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क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका:रिपोर्ट- ट्रम्प ने अधिकारियों से हमले के विकल्प मांगे; आज मिडिल-ईस्ट पहुंच सकता है अमेरिकी जंगी बेड़ा

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने ऐसे सैन्य विकल्पों की मांग की है, जिनका असर ‘निर्णायक’ हो। रक्षा मंत्रालय पेंटागन और व्हाइट हाउस ने इन पर काम करना शुरू कर दिया है। इनमें ईरानी शासन को सत्ता से हटाने की योजना भी शामिल है। दूसरी तरफ आज अमेरिकी जंगी बेडा USS अब्राहम लिंकन भी मिडिल ईस्ट पहुंच सकता है। इसके चलते यह आशंका जताई जा रही है कि क्या अमेरिका ईरान पर कोई अचानक सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ईरान की तरफ बढ़ रहा जंगी जहाज USS अब्राहम लिंक राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में तेजी से ईरान की ओर बढ़ रहा है। ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) के जोन में आ चुका है। साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पहुंच गया है। USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 20 जनवरी को यह मलक्का स्ट्रेट पार कर हिंद महासागर में दाखिल हुआ। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक USS अब्राहम लिंकन 20 नॉट से ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ा और बाद में अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ऑटोमैटिक पहचान सिस्टम बंद कर दिया। इसी रफ्तार से चलने पर आज मिडिल ईस्ट में पहुंच सकता है। अब्राहम लिंकन के साथ कई डिस्ट्रॉयर जहाज और न्यूक्लियर पनडुब्बियां भी चल रही हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर पर 48 से 60 F/A-18 फाइटर जेट मौजूद हैं। ये बिना ईंधन भरे 2300 किलोमीटर दूर तक हमला कर सकते हैं। जॉर्डन में फाइटर जेट्स तैनात किए रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक US एयरफोर्स ने जॉर्डन में कम से कम 12 F-15 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि और विमान भी रास्ते में हैं। 20 से 22 जनवरी के बीच अमेरिकी C-17 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान कई बार जॉर्डन के मफराक अल-खवाजा एयरबेस पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों से पैट्रियट-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम लाए गए हैं। इनका मकसद इजराइल को ईरान की जवाबी कार्रवाई से बचाना है, क्योंकि तेहरान पहले ही बदले की धमकी दे चुका है। इसके अलावा हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर लगातार कार्गो विमान उतर रहे हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका संभावित सैन्य ऑपरेशन के लिए रसद और सैनिकों की तैनाती कर रहा है। एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात करने पर भी विचार चल रहा है, ताकि इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान के संभावित हमले से बचाया जा सके। ईरान बोला- अमेरिकी सैन्य अड्डे हमारे निशाने अमेरिकी गतिविधियों के जवाब में ईरानी सुप्रीम काउंसिल के जावेद अकबरी ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सभी सैन्य अड्‌डे ईरान के निशाने पर है। हमारी मिसाइलें आदेश के इंतजार में दुश्मन पर गरजने को तैयार हैं। एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो मिडिल ईस्ट में उसके सभी सैन्य अड्डे और इजराल के केंद्र ईरान के निशाने पर होंगे। दूसरी तरफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर ने मोहम्मद पाकपुर ने कहा कि उनकी सेना की उंगली ट्रिगर पर है। गुरुवार को एक लिखित बयान में पाकपुर ने कहा कि ईरान की सेना पहले से ज्यादा तैयार है। इजराइली मंत्री बोले- ईरान को 7 गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकात ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इजराइल के खिलाफ फिर से कोई हमला किया, तो उसे पहले से “सात गुना ज्यादा ताकत” से जवाब दिया जाएगा। स्विट्जरलैंड के दावोस में मीडिया से बात करते हुए बरकात ने कहा कि इजराइल पहले भी ईरान को निशाना बना चुका है और आगे किसी भी उकसावे पर जवाब और ज्यादा कठोर होगा। उन्होंने दावा किया कि पिछली सैन्य कार्रवाई में इजराइल ने ईरान की सैन्य कमजोरी को उजागर कर दिया है। ईरान में 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत रॉयटर्स ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया ईरान में अब तक 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। ईरान में 28 दिसंबर को मंहगाई के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो बाद में पूरे देश में फैल गए। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, अब तक 4519 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 4,251 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। 9,049 मौतों की अभी जांच चल रही है। ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कह चुके ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की खुलकर वकालत की है। उन्होंने पिछले हफ्ते पोलिटिको से कहा, “ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का वक्त आ गया है।” उन्होंने ईरानी नागरिकों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने और संस्थानों पर कब्जा करने की अपील भी की थी। हालांकि अगले दिन ट्रम्प ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बंदियों को फांसी देने की योजना फिलहाल रोकी गई है। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर ईरान में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरानी जनता को हुए नुकसान और मौतों के जिम्मेदार हैं। इसके जवाब में ट्रम्प ने खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान की तबाही के लिए वही जिम्मेदार हैं और वहां डर और हिंसा के जरिए शासन चलाया जा रहा है। --------------------------- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. ईरान के राष्ट्रपति बोले- खामेनेई पर हमले को जंग मानेंगे:ट्रम्प ने कहा था- प्रदर्शनकारियों की हत्याएं जारी रहीं तो हम दखल दे सकते हैं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमला हुआ, तो इसे ईरान के खिलाफ जंग माना जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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T20 World Cup से बाहर होने के बाद शाकिब अल हसन का नाम, बीसीबी की रणनीति पर सवाल

