कर्नाटक में मंत्रिमंडल का विस्तार आज:शिवकुमार सरकार में शामिल होंगे 20 मंत्री, 12 नए चेहरों को पहली बार मौका मिलेगा
कर्नाटक में CM डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार आज शाम होगा। कांग्रेस हाईकमान ने 20 मंत्रियों के नामों को मंजूरी दे दी है। इनमें 12 नए चेहरे पहली बार मंत्री बनेंगे जबकि 8 मौजूदा मंत्रियों के भी नाम लिस्ट में हैं। गायत्री शांतिगौड़ा मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली इकलौती महिला मंत्री होंगी। शपथ समारोह सोमवार शाम 4:05 बजे बेंगलुरु के लोक भवन में होगा। शिवकुमार और राज्य के कई कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से कैबिनेट विस्तार पर बात करने के लिए मुलाकात की थी। कर्नाटक कैबिनेट में शामिल 20 मंत्रियों के नाम हाईकमान ने कर्नाटक विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख पदों के लिए भी नामों को मंजूरी दी है। जी.एस. पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष, ए.एस. पोन्नन्ना को उपाध्यक्ष, सलीम अहमद को विधान परिषद का सभापति और उमाश्री को उपसभापति बनाए जाने को मंजूरी दी गई है। इससे पहले राज्य मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा था कि कैबिनेट विस्तार पर अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को लेना है। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास 140 से अधिक विधायक हैं और हर जिले व समुदाय से कई सक्षम नेता हैं, इसलिए सीमित मंत्री पदों के लिए चयन करना आसान नहीं था। कर्नाटक की कैबिनेट में 34 मंत्री शामिल हो सकते हैं डीके शिवकुमार ने 3 जून को उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और 12 अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। कर्नाटक में संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री हो सकते हैं, जिसके चलते अभी भी लगभग 20 पद खाली हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान जातीय, सामुदायिक और नए-पुराने नेताओं में बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है जिसकी वजह से कैबिनेट विस्तार में देरी हो रही है। इसके अलावा, डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के गुटों की ओर से अलग-अलग नाम सुझाए जा रहे हैं। कर्नाटक में वोक्कालिगा, लिंगायत और कुरबा समाज अहम कर्नाटक में लिंगायत (लगभग 17%) सबसे बड़ा समुदाय है, जबकि दक्षिण कर्नाटक में वोक्कालिगा (लगभग 15%) का दबदबा है, जिसका नेतृत्व डी के शिवकुमार करते हैं। वहीं, कुरबा (लगभग 7-8%) समाज एक प्रमुख पिछड़ा वर्ग है, जिससें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आते हैं। वे अपनी अहिंदा राजनीति के जरिए मजबूत पकड़ रखते हैं। सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है।
ठियोग में भारी बारिश, गाड़ी पर गिरी चट्टानें:निरमंड में स्कूल बिल्डिंग क्षतिग्रस्त, अगले 6 दिन होगी बरसात; सामान्य से 6% अधिक बरसे बादल
शिमला के ठियोग और आसपास के क्षेत्रों में रविवार रात हुई भारी बारिश से हालात बिगड़ गए। प्रेमघाट में भूस्खलन के कारण बड़ी-बड़ी चट्टानें एक गाड़ी पर गिर गईं। मूसलाधार बारिश के बाद क्षेत्र में 20 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। वहीं, कुल्लू के निरमंड में लैंडस्लाइड की चपेट में आने से सरकारी स्कूल पांकवा का भवन क्षतिग्रस्त हो गया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, प्रदेश में अगले छह दिनों तक अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। सोमवार को बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। इस बीच, IMD दिल्ली ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए मंगलवार सुबह 5:30 बजे तक चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है। वहीं, 4 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके बाद 5 अगस्त को ऊना, कांगड़ा, चंबा और मंडी, जबकि 6 अगस्त को ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन और सिरमौर जिलों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मानसून सीजन में 8% फीसदी कम और जुलाई में 6% ज्यादा बारिश प्रदेश में एक जून से 31 जुलाई तक मानसून सीजन के दौरान 347.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 376.6 मिलीमीटर मानी जाती है। इस प्रकार अब तक प्रदेश में सामान्य से 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। जुलाई में सामान्य से ज्यादा बरसे बादल हालांकि जुलाई महीने में बारिश ने रफ्तार पकड़ी। पूरे प्रदेश में जुलाई के दौरान सामान्य से 6 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस महीने 272.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से अधिक रही। इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश जुलाई के दौरान चंबा में सामान्य से 46 प्रतिशत, कुल्लू में 62 प्रतिशत, किन्नौर में 59 प्रतिशत, शिमला में 41 प्रतिशत, सिरमौर में 12 प्रतिशत, सोलन में 7 प्रतिशत और ऊना में 1 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। बिलासपुर में 1 प्रतिशत कम, कांगड़ा में 7 प्रतिशत कम, मंडी में 21 प्रतिशत कम और लाहौल-स्पीति में 43 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
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