Banana Peels Uses: केले के छिलकों को न समझें बेकार, इन 5 कामों में आएंगे बेहद काम
Banana Peels Uses: केला खाने के बाद ज्यादातर लोग उसका छिलका कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकिन जिसे हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसका इस्तेमाल घर के कई छोटे-बड़े कामों में किया जा सकता है। खासतौर पर पौधों की देखभाल, सफाई और कुछ घरेलू कामों में केले के छिलके उपयोगी साबित हो सकते हैं।
केले के छिलके में पोटैशियम और दूसरे खनिज तत्व पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें सीधे कचरा मानने के बजाय दोबारा इस्तेमाल करने के तरीके जानना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि हर घरेलू नुस्खे की तरह इनके इस्तेमाल में भी सही तरीका और सावधानी जरूरी है। आइए जानते हैं केले के छिलकों के 5 आसान उपयोग।
पौधों के लिए बनाएं प्राकृतिक खाद
केले के छिलकों का इस्तेमाल पौधों के लिए जैविक खाद तैयार करने में किया जा सकता है। इसके लिए छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर कंपोस्ट में डाल सकते हैं। इनके सड़ने के बाद मिलने वाला जैविक पदार्थ मिट्टी में पोषक तत्व जोड़ने में मदद करता है।
अगर आप गमले में केले के छिलके सीधे डाल रहे हैं तो उन्हें छोटे टुकड़ों में काटें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं। बहुत ज्यादा मात्रा में छिलके डालने से बचें, क्योंकि इससे बदबू और कीड़े आने की समस्या हो सकती है।
पौधों के लिए बना सकते हैं छिलके का घोल
केले के छिलकों को पानी में भिगोकर एक साधारण जैविक घोल भी बनाया जाता है। छिलकों को पानी में कुछ समय रखने के बाद उस पानी को पौधों की मिट्टी में सीमित मात्रा में दिया जा सकता है।
हालांकि इसे किसी पौधे की बीमारी का इलाज या रासायनिक खाद का सीधा विकल्प नहीं मानना चाहिए। पौधे की जरूरत और मिट्टी की स्थिति के अनुसार ही इसका इस्तेमाल करें।
चमड़े के सामान की सफाई
केले के छिलके के अंदर वाले नरम हिस्से से कुछ लोग चमड़े के जूते और दूसरे चमड़े के सामान की हल्की सफाई और चमक के लिए इस्तेमाल करते हैं। पहले किसी छोटे और छिपे हुए हिस्से पर इसे लगाकर जांच करना बेहतर है।
सफाई के बाद मुलायम सूखे कपड़े से सतह को अच्छी तरह पोंछ दें। हर तरह के चमड़े पर इसका परिणाम एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।
लकड़ी की सतह पर आजमा सकते हैं
कुछ घरेलू सफाई में केले के छिलके के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल लकड़ी की सतह पर हल्की चमक लाने के लिए किया जाता है। खासतौर पर बिना बहुत ज्यादा पॉलिश वाली लकड़ी पर इसे हल्के हाथ से रगड़कर बाद में साफ कपड़े से पोंछा जा सकता है।
लेकिन महंगे फर्नीचर, पॉलिश या सनमाइका वाली सतह पर सीधे इस्तेमाल करने से पहले छोटे हिस्से पर टेस्ट जरूर करें। सतह पर नमी छोड़ना भी सही नहीं है।
कंपोस्ट में करें इस्तेमाल
अगर घर में किचन वेस्ट से कंपोस्ट तैयार करते हैं तो केले के छिलके उसमें आसानी से शामिल किए जा सकते हैं। इन्हें छोटे टुकड़ों में काटने से इनके जल्दी टूटने में मदद मिल सकती है।
इस तरह केले के छिलके कचरे में जाने के बजाय जैविक कचरे के पुन: उपयोग का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि कंपोस्ट में केवल छिलके डालने के बजाय सूखे पत्ते, सब्जियों के अवशेष और अन्य उपयुक्त जैविक सामग्री का संतुलन रखना जरूरी है।
इस्तेमाल करते समय रखें ध्यान
केले के छिलके को किसी भी घरेलू समस्या का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। पौधों या घरेलू सतहों पर इस्तेमाल करने से पहले उनकी प्रकृति और स्थिति को ध्यान में रखें। खासतौर पर फर्नीचर या चमड़े के महंगे सामान पर पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहेगा।
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लेखक: (कीर्ति)
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हमारी रोज़मर्रा की कुछ ऐसी आदते हैं, जिन्हें हम बहुत सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही आदतें नसों पर दबाव बढ़ाकर कम उम्र में ही हाइपरटेंशन का मरीज बना देती हैं। यदि समय रहते इन जीवनशैली से जुड़ी आदतों में सुधार न किया जाए, तो जवानी में ही दवाओं पर निर्भर रहने की नौबत आ सकती है।
5 खराब आदतें बना सकती हैं हाई बीपी का मरीज
प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक नमक का सेवन
जंक फूड, पैक्ड स्नैक्स, प्रोसेस्ड मीट और रेस्टोरेंट के खाने में सोडियम (नमक) का स्तर बहुत अधिक होता है। शरीर में अत्यधिक सोडियम जमा होने से पानी रुकने लगता है, जिससे धमनियों पर सीधा दबाव बढ़ता है और बीपी का स्तर हाई हो जाता है।
देर रात तक जगना और नींद की कमी
गैजेट्स की लत और देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत के कारण पर्याप्त नींद न मिलना आम हो गया है। जब शरीर को 7-8 घंटे की गहरी नींद नहीं मिलती, तो तनाव हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ता है, जो धमनियों को सिकोड़कर ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है।
सिडेंटरी लाइफस्टाइल (शारीरिक निष्क्रियता)
दिनभर कुर्सी पर बैठकर काम करना और किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि न करना दिल के स्वास्थ्य के लिए घातक है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी से नसें सख्त होने लगती हैं और वजन बढ़ता है, जिससे हृदय को खून पंप करने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है।
अत्यधिक वर्क-स्ट्रेस और मानसिक तनाव
ऑफिस डेडलाइन और अनिश्चित भविष्य की चिंता नसों को लगातार तनाव में रखती है। पुराना या क्रोनिक स्ट्रेस एड्रीनलीन और कोर्टिसोल हार्मोन का स्राव बढ़ाता है, जो धमनियों को संकुचित करके रक्तचाप को खतरनाक स्तर तक ले जाता है।
धूम्रपान और शराब का बढ़ता चलन
सिगरेट में मौजूद निकोटीन धमनियों की अंदरूनी दीवारों को तुरंत नुकसान पहुंचाता है और उन्हें सख्त बनाता है। वहीं शराब का नियमित और अत्यधिक सेवन भी ब्लड प्रेशर को लगातार ऊंचा बनाए रखता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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