Safe Driving: भारत की सड़कों पर कितना काम का है लेवल 2 ADAS? जानें फायदे और सीमाएं
Safe Driving: आजकल कई कारों में लेवल 2 एडीएएस यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम मिलने लगा है। यह तकनीक स्टीयरिंग, रफ्तार और ब्रेकिंग में ड्राइवर की मदद कर सकती है, लेकिन इसे सेल्फ-ड्राइविंग सिस्टम नहीं माना जाता। ड्राइवर को हर समय सड़क पर ध्यान देना होता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत वाहन का नियंत्रण संभालना पड़ता है।
लेवल 2 एडीएएस क्या है?
लेवल 2 एडीएएस में कार कुछ परिस्थितियों में स्टीयरिंग और रफ्तार को नियंत्रित करने में सहायता कर सकती है। एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल आगे चल रही कार के अनुसार गति और दूरी बनाए रखता है, जबकि लेन कीप असिस्ट वाहन के लेन से बाहर जाने पर स्टीयरिंग में हल्का सुधार कर सकता है। हालांकि, अंतिम नियंत्रण और जिम्मेदारी ड्राइवर की ही रहती है।
कौन से एडीएएस फीचर्स सबसे ज्यादा काम के हैं?
एडीएएस में कई सुरक्षा और ड्राइविंग सहायता फीचर्स शामिल होते हैं। ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग संभावित टक्कर की स्थिति में ब्रेक लगा सकता है। फॉरवर्ड कोलिजन वॉर्निंग टक्कर की आशंका पर अलर्ट देता है। ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग लेन बदलते समय आसपास मौजूद वाहनों की जानकारी देता है, जबकि रियर क्रॉस-ट्रैफिक अलर्ट रिवर्स करते समय पीछे से आने वाले वाहन के बारे में चेतावनी देता है।
एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल और लेन कीप असिस्ट जैसे फीचर्स खुले और अच्छी तरह से मार्क किए गए हाईवे पर ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं।
भारतीय सड़कों पर क्या हैं चुनौतियां?
भारत में ट्रैफिक की स्थिति अक्सर तेजी से बदलती रहती है। दोपहिया वाहन अचानक सामने आ सकते हैं, ऑटो दिशा बदल सकते हैं और कई जगह लेन मार्किंग साफ नहीं होती। इसके अलावा गड्ढे, सड़क पर खड़े वाहन और निर्माण कार्य भी एडीएएस के लिए चुनौती बन सकते हैं।
कैमरा, रडार और अन्य सेंसर से काम करने वाले इन सिस्टम की क्षमता मौसम और सड़क की स्थिति से भी प्रभावित हो सकती है। तेज बारिश, धूल, कोहरा या कैमरे पर गंदगी आने से सिस्टम सीमित हो सकता है।
एईबी और लेन असिस्ट कैसे काम करते हैं?
ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सामने अचानक रुकावट आने पर वाहन की गति कम कर सकता है या जरूरत पड़ने पर ब्रेक लगा सकता है। हालांकि, ट्रैफिक में अचानक कट मारने वाले दोपहिया या ऑटो के कारण इसका हस्तक्षेप कभी-कभी ड्राइवर को असहज लग सकता है।
इसी तरह लेन कीप असिस्ट साफ लेन मार्किंग पर बेहतर काम करता है। लेकिन गड्ढे या किसी बाधा से बचने के लिए ड्राइवर को जानबूझकर लेन बदलनी पड़े, तो सिस्टम स्टीयरिंग में सुधार करने की कोशिश कर सकता है।
एसीसी कहां ज्यादा उपयोगी है?
एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल लंबी दूरी और हाईवे ड्राइविंग में ज्यादा उपयोगी हो सकता है। यह आगे चल रहे वाहन के अनुसार कार की गति कम करता है और कुछ सिस्टम धीमे ट्रैफिक में वाहन को रोककर दोबारा चलाने में भी सक्षम होते हैं। घने शहर के ट्रैफिक में बार-बार वाहनों के आगे आने से इसका संचालन कम सहज लग सकता है।
क्या बजट कारों में भी मिलता है?
