Manipur में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद
मणिपुर के इंफाल पूर्व जिले में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि सुरक्षा बलों ने चानंग पर्वतमाला की तलहटी से हथियार बरामद किए।
बरामद हथियारों में मैगजीन सहित एक .303 राइफल, एक एसएलआर, आठ सिंगल बैरल ब्रीच लोडिंग (एसबीबीएल) राइफल, एक रिवॉल्वर और मैगजीन सहित .22 बोर की पिस्तौल शामिल थी।
पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को चलाए गए अभियान में 24 गोलियां, बैटरी सहित पांच वॉकी-टॉकी सेट आदि भी बरामद किए गए। पुलिस ने बताया कि एक अलग अभियान में तेंगनुपाल जिले के मोरेह में एक उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि वाइखोम अथोई (28) प्रतिबंधित नेशनल रिवोल्यूशनरी फ्रंट ऑफ मणिपुर का सदस्य है। उन्होंने बताया कि उसके पास से 9 एमएम की एक पिस्तौल के साथ दो मैगजीन और 30 कारतूस भी बरामद किए गए।
पत्नी की करतूत से यदि पति कमाने में असमर्थ तो पत्नी गुजारा भत्ता नहीं ले सकती : High Court
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी की करतूत या कार्यों से उसका पति कमाने में अक्षम हो जाता है तो वह उससे गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला ने इस टिप्पणी के साथ विनीता नाम की एक महिला की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी जिसने अपने पति से गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की थी।
उच्च न्यायालय ने कुशीनगर की परिवार अदालत के निर्णय को सही करार दिया जिसमें निचली अदालत ने पत्नी के गुजारा भत्ता के आवेदन को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि इस तरह के परिदृश्य में गुजारा भत्ता का आदेश देना भारी अन्याय होगा खासकर तब जब पत्नी के परिवार वालों के आपराधिक कृत्य से पति के कमाने की क्षमता बर्बाद हो गई।
पत्नी की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “जहां भारतीय समाज आमतौर पर एक पति से काम करने और अपने परिवार का भरण पोषण करने की अपेक्षा रखता है, इस मामले ने अनूठी परिस्थितियां प्रस्तुत की हैं।”
तथ्यों के मुताबिक, पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक- डॉक्टर वेद प्रकाश सिंह पूर्व में गुजारा भत्ता देने में सक्षम थे। हालांकि, उनके साले और ससुर ने क्लिनिक में एक झगड़े के दौरान उन्हें गोली मार दी जिसमें एक गोली उनकी रीढ़ में फंसी रह गई।
गोली निकालने के लिए जरूरी सर्जरी से उन्हें लकवा मारने का अत्यधिक जोखिम था। वह आराम से बैठने में असमर्थ हो गए। कुशीनगर की परिवार अदालत ने सात मई, 2025 को अंतरिम गुजारा भत्ता के लिए पत्नी का आवेदन खारिज कर दिया।
उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि पति की शारीरिक अक्षमता को लेकर कोई विवाद नहीं है और इसकी वजह उसकी पत्नी के परिवार वाले हैं।
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