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Explainer: फिल्मों में बच्चों और एनिमल्स के सीन्स आखिर कैसे शूट होते हैं? सेट पर लागू होते हैं ये खास रूल्स

Films Children Animals Shooting Method: फिल्मों में जब किसी बच्चे या एनिमल के सीन को शूट किया जाता है तो उसके लिए काफी तैयारी करनी पड़ती है. ऑडियंस को लगता है कि बच्चा या एनिमल आया, सीन किया और शूटिंग पूरी हो गई. लेकिन रियल में ये प्रोसेस इतना आसान नहीं होता है. बच्चों के लिए अलग सेफ्टी रूल्स होते हैं, वहीं एनिमल्स की शूटिंग करने के लिए परमिशन, फिटनेस सर्टिफिकेट और दूसरे रूल्स का भी ध्यान रखना पड़ता है. इंडिया में बच्चों की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भागीदारी के लिए एनसीपीसीआर की गाइडलाइंस हैं. एनिमल्स के मामले में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया यानी एडब्ल्यूबीआई के परफॉर्मिंग एनिमल्स रूल्स और परमिशन प्रोसेस को फॉलो करना पड़ता है. 

बच्चों की शूटिंग के दौरान सेफ्टी रखना पड़ता है खास ध्यान

किसी फिल्म में बच्चे को काम देने से पहले उसकी सेफ्टी का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है. एनसीपीसीआर की गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि बच्चे के साथ उसकी एज और समझ के हिसाब से बिहेव करना चाहिए और उसके बेस्ट इंटरेस्ट को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए. इसका मतलब है कि सिर्फ सीन अच्छा दिखे, इसके लिए बच्चे पर ऐसा प्रेशन नहीं डाला जा सकता है, जिससे उसे फिजिकल या मेंटल स्ट्रेस हो जाए. इसमें पेरेंट या गार्जियन का भी अहम रोल होता है और प्रोडक्शन को बच्चे की जरूरतों का भी ध्यान रखना होता है.

बच्चे के वर्किंग टाइम का भी रखा जाता है खास ध्यान

कोई भी बच्चा किसी एडल्ट एक्टर की तरह लंबी शिफ्ट में काम नहीं कर सकता. उसकी पढ़ाई, आराम और हेल्थ को ध्यान में रखना जरूरी होता है. एनसीपीसीआर की गाइडलाइंस का मकसद ही फिल्मों में बच्चों के लिए हेल्दी वर्क एनवायरमेंट बनाना और फिजिकल तथा साइकोलॉजिकल स्ट्रेस को कम करना है. इसलिए शूटिंग शेड्यूल बनाते का पूरा ध्यान रखा जाता है. इसके अलावा चाइल्ड आर्टिस्ट के लिए सिर्फ शूटिंग ही जरूरी नहीं है, उसकी पढ़ाई पर भी प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. अगर किसी बच्चे की शूटिंग स्कूल टाइम के साथ टकराती है, तो प्रोडक्शन को ऐसा शेड्यूल बनाना होगा, जिससे उसकी एजुकेशन चलती रहे. यानी कैमरा के सामने काम करने वाला बच्चा भी अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा रहे. 

बच्चों पर शूटिंग के दौरान नहीं डाला जा सकता प्रेशर

फिल्मों में बच्चों को कई बार रोते, डरते, भागते या किसी मुश्किल सिचुएशन फंसा हुआ दिखाया जाता है. ऐसे सीन्स को शूट करते टाइम बच्चे की एज और समझ का ध्यान रखना होता है. बच्चे से एडल्ट जैसी इमोशनल परफॉर्मेंस के लिए प्रेशन नहीं बनाया जा सकता है. डायरेक्टर और क्रू को यह देखना होता है कि शूटिंग के दौरान बच्चा परेशान न हो. जरूरत पड़ने पर सीन को छोटे-छोटे हिस्सों में शूट किया जा सकता है, ताकि बच्चे पर ज्यादा प्रेशन ना पड़े. अगर किसी सीन में फायर, डेंजरस स्टंट, तेज नॉइज या कोई दूसरा रिस्क है, तो बच्चे की सेफ्टी का खास ख्याल रखा जाता है. कई बार कैमरा पर दिखने वाले एक्शन को टेक्नोलॉजी, डमी, बॉडी डबल या एडिटिंग की मदद से दिखाया जा सकता है. जिससे बच्चे को रिस्क वाले सीन्स ना करने पड़े. 

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बच्चों से अलग होती है एनिमल्स की शूटिंग

एनिमल्स के साथ शूटिंग का प्रोसेस बच्चों से अलग होता है, क्योंकि उनके लिए एनिमल वेलफेयर रूल्स लागू होते हैं. एडब्ल्यूबीआई के मुताबिक, फिल्म यूज होने वाले एनिमल परफॉर्मिंग एनिमल की कैटेगरी में आ सकता है. ऐसे एनिमल्स के लिए रजिस्ट्रेशन और परमिशन लेनी पड़ती है. प्रोड्यूसर को प्री-शूट परमिशन के लिए एनिमल ओनर, एनिमल्स की संख्या, शूटिंग की लोकेशन, डेट, टाइम और सीन से बातें बतानी होती है. शूटिंग से पहले एनिमल की हेल्थ का ध्यान रखा जाता है. एडब्ल्यूबीआई के प्रोसेस में वेटरिनरी डॉक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है. डॉग और कैट जैसे एनिमल्स के लिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी बनवाना पड़ता है. इसका मकसद यह देखना है कि एनिमल शूटिंग के लिए फिट है और उसकी हेल्थ के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं किया जा रहा है. 