भारत में हुंडई वेन्यू, महिंद्रा एक्सयूवी 3एक्सओ और होंडा अमेज जैसे मॉडल के चुनिंदा वेरिएंट में लेवल 2 एडीएएस उपलब्ध है। हालांकि, हर वेरिएंट में सभी फीचर्स नहीं मिलते, इसलिए खरीदने से पहले फीचर सूची की जांच करना जरूरी है।
कुल मिलाकर, लेवल 2 एडीएएस ड्राइवर की मदद करने वाली तकनीक है, ड्राइवर की जगह लेने वाली नहीं। कार खरीदते समय केवल फीचर्स की संख्या देखने के बजाय टेस्ट ड्राइव के दौरान यह भी जांचना चाहिए कि सिस्टम आपकी रोजाना इस्तेमाल होने वाली सड़कों पर किस तरह काम करता है।
(मंजू कुमारी)
रेलवे क्वार्टर में रहने वालों को झटका: बढ़ा किराया अब वेतन से कटेगा
भोपाल। रेलवे के सरकारी क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। रेलवे बोर्ड ने देशभर में रेलवे आवास के मासिक किराए में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू मानी गई हैं। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में 23 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया है।
नई दरें लागू होने के बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर में पुरानी दर से काटे गए किराए और नई दर के बीच का अंतर भी कर्मचारियों से वसूला जाएगा। यह बकाया राशि आने वाले वेतन से काटी जा सकती है। यानी कर्मचारियों को बढ़ा हुआ किराया देने के साथ पिछली तीन महीने की अंतर राशि भी चुकानी होगी।
छोटे क्वार्टरों का किराया भी बढ़ा
रेलवे बोर्ड ने अलग-अलग प्रकार के सरकारी आवास और उनके क्षेत्रफल के आधार पर नई मासिक दरें तय की हैं। पहली श्रेणी के 25 वर्ग मीटर तक के क्वार्टर का किराया अब 120 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रतिमाह हो गया है। इसी तरह 25 से 30 वर्ग मीटर वाले क्वार्टर का किराया 170 से बढ़ाकर 200 रुपये और 30 से 35 वर्ग मीटर वाले क्वार्टर का किराया 210 से बढ़ाकर 250 रुपये प्रतिमाह किया गया है। 35 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले इसी श्रेणी के क्वार्टर का किराया 220 से बढ़ाकर 280 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
बड़े क्वार्टरों पर भी बढ़ा शुल्क
दूसरी श्रेणी के क्वार्टरों के लिए नई दर 280 से 380 रुपये प्रतिमाह तक रखी गई है। तीसरी श्रेणी के आवासों में क्षेत्रफल के अनुसार कर्मचारियों को 470 से 610 रुपये प्रतिमाह देना होगा। चौथी श्रेणी के क्वार्टरों का मासिक शुल्क अब 720 से 1320 रुपये तक होगा। वहीं पांचवीं श्रेणी के बड़े क्वार्टरों के लिए क्षेत्रफल के आधार पर 1940 से 5860 रुपये प्रतिमाह की दर तय की गई है।
नौकर के कमरे और गैरेज का शुल्क भी बढ़ा
रेलवे आवास के साथ मिलने वाले नौकर के कमरे और गैरेज के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। नौकर के कमरे का शुल्क 120 से बढ़ाकर 130 रुपये और गैरेज का शुल्क 80 से बढ़ाकर 90 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
350 वर्ग मीटर से बड़े आवास का शुल्क 5860 रुपये
रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार 350 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले आवासों के लिए अधिकतम निर्धारित दर लागू होगी। ऐसे आवासों का मासिक शुल्क 5860 रुपये रहेगा। चौथी श्रेणी के क्वार्टरों की नई दरें रेलवे अधिकारियों के आवागमन के लिए बनाए गए अस्थायी आवासों पर भी लागू होंगी।
उप-मानक आवासों पर नई दर लागू नहीं
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नई दरें उप-मानक आवासों पर लागू नहीं होंगी। यानी ऐसे सरकारी आवास जो निर्धारित मानक से कम सुविधाओं वाले हैं, उन पर यह नई दर लागू नहीं होगी। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद संबंधित विभागों को नई दरों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में रेलवे क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियों के आगामी वेतन में बढ़ी हुई मासिक कटौती के साथ जुलाई से सितंबर तक की बकाया अंतर राशि भी समायोजित की जा सकती है।
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