PM Awas Yojana: बिहार के इन जिलों में पीएम आवास योजना की सूची जारी, जानें आवेदन की प्रक्रिया
PM Awas Yojana: बिहार के ग्रामीण इलाकों में हर बेघर और जरूरतमंद परिवार को पक्की छत मुहैया कराने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी पहल देखने को मिली है. रविवार को राज्य के नालंदा, अररिया और अरवल जिलों की विभिन्न पंचायतों में विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन किया गया. इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के नए सर्वे के आधार पर तैयार की गई लाभार्थियों की सूची को सबके सामने रखना था.
पंचायत सरकार भवनों और सामुदायिक परिसरों में आयोजित इन ग्रामसभाओं में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी. इस दौरान सूची में अपना नाम सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी उपस्थित रहे. अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को पूरी पारदर्शिता के साथ नाम पढ़कर सुनाए और योजना से जुड़े नियमों की विस्तार से जानकारी दी.
नालंदा जिले में हुआ गहन सर्वे
नालंदा जिले के बिंद प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बिंद और कथराही पंचायत में आवास योजना को लेकर विशेष बैठक बुलाई गई. बिंद पंचायत के मुखिया उमेश राउत ने बताया कि पंचायत के सभी वार्डों में जरूरतमंद परिवारों का गहन सर्वे कराया गया था. इस प्रक्रिया के तहत कुल 1386 परिवारों का सर्वे पूरा हुआ, जिसमें से जांच के बाद 1276 परिवारों को पात्र पाया गया. इन चयनित लाभार्थियों में सामान्य वर्ग के 971, अनुसूचित जाति के 303 और अनुसूचित जनजाति के 2 परिवार शामिल हैं.
दूसरी ओर, कथराही पंचायत के मुखिया अनिल कुमार की मौजूदगी में हुई सभा में बताया गया कि वहां 956 परिवारों का सर्वे हुआ था, जिसमें 552 योग्य लाभार्थी चुने गए हैं. इस पंचायत में सामान्य वर्ग के 441 और अनुसूचित जाति के 111 लाभुकों का चयन हुआ है. बैठक में मौजूद बीडीओ जफरुद्दीन और अन्य कर्मियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि हर पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार मिलेगा.
अररिया जिले में प्रारूप सूची पर हुआ मंथन
अररिया जिले के जोकीहाट और आसपास के क्षेत्रों में भी सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान के तहत ग्रामसभा का आयोजन हुआ. ग्राम पंचायत राज किरकिचिया के पंचायत सरकार भवन में मुखिया रबिन खातून की अध्यक्षता में ग्रामीण जुटे. यहां आवास प्लस के तहत तैयार प्रारूप प्रतीक्षा सूची प्रस्तुत की गई. किरकिचिया में कुल 1596 परिवारों के नाम ड्राफ्ट सूची में जोड़े गए हैं.
इनमें सामान्य, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के 1230, अनुसूचित जाति के 318 और अनुसूचित जनजाति के 48 परिवार शामिल हैं. अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि यह अभी प्रारूप सूची है. इसके बाद हर नाम की जमीनी स्तर पर पात्रता जांची जाएगी ताकि कोई भी अपात्र व्यक्ति गलत तरीके से लाभ न ले सके और सच्चा जरूरतमंद बाहर न रहे. इसके साथ ही पंचायत के समग्र विकास के लिए दस प्राथमिक योजनाओं के चयन पर भी विचार हुआ.
इसके अलावा रानीगंज प्रखंड क्षेत्र की पहुंसरा पंचायत में आयोजित ग्रामसभा में भी भारी उत्साह देखने को मिला. पंचायत की मुखिया सीता देवी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं. मुखिया ने ग्रामीणों को बताया कि इस पंचायत में कुल 1892 लाभुकों का चयन प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत किया गया है.
अरवल जिले में दावा और आपत्ति का मिला मौका
अरवल जिले के कुर्था प्रखंड की पंचायतों में भी रविवार का दिन गहमागहमी भरा रहा. यहां की सचई पंचायत में 1710, मानिकपुर पंचायत में 1345 और बारा पंचायत में 1288 लाभार्थियों की ड्राफ्ट सूची पढ़कर सुनाई गई. सूची में नाम आने पर जहां अनेक परिवारों के चेहरों पर खुशी देखी गई, वहीं कुछ लोग नाम शामिल न होने से निराश भी हुए.
इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए बीडीओ संजीव कुमार और आरओ शमशूल कमर ने ग्रामीणों को समझाया कि ड्राफ्ट सूची अंतिम निर्णय नहीं है. यदि किसी योग्य गरीब परिवार का नाम गलती से छूट गया है, या फिर सूची में शामिल किसी नाम पर किसी को संदेह है, तो वह विधिवत लिखित आवेदन देकर अपनी आपत्ति या दावा दर्ज करा सकता है. प्रशासन सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच करेगा और उसके बाद ही अंतिम सूची को स्वीकृति दी जाएगी.
योजना की पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक को निर्धारित नियमों को पूरा करना अनिवार्य होता है. मुख्य शर्त यह है कि आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के पास पहले से कोई पक्का मकान नहीं होना चाहिए. साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति, आय सीमा और मौजूदा रहन-सहन के आधार पर पात्रता का निर्धारण होता है. योजना से जुड़ने के लिए पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण, आय व निवास प्रमाण पत्र और जमीन संबंधी कागजात आवश्यक होते हैं. शहरी क्षेत्र के लोग आधिकारिक पोर्टल पर जाकर सिटिजन असेसमेंट के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार श्रेणी चुनकर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं. फॉर्म भरते समय आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाता है.
आवेदन के बाद पहचान संख्या रखना है बेहद जरूरी
ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से आवेदन पूरा होने के बाद मिलने वाली आवेदन पहचान संख्या को संभालकर रखना चाहिए, क्योंकि भविष्य में आवेदन की स्थिति जांचने के लिए यही संख्या काम आती है. जो लोग खुद ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में असहज महसूस करते हैं, वे नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर सहायता प्राप्त कर सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपनी ग्राम पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य या प्रखंड कार्यालय में जाकर योजना से जुड़ी हर नई जानकारी और सूची में अपना नाम आसानी से देख सकते हैं.
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Explainer: बार-बार भूलना- फोकस में कमी जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें, ब्रेन फॉग से आएगा हार्ट अटैक?
Brain Fog Causes: आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में वर्क प्रेशर, लगातार बढ़ता हुआ स्क्रीन टाइम, नींद की कमी और तनाव हमारे स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. ऐसे में कई लोगों को अक्सर ऐसा महसूस होता है कि उनका दिमाग ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है. छोटी-छोटी बातें याद नहीं रहतीं, किसी काम में लंबे समय तक फोकस करना मुश्किल लगता है और बातचीत के दौरान अचानक सही शब्द का याद नहीं आना, कुछ लोग ऐसे संकेतों को 'दिमाग में धुंध छाने' जैसा बताया जाता है. बता दें कि मेडिकल भाषा में इसे आमतौर पर ब्रेन फॉग कहा जाता है.
अक्सर लोग इसे सिर्फ थकान, ज्यादा काम या नींद पूरी न होने का कारण मानकर, इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या ब्रेन फॉग का संबंध सिर्फ मानसिक थकान से है? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर मामले में ऐसा जरूरी नहीं होता है. शरीर में ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन की सप्लाई से जुड़ी कुछ स्थितियां भी दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. यही कारण है कि कुछ परिस्थितियों में ब्रेन फॉग और हार्ट हेल्थ के बीच कनेक्शन है और इस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है.
क्या है ब्रेन फॉग और इसके शुरुआती लक्षण?
सबसे पहले हमें यह समझना जरूरी है कि ब्रेन फॉग अपने आप में कोई दिमागी बीमारी नहीं है. यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें इंसान को सोचने, चीजों को याद रखने में, फोकस करने में या फैसला लेने में सामान्य से ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है. इसके दौरान व्यक्ति को बार-बार चीजें भूलना, किसी काम पर फोकस न कर पाना या फिर बातचीत के बीच सही शब्द याद न आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. बच्चों में कई बार पढ़ते या काम करते समय ऐसा लगता है कि जानकारी सामने होने के बावजूद भी उसे समझने या याद रखने में ज्यादा समय लग रहा है.
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ब्रेन फॉग का एक्सपीरियंस अलग-अलग लोगों में अलग प्रकार से हो सकता है. स्ट्रैस, नींद की कमी, थकान और कई अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स इसके पीछे हो सकते हैं. इसलिए, सिर्फ ब्रेन फॉग के आधार पर किसी बीमारी का फैसला लेना सही नहीं है.
