कि धैर्य, विश्वास और समर्पण की परीक्षा भी होती है। कई दिनों तक लगातार पैदल चलना आसान नहीं होता, लेकिन भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति देती है।
फूलों की बारिश से हुआ कांवड़ियों का स्वागत
जैसे ही कांवड़ यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होकर आगे बढ़ी, स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई स्थानों पर फूलों की वर्षा की गई। लोगों ने कांवड़ियों के लिए पेयजल, फल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी कीं। पूरा शहर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। सड़क किनारे खड़े लोग हाथ जोड़कर कांवड़ियों का अभिवादन करते रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनते दिखाई दिए।
भजनों और जयकारों से गूंज उठा पूरा रास्ता
यात्रा के दौरान डीजे, ढोल, बैंड और शिव भजनों की धुन पर श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कई श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे, जबकि कुछ लोग भजन गाकर भगवान शिव की आराधना कर रहे थे। यात्रा के हर पड़ाव पर भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला।
सावन में जटाशंकर महादेव का विशेष महत्व
पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर मध्य प्रदेश के प्रमुख शिवधामों में से एक माना जाता है। प्राकृतिक गुफा में स्थित यह मंदिर पूरे साल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहता है, लेकिन सावन के महीने में यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के दौरान इस स्थान पर कुछ समय तक निवास किया था। इसी कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
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