एनिमल्स को शूटिंग के दौरान भूख-प्यासा नहीं रखा जा सकता

एडब्ल्यूबीआई के रूल्स के मुताबिक, एनिमल को ऐसे सीन में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जिसमें उसे इंजरी या अननेसेसरी पेन होने का खतरा हो. बीमार, घायल या प्रेग्नेंट एनिमल की शूटिंग नहीं की जा सकती है. जिससे उसे किसी तरह की दिकक्तों का सामना करना पड़े. सीन्स के लिए एनिमल को भूखा या प्यासा नहीं रखा जा सकता. उसे डराने के लिए जानबूझकर तेज आवाज या फायर के पास ले जाना भी रूल्स के खिलाफ है. अगर फिल्म में दो एनिमल्स के बीच फाइट दिखानी है तो असली एनिमल्स को लड़ाना अलाउड नहीं है क्योंकि इससे एनिमल को इंजरी हो सकती है. इसी तरह एक्सप्लोसिव्स या बहुत तेज आवाज वाले सीन में एनिमल्स की शूटिंग करने पर मनाही है. ऐसे सीन्स को कैमरा ट्रिक्स, एडिटिंग, वीएफएक्स या दूसरे सेफ मेथड्स से तैयार किया जा सकता है.

एक ही सीन के लिए बार-बार टेक अलाउड नहीं

किसी एक्टर्स से सीन के लिए कई बार टेक लिए जा सकते हैं, लेकिन एनिमल के साथ ऐसा करना अलाउड नहीं है. एडब्ल्यूबीआई के रूल्स में एनिमल को एक्सेसिव नंबर ऑफ टेक्स से बचाने के लिए उसे जरूरी रेस्ट देना होगा. अगर एनिमल थक गया है या उसे ब्रेक की जरूरत है, तो उसका ध्यान रखना होगा. आपको बता दें कि हर तरह के वाइल्ड एनिमल को फिल्म में शूटिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. एडब्ल्यूबीआई के मुताबिक, लायन, टाइगर, पैंथर, मंकी और बीयर जैसे वाइल्ड एनिमल्स को शूटिंग के लिए यूज नहीं किया जा सकता है. इसके अलावा बुल को भी परफॉर्मिंग एनिमल के रूप में यूज करने पर रोक है. एडब्ल्यूबीआई के अनुसार तीन महीने से कम उम्र के पपीज को फिल्मों की शूटिंग में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. उसकी परमिशन नहीं दी जाती. तीन महीने की उम्र पूरी होने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन लगवाना होता है. 

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साधु-संतों की बेइज्जती की तो जेल जाना होगा… CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को साधु-संतों के सम्मान और धार्मिक गतिविधियों को लेकर बड़ा बयान दिया. कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित सामूहिक भगवद्गीता पाठ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अब साधु-संतों को डराने या उनका अपमान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि साधु-संतों का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा.

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि लोगों को धार्मिक गतिविधियां करने से डरने की जरूरत नहीं है. उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से बिना किसी झिझक के भगवद्गीता का पाठ करने, उसका वितरण करने और हनुमान चालीसा पढ़ने की अपील की. उन्होंने शंख बजाने और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर भी लोगों से निर्भय रहने को कहा.

'समय बदल गया है'

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य में अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं. उन्होंने अपनी सरकार को ऐसी सरकार बताया जो 'गौमाता' की रक्षा करेगी और साधु-संतों के सम्मान को सुनिश्चित करेगी. उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं का पालन करने या उनका प्रचार-प्रसार करने से किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है. कार्यक्रम में करीब 11 हजार लोगों ने एक साथ भगवद्गीता का पाठ किया. शुभेंदु अधिकारी ने भी कार्यक्रम के अंत में गीता के एक अध्याय का पाठ किया.

बागेश्वर बाबा विवाद का भी किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने हाल में पश्चिम बंगाल में बागेश्वर बाबा से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि साधु-संतों को सनातन धर्म के प्रचार का अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को उनकी बातों को मानने या न मानने की स्वतंत्रता है, लेकिन किसी साधु-संत को डराना या उनका अपमान करना स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने बागेश्वर बाबा की तस्वीर जलाए जाने से जुड़े मामले का भी जिक्र किया और दावा किया कि राज्य सरकार ने इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की है.

29 दिसंबर को बड़े गीता पाठ की घोषणा

शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में आगामी 29 दिसंबर को बड़े स्तर पर सामूहिक भगवद्गीता पाठ आयोजित करने की भी घोषणा की. रिपोर्ट के मुताबिक, इस आयोजन में करीब 10 लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के शामिल होने की संभावना भी बताई गई है. मुख्यमंत्री ने लोगों से धार्मिक आयोजनों में खुलकर हिस्सा लेने और साधु-संतों के साथ एकजुट रहने की अपील की. उनके इस बयान को पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्वतंत्रता और साधु-संतों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सरकार के रुख के तौर पर देखा जा रहा है.

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Asian Games 2026 में आज ऐसा है भारत का शेड्यूल, जानिए कौन कब उतरेगा मैदान में और कब है मेडल मैच?

Asian Games 2026 India Schedule Today: भारत का एशियाई खेलों में आज यानी मंगलवार 29 सितंबर का कार्यक्रम किस प्रकार है? इसके बारे में जान लीजिए। तीरंदाज आज अपना जौहर दिखाते नजर आएंगे।  Tue, 29 Sep 2026 05:39:11 +0530

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