दिमाग और दिल के बीच क्या कनेक्शन है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिमाग हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है. यह उन अंगों में शामिल है, जिसे लगातार ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन की जरूरत होती है. इन्हें शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने का काम ब्लड सर्कुलेशन के जरिए होता है और इस प्रक्रिया में दिल की महत्वपूर्ण भूमिका भी होती है.
डॉक्टर क्या कहते हैं?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अंशुल कुमार ने एक मीडिया चैनल को बताते हैं कि जब हमारा हार्ट सही तरीके से ब्लड को पंप नहीं कर पाता है, तो शरीर के दूसरे अंगों के साथ-साथ ब्रेन तक ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई को भी प्रभावित करता है. ऐसी स्थिति में इंसान की मानसिक सतर्कता, फोकस और याददाश्त पर असर पड़ता है. यही कारण है कि कुछ मामलों में लगातार रहने वाले मानसिक धुंधलेपन (mental fogginess) को नजरअंदाज करने के बजाय उसके पीछे मौजूद कारणों को समझना बहुत जरूरी होता है.
किन हार्ट प्रॉब्लम्स से जुड़ा है Brain Fog?
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की कमजोर कार्यक्षमता, हार्ट फेलियर और ब्लड वैसेल्स से जुड़ी समस्याएं लंबे समय में ब्रेन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है. उदाहरण के लिए, लंबे समय तक हाई BP रहने से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ सकता है. वहीं, जब हार्ट की पंपिंग करने की क्षमता प्रभावित होती है तो शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त ब्लड पहुंचने में समस्या हो सकती है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रेन फॉग होने वाला हर इंसान हार्ट की बीमारी से जूझ रहा है. इसके पीछे नींद की कमी, तनाव, पोषण की कमी, हार्मोनल चेंजेस या अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं. इसलिए, लक्षणों को देखकर खुद से किसी भी बीमारी की पहचान करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.
कब ब्रेन फॉग को गंभीरता से लेना चाहिए?
अगर कभी-कभार नींद पूरी न होने से या बहुत ज्यादा थकान के बाद भी ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है तो यह जरूरी नहीं कि किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो. लेकिन यदि किसी को भूलने की समस्या बार-बार हो रही है तो रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होने लगते हैं. इसके अलावा, लंबे समय तक फोकस करने में परेशानी बनी हुई है, तो भी इसके कारणों पर ध्यान देना चाहिए. खासतौर पर अगर मानसिक धुंधलेपन के साथ व्यक्ति को सांस फूलने, असामान्य थकान, सीने में असहजता, चक्कर आना या दिल की धड़कनों से जुड़ी परेशानी जैसे दूसरे लक्षण भी महसूस हों, तो मेडिकल हेल्प लेना जरूरी हो सकता है.
सिर्फ दिमाग नहीं, दिल का भी रखें ख्याल...
ब्रेन फॉग से बचाव के लिए किसी एक उपाय को पर्याप्त नहीं माना जा सकता है. शरीर और दिमाग दोनों की बेहतर सेहत के लिए लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी होता है. आपको नियमित शारीरिक गतिविधियां करनी चाहिए, संतुलित डाइट करना, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना चाहिए. इसके अलावा, BP, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच भी नियमित रूप से और उन्हें नियंत्रण में रखना भी जरूरी होता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिल की सेहत का ध्यान रखना अप्रत्यक्ष रूप से ब्रेन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि सही ब्लड सर्कुलेशन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाने में मदद करेगा.
ब्रेन फॉग को सही से समझें...
ब्रेन फॉग को लेकर सबसे जरूरी बात यह होती है कि इसे देखकर तुरंत हार्ट की बीमारी की आशंका लगाना गलत हो सकता है. यह कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है या दूसरे असामान्य लक्षणों के साथ दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए.
दिल का ख्याल रखना दिमाग के लिए भी फायदेमंद
शरीर में दिखने वाला कोई भी बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि हमें अपनी सेहत पर थोड़ा अधिक ध्यान देने की जरूरत है. इसलिए, पर्याप्त नींद, बेहतर खान-पान, नियमित रूप से एक्सरसाइज करना और स्ट्रैस मैनेजमेंट के साथ समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना भी जरूरी होता है. दिल और दिमाग दोनों की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई होती है, इसलिए किसी एक को नजरअंदाज करके पूरी सेहत का ख्याल नहीं रखा जा सकता.
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