Prabhasakshi NewsRoom: LPU Violence का पूरा सच क्या है? किसने फैलाई अफवाह? किसने भड़काई आग? किसने करवाई लूट?
पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एक छात्रा से कथित बलात्कार की खबर ने रविवार को ऐसा बवाल खड़ा किया कि पूरा परिसर हिंसा की चपेट में आ गया। छात्रों का प्रदर्शन देखते ही देखते आगजनी, तोड़फोड़, पुलिस से झड़प और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के जाम तक पहुंच गया। हालांकि पुलिस ने अभी तक बलात्कार की घटना की पुष्टि नहीं की है और विश्वविद्यालय ने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया है। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय ने 10 दिनों के लिए कक्षाएं बंद कर दी हैं और मध्यावधि परीक्षाएं भी अगली सूचना तक टाल दी हैं।
बताया जा रहा है कि मामला तब भड़का जब शनिवार रात सोशल मीडिया पर एक छात्रा के कथित बलात्कार और एक महिला छात्रा की आत्महत्या से जुड़ी बातें फैलने लगीं। रविवार तड़के छात्राएं और अन्य विद्यार्थी छात्रावास के बाहर जुटने लगे। आरोप लगाया गया कि किसी बाहरी व्यक्ति ने छात्रा के साथ यौन अपराध किया और शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल गठित कर दिया है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, वैज्ञानिक साक्ष्य और दूरभाष अभिलेखों की जांच की जा रही है।
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लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। विश्वविद्यालय की संपत्तियों में तोड़फोड़ हुई, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, कुछ वाहनों में आग लगा दी गई और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को जाम कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, राजमार्ग खाली कराने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और स्थिति और बिगड़ गई। दो पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई, कई अन्य वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
हिंसा के बीच विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्थित दुकानों और एटीएम केंद्र में तोड़फोड़ के दृश्य भी सामने आए। कुछ वीडियो में लोगों को दुकानों से खाद्य सामग्री और अन्य सामान उठाते हुए देखा गया। कुछ प्रदर्शनकारियों के चेहरे ढके हुए भी दिखाई दिए। पुलिस अब सीसीटीवी के जरिये हिंसा और कथित लूटपाट में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है। उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे प्रकरण में बलात्कार के आरोप को सिरे से खारिज किया है। विश्वविद्यालय ने जांच में सहयोग करने की बात कही है।
इसी बीच विश्वविद्यालय में पहले हुई एक तेलंगाना निवासी छात्र की आत्महत्या का मुद्दा भी प्रदर्शनकारियों की मांगों में शामिल हो गया। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा है और कहा है कि जांच में किसी तरह के आपराधिक पहलू के प्रमाण मिलने पर आगे कार्रवाई की जाएगी। छात्रों की ओर से छात्रावास व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हिंसा का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर पड़ा। फगवाड़ा में दिल्ली-अमृतसर मार्ग का यह महत्वपूर्ण हिस्सा करीब 15 घंटे तक प्रभावित रहा। वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ना पड़ा। आज सुबह पुलिस ने बताया कि यातायात बहाल कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात है।
उधर, हालात की गंभीरता को देखते हुए लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से दस दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मध्यावधि परीक्षाएं भी अगली सूचना तक टाल दी गई हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों को अभिभावकों से सलाह लेकर अपने घर जाने की अनुमति दी है, जबकि परिसर में रुकने वाले छात्रों को छात्रावास या निवास स्थान के भीतर रहने और किसी भी अशांति से दूर रहने की सलाह दी गई है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र सामान लेकर परिसर से निकलते और बस अड्डे तथा रेलवे स्टेशन की ओर जाते दिखाई दिए।
दूसरी ओर, इस मामले ने अब पंजाब सरकार का ध्यान भी खींच लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को विश्वविद्यालय पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश देते हुए साफ कहा है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। देखा जाये तो एलपीयू का यह पूरा घटनाक्रम अब केवल एक कथित अपराध की जांच का मामला नहीं रह गया है। असली सवाल यह है कि अपुष्ट सूचना इतनी तेजी से कैसे फैली, छात्रों का आक्रोश हिंसा में कैसे बदला और विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी लोगों की मौजूदगी तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे दावों की सच्चाई क्या है? फिलहाल बलात्कार के आरोप की पुष्टि बाकी है, लेकिन आगजनी, तोड़फोड़, पुलिस से टकराव और राष्ट्रीय राजमार्ग को घंटों बंधक बनाने की घटना निर्विवाद रूप से सामने है। अब जांच समिति को यह तय करना है कि इस पूरे मामले के पीछे सच क्या था?
बहरहाल, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का घटनाक्रम बताता है कि किसी गंभीर आरोप की सच्चाई सामने आने से पहले ही अफवाह किस तरह हालात को विस्फोटक बना सकती है। यौन अपराध जैसे संवेदनशील मामले में शिकायत की निष्पक्ष और तेज जांच जरूरी है, लेकिन जांच से पहले हिंसा, आगजनी और कानून हाथ में लेना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सच सामने आए, दोषी पर कार्रवाई हो और निर्दोष को निशाना न बनाया जाए। इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सबक यही है कि सच की लड़ाई सबूतों से होनी चाहिए, सड़कों पर हिंसा से नहीं।
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