Yamuna Expressway बस हादसे पर Allahabad High Court सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अधिकारियों से पूछा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश में कितनी स्लीपर बसों को परमिट जारी किए गए और परमिट जारी करने से पहले क्या निर्धारित मानकों का सत्यापन किया गया था। अदालत ने यह भी जानकारी मांगी कि क्या सुरक्षा मानकों से समझौता करते हुए बसों के डिजाइन में बदलाव किए गए या उनमें वाणिज्यिक पार्सल ढोए जा रहे थे।
उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को 13 अक्टूबर से पहले हलफनामा दाखिल कराने को कहा। अदालत ने हलफनामे में यह भी बताने को कहा कि निरीक्षकों ने यात्रियों के बयान दर्ज किए या नहीं, अग्निशमन उपकरणों की जांच की गई या नहीं और चालक एवं परिचालक प्रशिक्षित हैं या नहीं, इसकी पुष्टि की गई या नहीं। अदालत ने पिछले तीन वर्षों में इसी तरह की दुर्घटनाओं में की गई कार्रवाई का विवरण भी अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट और राज्यसभा में पेश आंकड़ों का संज्ञान लिया। खबर के मुताबिक, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देश में स्लीपर बसों में आग लगने की 45 घटनाएं हुईं, जिनमें 64 लोगों की मौत हुई और 145 लोग झुलसे। अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि एसी स्लीपर बसें उचित जांच और सुरक्षा उपायों के बिना सड़कों पर दौड़ रही हैं।
यह भी प्रतीत होता है कि इन बसों के चालक और परिचालक किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं।’’ अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि अगर दुर्घटनाग्रस्त बस के मामले में सरकारी नियमों का पालन नहीं पाया जाता है तो चालक, परिचालक और लाइसेंस धारक के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने कहा कि साथ ही ऐसे लाइसेंस धारक की बसों के परिचालन पर रोक लगाने पर भी विचार किया जाए।
गलत चार्जिंग से घटती है Battery Health, इन 5 आसान तरीकों से आईफोन और एंड्रॉयड की बैटरी लाइफ लंबी चलेगी!
दैनिक जीवन में मोबाइल एक अहम हिस्सा बन चुका है। आजकल बिना फोन के एक पल भी नहीं कटा जा सकता है। गौरतलब है कि सुबह के उठने से लेकर रात के सोने तक फोन हमारे हाथ में ही रहता है। इसका इस्तेमाल लगातार करते रहते हैं। हालांकि, ऐसे में बैटरी खर्च होना एक स्वाभाविक सी बात है, लेकिन बैटरी यदि तेजी से डिस्चार्ज होने लग जाए, तो यह दिक्कत आम नहीं है।
इस समस्या से बचने लिए हर कोई यही चाहता है कि उनके फोन की बैटरी हेल्थ लंबे समय तक चले। आइए आपको बताते हैं 5 मॉर्डन चार्जिंग रूल्स के बारे में, जिन्हें हर स्मार्टफोन यूजर को फॉलो करना चाहिए।
फोन की बैटरी हेल्थ को खराब होने से बचाने के लिए क्या करें?
20-80 प्रतिशत वाला रूल करें फॉलो
अगर आप अपने फोन की बैटरी को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो लंबे समय तक 90% या उससे बनाए रखने के लिए बैटरी को कभी भी 0% तक पूरी तरह खत्म न होने दें। इसके साथ ही फोन को लंबे समय तक किसी भी 100% चार्ज न करें। जब आपके फोन की बैटरी 20% के आसपास पहुंच जाए, तो उस दौरान ही फोन को चार्जर पर लगाएं। जब बैटरी 80% या 85% हो जाए तो इसे अनप्लग कर दें।
चार्जिंग के दौरान फोन के इस्तेमाल से बचें
जब आपका फोन चार्जिंग में लगा हुआ है, तो इस पर गेम खेलना, वीडियो कॉलिंग करना या ऑनलाइन मूवी बिल्कुल न देखें। चार्जिंग के दौरान फोन प्रोसेर से पहले से ही गर्म हो रहा होता है, ऐसे में आप जब कोई भारी टास्क डालते हैं, तो फोन का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। इस समय निकलने वाली हीट बैटरी के लिए सेफ नहीं है।
हमेशा ओरिजिनल और सर्टिफाइड चार्जर का ही इस्तेमाल करें
कभी भी बाजार में मिलने वाले सस्ते या बिना किसी ब्रांड को लोकल चार्जर का इस्तेमाल करने बचें। ऐसे चार्जर फोन जल्दी चार्ज का दावा करते हैं, लेकिन वे वोल्टेज को सही कंट्रोल नहीं करते हैं। इसलिए हमेशा अपने आईफोन या एंड्रॉइड डिवास के साथ मिलने वाला ऑरिजिनल एडाप्टर और केबल का ही प्रयोग करें। यदि नया चार्जर खरीदें, तो हमेशा सर्टिफाइड या अच्छी ब्रांडेड एक्सेसरीज वाला ही चुनें। घटिया चार्जर से बैटरी की उम्र को भारी रुप से कम कर देता है।
ओवरनाइट चार्जिंग से दूर रहे
कुछ लोगों की आदत होती है कि रात के समय फोन चार्ज पर लगाकर सो जाते हैं। यदि आपकी भी यही आदत है, तो इसे आज ही छोड़ दें। रात को सोते समय फोन को चार्जिंग पर लगाकर सुबह तक छोड़ देना स्मार्टफोन की बैटरी की उम्र को तेजी से कम करता है। लेकिन आज के आधुनिक स्मार्टफोन्स में स्मार्ट चार्जिंग के फीचर आ गए हैं, जो कि रात में बैटरी को 80% पर रोक देते हैं। फिर लंबे समय तक हाई वोल्टेज से जुड़े रहना बैटरी के लिए सही नहीं है।
फोन पर भारी कवर लगाकर चार्ज करने से बचें
अक्सर देखा गया है कि फोन को सुरक्षित रखने के लिए लोग महंगे और मोटे बैक कवर या रफ-टफ केस का प्रयोग करते हैं। जब आप इस तरह के केस के साथ फोन को चार्जिंग करेंगे, तो चार्जिंग के दौरान पैदा होने वाली प्राकृतिक गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। फिर अंदर ही अंदर ट्रैप होकर फोन और बैटरी को अत्यधिक गर्म कर देती है। इसलिए चार्जिंग करते समय हमेशा फोन का बैक कवर निकाल देना चाहिए। जिससे आपके फोन की बैटरी ठंडी रहे।
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