ICC टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड जिस दबाव में है, उसी के बीच एक बार फिर “हम शाकिब को टीम में चाहते हैं” वाला बयान सामने आया। बता दें कि शनिवार को शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम में करीब आठ घंटे चली बोर्ड बैठक के बाद 40 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
 
इसी दौरान अचानक शाकिब अल हसन के नाम को आगे बढ़ाया गया, लेकिन इस पर कोई साफ रोडमैप या ठोस जानकारी नहीं दी गई। पत्रकारों के सवालों के बीच बीसीबी मीडिया कमेटी चेयरमैन अमजद हुसैन की प्रतिक्रिया भी स्थिति को और उलझाती दिखी।

गौरतलब है कि ICC ने आगामी टी20 वर्ल्ड कप के लिए बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल करने का फैसला लिया है। इसके बाद से ही बोर्ड की बैठक पर सभी की नजरें थीं। ऐसे में शाकिब का नाम सामने आना कई लोगों को एक सोची-समझी रणनीति लगा, ताकि वर्ल्ड कप से बाहर होने की नाकामी चर्चा से हट जाए।

यह पहला मौका नहीं हैं। पूर्व बीसीबी अध्यक्ष नजमुल हुसैन भी अक्सर सार्वजनिक मंचों पर शाकिब को लेकर बयान देते रहे हैं। अंदरूनी तौर पर खिलाड़ी जानते थे कि ये टिप्पणियां मीडिया को शांत करने के लिए होती हैं। एक सीनियर क्रिकेटर के मुताबिक, शाकिब इस खेल को समझते थे और इसी कारण उन्होंने अपने करियर में कई बार इन हालातों को संभाल लिया।

नजमुल के बाद अध्यक्ष बने फारूक अहमद ने भी कई बार शाकिब की वापसी की इच्छा जताई थी, लेकिन हर बार यह साफ किया गया कि अंतिम फैसला सरकार के हाथ में है। शाकिब की राजनीतिक पहचान और अपदस्थ अवामी लीग से जुड़ाव के कारण उन्हें राष्ट्रीय टीम से दूर रखा गया। फिर भी ऐसे बयान सुर्खियां बटोरने में सफल रहे हैं।

खुद शाकिब भी बोर्ड की नीयत को लेकर आशंकित रहे हैं। पहले दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यह तय करना मुश्किल है कि बोर्ड वाकई उन्हें वापस चाहता है या सिर्फ उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा हैं।

शनिवार को अमजद हुसैन ने दावा किया कि बोर्ड शाकिब की वापसी को लेकर गंभीर है। उनके मुताबिक, 27 कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ियों की चर्चा के दौरान एक निदेशक ने शाकिब का नाम रखा और बताया कि खिलाड़ी खुद भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि फिटनेस, चयन और कानूनी पहलुओं को लेकर गेंद अब भी सरकार के पाले में बताई गई हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बोर्ड ने सरकार से कोई औपचारिक अनुमति ली है या नहीं। इस पर भी स्थिति साफ नहीं हो सकी। बोर्ड अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के सरकार से बात करने की बात जरूर कही गई, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला हैं।

राजनीतिक माहौल भी इस चर्चा से जुड़ा हुआ हैं। फरवरी में आम चुनाव होने हैं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के मजबूत दावेदार के रूप में उभरने से अटकलें तेज हैं कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में शाकिब की वापसी का रास्ता खुल सकता हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ तो बोर्ड यह कहने में पीछे नहीं रहेगा कि कोशिशें पहले से चल रही थी।

फिलहाल, बीसीबी ने ICC के फैसले के खिलाफ किसी भी कानूनी चुनौती से इनकार कर दिया है। वर्ल्ड कप का सपना टूट चुका है और अब बोर्ड एक बार फिर नई चर्चा खड़ी कर आलोचनाओं से ध्यान हटाने की कोशिश में नजर आ रहा है।
Sun, 25 Jan 2026 21:28:30 +0530

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