Responsive Scrollable Menu

Ujjain में विकास के लिए मंदिर टूटे, CM का घर टूटा, मस्जिद की बारी आई तो प्रशासन पर बरसने लगे पत्थर! धर्म बड़ा है या देश?

धर्म बड़ा है या देश? यह सवाल आज तब फिर उठ खड़ा हुआ जब मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने की कार्रवाई के दौरान तनाव बढ़ गया। सवाल उठता है कि जिस सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिरों के हिस्से हटाये गये, जिस सड़क के चौड़ीकरण के लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक घर का हिस्सा खुद हटा दिया हो उस सड़क की राह में एक खास वर्ग के लोग रोड़े क्यों अटकाने लग गये? सवाल यह भी उठता है कि यदि किसी धर्म विशेष का हिस्सा विकास की राह में आ रहा है और उसे हटाना जनहित में है तो उसे हटाने की पहल खुद उस धर्म से जुड़े लोग क्यों नहीं कर रहे? यदि विरोध करना भी है तो शांतिपूर्ण विरोध क्यों नहीं कर रहे? पुलिस और प्रशासन पर पत्थरबाजी कर क्या संदेश दिया जा रहा है?

हम आपको बता दें कि उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोमवार को कार्रवाई शुरू होते ही मौके पर तनाव बढ़ गया और विरोध कर रहे लोगों तथा पुलिस के बीच टकराव हुआ। पथराव के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और इलाके में भारी पुलिस बल तथा त्वरित कार्रवाई बल तैनात कर दिया गया। यह मामला उस सड़क के चौड़ीकरण से जुड़ा है, जिसे सिंहस्थ-2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और यातायात के दबाव को देखते हुए चौड़ा किया जा रहा है। इस परियोजना की जद में 272 संरचनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें धार्मिक और निजी दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। प्रशासन का तर्क है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के लिए शहर की यातायात क्षमता और आधारभूत ढांचे को समय रहते मजबूत करना जरूरी है।

इसे भी पढ़ें: RSS Chief Mohan Bhagwat बोले: भेदभाव न करना ही भारत की धर्मनिरपेक्षता की असली परंपरा

हम आपको यह भी बता दें कि इस अभियान को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक प्रतीकात्मक शुरुआत भी दी गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक मकान के उस हिस्से पर खुद गेती चलाई, जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आया है। उन्होंने इसे भावनात्मक क्षण बताते हुए कहा कि जहां उनका बचपन बीता, उस घर का हिस्सा भी विकास के लिए हटाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सिंहस्थ और प्रशासनिक जरूरत के लिए यह आवश्यक है तो यह त्याग करना होगा।

यही उदाहरण अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ा तर्क बनकर सामने है। जब मुख्यमंत्री का अपना पैतृक मकान परियोजना से प्रभावित हो सकता है तो सड़क की तय सीमा में आने वाली दूसरी संरचनाओं को लेकर भी समान नियम लागू किए जाने का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन शाही मस्जिद का मामला इसलिए अधिक संवेदनशील हो गया है क्योंकि यहां सड़क चौड़ीकरण सीधे एक धार्मिक स्थल के हिस्से को हटाने से जुड़ गया है।

इस विवाद की कानूनी पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सितंबर में याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि नगर निगम ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया और प्रभावित पक्षों को आपत्ति का अवसर दिया। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया था कि इसी सड़क परियोजना में अन्य धार्मिक संरचनाओं पर भी कार्रवाई हुई है। न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित मार्ग पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्सों पर कार्रवाई की जा चुकी थी तथा उज्जैन में लगभग 80 धार्मिक स्थलों से जुड़ी संरचनाओं पर विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई का उल्लेख हुआ। अदालत ने सड़क चौड़ीकरण को यातायात प्रबंधन और सिंहस्थ की विशाल भीड़ को देखते हुए व्यापक सार्वजनिक उद्देश्य से जुड़ा माना।

लेकिन अदालत का आदेश जमीन पर पैदा हुआ विवाद खत्म नहीं कर सका। मस्जिद से जुड़े लोगों ने कार्रवाई का विरोध जारी रखा और बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हुए। सोमवार की सुबह यही विरोध टकराव में बदल गया। पथराव की सूचना के बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। देखा जाये तो असली चुनौती सिर्फ सड़क नहीं, सामाजिक शांति की है। सिंहस्थ-2028 उज्जैन के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विशाल प्रशासनिक, यातायात और बुनियादी ढांचे की परीक्षा है। शहर में नए घाटों, मार्गों और अन्य आधारभूत सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण की परियोजना को समय पर पूरा करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

बहरहाल, अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ 2028 के विराट आयोजन के लिए शहर को तैयार करना है और दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना है कि विकास की कार्रवाई कानून, पारदर्शिता और शांति के दायरे में रहे। फिलहाल उज्जैन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास की इस रफ्तार के बीच कानून-व्यवस्था और सामाजिक विश्वास की सड़क कहीं संकरी तो नहीं पड़ जाएगी? वैसे आज की झड़प ने साफ कर दिया है कि सिंहस्थ की तैयारी में सबसे कठिन मोर्चा सिर्फ यातायात का नहीं, बल्कि शांति का भी है। फिलहाल शांति कायम रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

Continue reading on the app

Kerala के 12 जिलों के 38 स्थानीय निकाय वार्ड में Bypolls के लिए वोटिंग जारी

केरलम में 38 स्थानीय निकाय वार्ड के उपचुनाव के लिए सोमवार सुबह से मतदान जारी है। यह उपचुनाव बिजली कटौती, मंत्रियों की विदेश यात्राओं और बाढ़ राहत सहायता में देरी जैसे मुद्दों को लेकर विभिन्न वर्गों की ओर से संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार की आलोचना किए जाने के बीच हो रहा है। खबरों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की जीत के बाद पहली बार हो रहे इन उपचुनावों में सुबह सात बजे मतदान शुरू होते ही मतदाताओं में खासा उत्साह देखा गया और मतदान तेज गति से आगे बढ़ा।

राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बताया कि कोल्लम और अलप्पुझा को छोड़कर राज्य के 12 जिलों के 38 स्थानीय निकाय वार्ड में उपचुनाव हो रहे हैं। आयोग के अनुसार, उपचुनाव में कुल 126 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके सामने 3,09,713 मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की चुनौती है। इनमें 1,64,241 महिलाएं, 1,45,468 पुरुष और चार ट्रांसजेंडर मतदाता हैं।

सबसे अधिक 23 उम्मीदवार पलक्कड़ जिले में चुनाव लड़ रहे हैं, जहां स्थानीय निकायों के सात वार्ड में उपचुनाव हो रहा है। मतों की गिनती मंगलवार को होगी।

Continue reading on the app

  Sports

एशियन गेम्स क्रिकेट के सेमीफाइनल में कब और किससे भिड़ेगा भारत? क्या पाकिस्तान से होगी टक्कर?

India semifinal match Asian Games Cricket: नागोया में पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार बारिश और खराब मौसम के चलते भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाला क्वार्टर फाइनल मैच रद्द हो गया. नतीजतन टीम इंडिया सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है, जहां उसका सामना 1 अक्टूबर को नेपाल और श्रीलंका के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा. Mon, 28 Sep 2026 11:47:14 +0530

  Videos
See all

Water storm from the sky in Samastipur, people surprised! | समस्तीपुर में आसमान से पानी का बवंडर #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-28T07:17:03+00:00

Delhi Bulldozer Action: दिल्ली के आंली गांव में 1800 अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन, भयंकर बवाल #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-28T07:15:12+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers