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Homemade Ubtan: Natural Skin Care के लिए बेसन और दही से बनाएं देसी Ubtan, चेहरे पर आएगा गजब का निखार

आजकल फेस की चमक बरकरार रखने के लिए लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स और फेशियल पर पैसे खर्च करते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पुराने समय में हमारी दादी-नानी कैसे स्किन का अपना ख्याल रखती थीं। पहले न फेस वॉश था और न कोई क्रीम थी। पुराने समय में त्वचा की देखभाल करने के लिए घर में मौजूद चीजों से बने उबटन का इस्तेमाल किया जाता था। आपको जानकर हैरानी होगी कि आजकल खाने में यूज होने वाली चीजें पहले खूबसूरती बढ़ाने में भी काम आती थीं। बेसन, दही, हल्दी और शहद जैसी चीजों से उबटन बनाकर तैयार किया जाता था। इस उबटन को लगाने से आपकी स्किन साफ और मुलायम होती थी और आप भी चेहरा निखारने के लिए इस उबटन का इस्तेमाल कर सकती हैं।

ऐसे बनाएं देसी उबटन

यह उबटन बनाने के लिए कटोरी में 2 चम्मच बेसन, 1 चुटकी हल्दी, 1 चम्मच दही और आधा चम्मच शहद ले लें। इन सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। अगर आपकी स्किन ड्राई है, तो इसमें कुछ बूंदे गुलाब जल की जगह थोड़ा सा दूध मिला लें।

फेस पर लगाने का तरीका

सबसे पहले फेस वॉश कर लें। फिर तैयार उबटन को फेस और गर्दन पर पतली लेयर के साथ लगाएं। अब करीब 15 मिनट तक इसको लगा रहने दें और पूरी तरह से जब यह सूख जाए, तो हल्के हाथों से पानी की मदद से साफ करें। इसके बाद स्किन पर मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।

क्यों फायदेमंद है उबटन

हालांकि इस उबटन के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते हैं। इसका फायदा आपको इस्तेमाल करके देखना है। लेकिन अधिकतर लोगों को इसके फायदे मिल सकते हैं।

बेसन स्किन से गंदगी और तेल को हटाने में मदद करता है। यह स्किन को साफ महसूस कराता है।

दही में लैक्टिक एसिड मौजूद होता है। जिससे स्किन को हल्का एक्सफोलिएट करने में सहायता मिलती है। जिससे स्किन मुलायम महसूस हो सकती है।

शहद स्किन में नमी बनाए रखने में सहायता करती है और यह ड्राई स्किन के लिए फायदेमंद हो सकता है।

हल्दी करक्यूमिन जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, इससे आपको काफी फायदा हो सकता है।

हफ्ते में कितनी बार लगाएं

अगर आपकी त्वचा इस मिश्रण को अच्छे से सहन करती है, तो सप्ताह में 1 बार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा लगाने या रगड़ने से त्वचा में रूखापन या जलन हो सकता है।

पैच टेस्ट जरूर करें

अगर आप पहली बार इस मिश्रण का इस्तेमाल करने जा रही हैं, तो पहले थोड़ा सा मिश्रण हाथ की स्किन पर लगाकर पैच टेस्ट कर लें। खुजली, जलन या लालिमा महसूस होने पर इसको फेस पर न लगाएं। वहीं इस उबटन को आंखों के आसपास लगाने से बचें।

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घर का दही बाजार जैसा गाढ़ा क्यों नहीं जमता? जानिए असली वजह

खाने के साथ अगर दही मिल जाए तो शरीर को अंदर से ठंडक का अहसास होता है। अमूमन यह देखने में आता है कि लोग बाजार से दही लाकर खाते हैं, क्योंकि घर का दही उतना गाढ़ा नहीं जमता। ऐसे में उसे खाने का मन ही नहीं करता। वहीं, बाजार की दही एकदम गाढ़ी और चिकनी होती है। ऐसे में अक्सर मन में यह सवाल आता है कि घर में दही इस तरह से क्यों नहीं जमती। 

असल में गाढ़ा दही जमने का राज सिर्फ जामन डालने में नहीं है। दूध का प्रकार, उसे कितना गर्म किया गया, जामन कब डाला गया, तापमान कैसा रहा और दही को जमने के दौरान छेड़ा गया या नहीं, इन छोटी-छोटी बातों का असर उसकी बनावट पर पड़ता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में-  

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दूध को बस उबालकर तुरंत जामन डाल देना

बहुत से घरों में दूध उबला, थोड़ा ठंडा हुआ और सीधे जामन डाल दिया गया। जबकि यह गलती ना करें। कोशिश करें कि दूध को अच्छी तरह गर्म करने के बाद कुछ देर धीमी आंच पर पकने दें। इससे दूध के प्रोटीन में ऐसे बदलाव होते हैं जो बाद में दही को गाढ़ी बनाने में मदद करते हैं।  

गलत समय पर जामन डालना 

आप दूध में जामन कब डालती हैं, यह बहुत ही अहम् है। अगर दूध बहुत गर्म है तो जामन में मौजूद उपयोगी जीवाणु प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर दूध बहुत ठंडा हो गया तो दही जमने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। दूध को जामन मिलाने से पहले लगभग 44-46 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है। अगर थर्मामीटर नहीं है, तो दूध इतना गर्म होना चाहिए कि उंगली डालने पर गर्माहट महसूस हो लेकिन जलन न हो।

जामन भी तो अच्छा होना चाहिए

कई बार हम दूध और तापमान पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन जामन पर नहीं। अगर इस्तेमाल किया गया जामन बहुत पुराना है, बहुत ज्यादा खट्टा है या उसमें सक्रिय जीवाणु पर्याप्त नहीं हैं, तो दही ठीक से जमने में परेशानी हो सकती है। इसलिए, हमेशा पिछली बार के ताजे व सामान्य स्वाद वाले दही को जामन के रूप में इस्तेमाल करें।     

दूध पाउडर का करें इस्तेमाल

अगर आपको खासतौर पर बहुत गाढ़ा दही पसंद है, तो दूध में थोड़ी मात्रा में बिना मीठा किया हुआ सूखा दूध पाउडर मिलाना एक विकल्प हो सकता है। इससे दूध में ठोस पदार्थ बढ़ते हैं और दही की बनावट ज्यादा मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर आपका दही सामान्य रूप से ठीक जम रहा है, तो इसकी जरूरत नहीं है।

- मिताली जैन

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