Avimukteshwaranand News : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया बड़ा बयान | Top News | CM Yogi |
Avimukteshwaranand News : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया बड़ा बयान | Top News | CM Yogi | #swamiavimukteshwaranand #maghmela2026 #breakingnews #akhileshyadav माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरसवती के बीच मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब माघ मेला प्रशासन की तरफ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा गया दूसरा नोटिस भी सामने आया है. जिसमें उनके कृत्या के लिए माघ मेले में आजीवन प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी गई है. news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|
कच्छ भूकंप के 25 साल:तबाही के बीच पैदा हुआ बेटा, नाम रखा भूकंप; एक बच्चा 3 दिन बाद मलबे से निकला जिंदा
यह 26 जनवरी 2001 की सुबह थी। घड़ी में 8.40 मिनट का समय हुआ था, तभी गुजरात के कच्छ में विनाशकारी भूकंप आया। इसी समय अंजार तालुका की वोहरा कॉलोनी में असगरअली लकड़ावाला घर के बाहर बैठे हुए थे। भूकंप के झटके आते ही वे बाहर भागे। कुछ ही सेकेंड्स में कॉलोनी के लगभग सभी घर मलबे में तब्दील हो चुके थे। यहां रहने वाले 300 लोगों में से 123 लोगों की मौत हो चुकी थी। किस्मत से असगरअली के घर को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था, जिससे उनका परिवार सुरक्षित बच गया था। लेकिन, कच्छ से करीब 86 किमी दूर मांडवी में असगरगली के ससुराल पक्ष के 8 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन उसी परिवार का 8 महीने का बच्चा मलबे के नीचे सांसें ले रहा था। 3 दिनों से मलबे में दबा रहा 8 महीने का मुर्तुजा इसी परिवार में आठ महीने का एक बच्चा गुम था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि वह तीन दिन तक मलबे में दबे रहने के बाद भी जिंदा बच गया था। मुर्तजा नाम का यह बच्चा अब 25 साल का हो चुका है। इस त्रासदी में मुर्तजा ने अपने पूरे परिवार को खो दिया था। उनके दादा, माता-पिता, चाचा-चाची और उनकी दो बेटियां-परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई थी। मुर्तजा की दादी उस समय अपने मायके मोरबी गई हुई थीं, जिससे उनकी जान बच गई थी। असगरअली बताते हैं कि मलबे में दबे मुर्तजा को सेना के एक जवान ने बाहर निकाला था। उसने जैसे ही एक पत्थर हटाया तो उसके नीचे मुर्तजा था। आर्मी की मेडिकल टीम ने वहीं उसका प्राथमिक इलाज किया। उसके सिर में गंभीर चोटें थीं। इसके बाद मुर्तजा को मुंबई के लीलावती अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां 21 दिन तक उसका इलाज चला। इलाज के बाद वह अपनी दादी के साथ रहने लगा। मुर्तजा जब डेढ़ साल के थे, तभी असगरअली ने उन्हें गोद ले लिया था। मुर्तजा अब भुज में असगर अली के साथ ही रहते हैं और हार्डवेयर बिजनेस में उनक हाथ बंटाते हैं। आज भी मुर्तजा के चेहरे पर उस समय मलबे से लगी चोटों के निशान हैं, जो उसे इस आपदा की लगातार याद दिलाते हैं। मुर्तजा बताते हैं कि उसके फूफा के दो बेटे हैं और वह तीसरा भाई है। तीनों साथ रहते हैं। तीनों की शादी हो चुकी है और सभी संयुक्त परिवार में हंसी-खुशी से रहते हैं। दूसरा किस्सा... भूकंप आने के 5 मिनट बाद पैदा हुआ, नाम रखा ‘भूकंप’ कच्छ में रहने वाली शनिबेन 26 जनवरी 2001 की सुबह खेत पर थीं। इसी दौरान उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी तो वे घर लौट आईं। इसी दौरान 8.40 बजे भूकंप आ गया। भूकंप आने के 5 मिनट बाद ही उनके बेटे का जन्म हुआ था। किस्मत से शनिबेन का घर आपदा में बच गया था, जिससे मां-बेटे और उनकी बड़ी बेटी की जान बच गई थी। शनिबेन बताती हैं कि भूकंप में उनका पूरा घर हिल रहा था। वे घर से बाहर आकर बेहोश हो गई थीं। जब उन्हें होश आया तो वे एक दूसरे घर के दालान में थीं। एक बुजुर्ग महिला ने उनकी मदद की और वहीं बेटे का जन्म हुआ। शनिबेन बताती हैं कि बच्चे के जन्म के बाद दो दिन तक इलाज नहीं मिल सका था। अमेरिकन डॉक्टर ने कहा- इसका नाम ‘भूकंप’ रख दो हालांकि, इसके बाद बचाव टीमें शहर में आ गई थीं। काफी कमजोरी आ जाने के चलते तीसरे दिन उन्हें बेटे के साथ शहर ले जाया गया। यहां अमेरिका से आए डॉक्टर्स की टीम थी। इसी दौरान नर्स ने उनसे पूछा कि बच्चे का नाम क्या है। शनिबेन ने उससे कहा कि अभी इसका कोई नाम नहीं रखा है। तभी एक अमेरिकन डॉक्टर ने कहा- इसका नाम ‘भूकंप’ रख दो। उस समय मैंने कहा- आपको जो नाम देना हो दे दीजिए। इलाज के दो-तीन दिन बाद मां-बेटे घर लौट आए और बच्चे का नाम भूकंप ही रख दिया। शनिबेन के बाद हमने उनके बेटे भूकंप रबारी से भी बात की। भूकंप फिलहाल एक कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करता है। भूकंप ने कहा कि जब मैं छोटा था तो आसपास के बच्चे ‘भूकंप-भूकंप’ कहकर ही बुलाते थे। शुरू में उसे समझ नहीं आता था, लेकिन मां ने मुझे बताया कि हमारी जान बचाने वाले विदेश से आए एक डॉक्टर ने उसका नाम ‘भूकंप’ रखा था। भूकंप कहता है कि इतनी बड़ी आपदा में भी वे बच गए, इसलिए उसके लिए ‘भूकंप’ नाम बुरा नहीं है। भूकंप के जन्म के समय मौजूद उसके मामा गाभाभाई रबारी ने बताया कि उस दिन वे खुद घटनास्थल पर मौजूद थे। सुबह 8:40 बजे भूकंप आया और 8:45 बजे उनके भांजे का जन्म हुआ। जब बहन को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो सबसे पहले वे दाई को लेकर आए थे। कच्छ में भूकंप के बाद विदेशों से सैकड़ों डॉक्टर्स की टीमें गुजरात पहुंची थीं। भांजे के जन्म के पांचवें दिन अमेरिकी डॉक्टर ने कहा—इतनी बड़ी आपदा में भी यह बच्चा बच गया है। इसलिए इसका नाम ‘भूकंप’ रख देना चाहिए। फिर हम उसे इसी नाम से ही बुलाने लगे।
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