Pushkar Singh Dhami का कांग्रेस पर हमला, भ्रम फैलाने के लिए झूठ का सहारा ले रही पार्टी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधने के लिए कांग्रेस की आलोचना की और आरोप लगाया कि वह लोगों में भ्रम पैदा करने के लिए हमेशा झूठ का सहारा लेकर विमर्श गढ़ती है, लेकिन जल्द ही उसका पर्दाफाश हो जाता है। यहां एक संवाददाता सम्मेलन में धामी ने कहा कि एक बार फिर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग को लेकर एक विमर्श गढ़ने का प्रयास किया ताकि लोगों में भ्रम पैदा किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘जितनी बार भी वे विमर्श गढ़ते हैं, वह झूठा साबित होता है और बेनकाब हो जाता है।’’ इस संबंध में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संस्था पर सवाल उठाने का सभी को अधिकार है, लेकिन वे सवाल और आरोप तथ्यों और रिकॉर्डों पर आधारित होने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शनिवार को निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को जारी एसआईआर का मूल आदेश सर्वसम्मति से जारी किया गया तथा उसके बाद राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में उसे लागू करने की समयसारिणी का फैसला भी सर्वसम्मति से हुआ था। उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी आंतरिक विचार—विमर्श या टिप्पणी को आयोग के अंतिम निर्णय में मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत ने भी 27 मई, 2026 के अपने फैसले में निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को वैधानिक शक्ति के रूप में स्वीकार किया है। धामी ने कहा कि किसी भी संस्थान में निर्णय लेने से पहले अधिकारियों की ओर से अलग-अलग टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘असली सवाल यह है कि आयोग का अंतिम निर्णय क्या था और वह कानून की कसौटी पर कहां खड़ा है।” मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग, ईवीएम और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र संवैधानिक व्यवस्था और कानून के आधार पर चलता है, किसी तरह के दबाव या जबरदस्ती से नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘केवल एजेंडा के तहत संस्थाओं को बदनाम करना लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के अनुरूप नहीं है।’’ धामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उत्तराखंड में भी झूठ के बल पर विमर्श गढ़े। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रदेश में आकर कहा कि भाजपा की सरकारों ने एक भी नकल अपराधी को जेल नहीं भेजा जबकि सच यह है कि अकेले उत्तराखंड में ही अब तक 100 से अधिक नकल माफिया सलाखों के पीछे भेजे गए हैं और 35 हजार युवाओं को पारदर्शी तरीके से नौकरी दी गयी।
इस संबंध में मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में शुद्धिकरण हवन का भी जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस ने उसे लेकर दलित कार्ड खेलने का प्रयास किया, लेकिन जांच में पता चला कि हवन करने वाले लोग वाल्मीकि और शिल्पकार समाज के ही थे। उन्होंने कांग्रेस पर राज्य सरकार द्वारा जमीनें उद्योगपतियों को देने के मुददे पर भी झूठ बोलने का आरोप लगाया और सलाह दी कि उन्हें इस मुददे पर अदालत में जाना चाहिए या सूचना का अधिकार के तहत जानकारी लेनी चाहिए। धामी ने कहा कि कांग्रेस के पास अब मुददे नहीं बचे हैं और उसकी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है, इसलिए हार के अहसास से वे झूठ का सहारा ले रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा उनकी दाल अब गलने वाली नहीं है क्योंकि आज की पीढ़ी ‘इंजी’ यानी ‘इंडियन जनरेशन’ बहुत समझदार है जिसे पता है कि कांग्रेस के हाथ में देश कभी सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए तैयार ‘इंजी’ 2014 के पहले के घपले-घोटालों के बारे में भी जानकारी ले रही है।
Sonam Wangchuk ने 2 अक्टूबर के सीजेपी प्रदर्शन का किया समर्थन, खुद नहीं होंगे शामिल
शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में जवाबदेही बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने की कोशिशों को समर्थन मिलना चाहिए।
सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर से प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। संगठन ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो मुंबई से प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
क्या प्रदर्शन में शामिल होंगे सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक ने सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है, लेकिन वह खुद प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने साफ किया कि हर आंदोलन में उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी नहीं है।
वांगचुक ने कहा, “समर्थन निश्चित रूप से है। देश में जवाबदेही बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, मैं हमेशा उनके साथ हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे लिए आंदोलनों का समर्थन करने का मतलब यह है कि ये आंदोलन अपने दम पर आगे बढ़ें। इस मुद्दे को लेकर अब कई लोग सामने आ रहे हैं और यह देखकर मुझे खुशी है। इसलिए उम्मीद है कि सीईसी से जुड़े इस मुद्दे पर मेरी व्यक्तिगत मौजूदगी की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
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चुनाव आयोग को लेकर उठे विवाद के बीच आया बयान
सोनम वांगचुक का यह बयान चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे विवाद के बीच आया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता पंजीकरण और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली थी। आयोग ने एसआईआर के दौरान नोटिस का सामना कर रहे मतदाताओं की मदद के लिए कई उपायों की भी जानकारी दी।
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वांगचुक ने बताई प्रदर्शन में शामिल न होने की वजह
वांगचुक ने कहा कि आंदोलनों का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी हो। उनके मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर अब कई लोग सामने आ रहे हैं और वह इसे देखकर खुश हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीईसी से जुड़े इस मुद्दे पर उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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