आज के दौर में स्मार्ट टीवी घर के मनोरंजन का अहम हिस्सा बन चुका है। Netflix, YouTube, Prime Video और दूसरे OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखने के लिए इसका खूब इस्तेमाल होता है। लेकिन स्मार्ट टीवी की क्षमता केवल फिल्में और वेब सीरीज चलाने तक सीमित नहीं है। इसकी कुछ सेटिंग्स और फीचर्स रोजमर्रा के काम को आसान बनाने के साथ टीवी को एक मल्टीफंक्शनल डिवाइस में बदल सकते हैं।
1. स्क्रीन मिररिंग से बड़ी स्क्रीन का फायदा
स्मार्टफोन या लैपटॉप की स्क्रीन को टीवी पर मिरर करके आप प्रेजेंटेशन, फोटो और वीडियो बड़े डिस्प्ले पर देख सकते हैं। ऑफिस मीटिंग, कॉलेज प्रोजेक्ट या घर में फोटो दिखाने के लिए प्रोजेक्टर की जरूरत भी कम हो सकती है। कुछ टीवी में फोन को कंट्रोलर की तरह इस्तेमाल करके गेमिंग का मजा लेने का विकल्प भी मिलता है।
2. वॉयस असिस्टेंट को बनाएं अपना डिजिटल हेल्पर
रिमोट से केवल चैनल बदलने के बजाय वॉयस कमांड का इस्तेमाल करें। आप मौसम, समाचार या किसी खास कंटेंट की जानकारी मांग सकते हैं। सपोर्ट मिलने पर टीवी से अलग-अलग स्ट्रीमिंग ऐप्स में कंटेंट सर्च करना भी आसान हो जाता है। स्मार्ट होम डिवाइस जुड़े होने पर लाइट, एसी या अन्य उपकरणों को भी वॉयस कमांड से नियंत्रित किया जा सकता है।
3. पिक्चर और साउंड सेटिंग्स पर दें ध्यान
बेहतर विजुअल अनुभव के लिए टीवी में उपलब्ध पिक्चर मोड को जरूरत के मुताबिक बदलें। समर्थित मॉडल में AI अपस्केलिंग कम रिजॉल्यूशन वाले कंटेंट को ज्यादा स्पष्ट दिखाने में मदद कर सकती है। वहीं, Dolby Atmos या DTS:X जैसे ऑडियो फॉर्मेट और compatible soundbar का सही कॉन्फिगरेशन मूवी देखने के अनुभव को ज्यादा सिनेमैटिक बना सकता है।
4. USB पोर्ट का करें स्मार्ट इस्तेमाल
टीवी का USB पोर्ट सिर्फ पेन ड्राइव लगाने के लिए नहीं होता। इसमें एक्सटर्नल स्टोरेज जोड़कर ऑफलाइन फिल्में, गाने और तस्वीरें चलाई जा सकती हैं। कुछ मॉडल USB ड्राइव पर लाइव टीवी रिकॉर्डिंग की सुविधा भी देते हैं। अपनी पसंदीदा तस्वीरों का स्लाइडशो चलाकर टीवी को डिजिटल फोटो फ्रेम के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. टीवी को बनाएं वर्क और फिटनेस स्क्रीन
स्मार्ट टीवी का वेब ब्राउजर न्यूज पढ़ने, रेसिपी देखने या जानकारी खोजने के काम आ सकता है। Bluetooth कीबोर्ड और माउस सपोर्ट करने वाले मॉडल में कुछ productivity apps का इस्तेमाल बड़े स्क्रीन पर किया जा सकता है। वहीं, YouTube और फिटनेस ऐप्स के जरिए घर पर एक्सरसाइज करते समय बड़े डिस्प्ले का फायदा मिलता है।
6. Cloud Gaming से बिना कंसोल खेलें गेम
Cloud Gaming सपोर्ट करने वाले टीवी में compatible services के जरिए बिना महंगा गेमिंग कंसोल खरीदे गेम खेलने का विकल्प मिल सकता है। इसके लिए आमतौर पर तेज और स्थिर इंटरनेट तथा compatible controller की जरूरत होती है। यह सुविधा गेमिंग पसंद करने वालों के लिए टीवी को और उपयोगी बना देती है।
7. Smart Home का बन सकता है कंट्रोल सेंटर
कुछ स्मार्ट टीवी स्मार्ट होम प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट होकर एक केंद्रीय डैशबोर्ड की तरह काम कर सकते हैं। सपोर्ट के अनुसार आप स्मार्ट लाइट, थर्मोस्टेट, डोरबेल या सिक्योरिटी कैमरे की जानकारी टीवी स्क्रीन पर देख सकते हैं। बेहतर 4K स्ट्रीमिंग के लिए कमजोर Wi-Fi की स्थिति में Ethernet कनेक्शन भी उपयोगी हो सकता है।
टीवी की स्पीड भी रखें बरकरार
स्मार्ट टीवी में लगातार इस्तेमाल के बाद अनावश्यक ऐप्स और कैश जमा हो सकते हैं। इसलिए जरूरत न होने वाले ऐप्स हटाएं, उपलब्ध होने पर कैश क्लियर करें और टीवी का सॉफ्टवेयर अपडेट रखें। हालांकि सभी फीचर्स हर स्मार्ट टीवी में उपलब्ध नहीं होते, इसलिए अपने मॉडल की सेटिंग्स और सपोर्टेड फीचर्स जरूर जांच लें।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अधिकारियों से पूछा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश में कितनी स्लीपर बसों को परमिट जारी किए गए और परमिट जारी करने से पहले क्या निर्धारित मानकों का सत्यापन किया गया था। अदालत ने यह भी जानकारी मांगी कि क्या सुरक्षा मानकों से समझौता करते हुए बसों के डिजाइन में बदलाव किए गए या उनमें वाणिज्यिक पार्सल ढोए जा रहे थे।
उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को 13 अक्टूबर से पहले हलफनामा दाखिल कराने को कहा। अदालत ने हलफनामे में यह भी बताने को कहा कि निरीक्षकों ने यात्रियों के बयान दर्ज किए या नहीं, अग्निशमन उपकरणों की जांच की गई या नहीं और चालक एवं परिचालक प्रशिक्षित हैं या नहीं, इसकी पुष्टि की गई या नहीं। अदालत ने पिछले तीन वर्षों में इसी तरह की दुर्घटनाओं में की गई कार्रवाई का विवरण भी अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट और राज्यसभा में पेश आंकड़ों का संज्ञान लिया। खबर के मुताबिक, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देश में स्लीपर बसों में आग लगने की 45 घटनाएं हुईं, जिनमें 64 लोगों की मौत हुई और 145 लोग झुलसे। अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि एसी स्लीपर बसें उचित जांच और सुरक्षा उपायों के बिना सड़कों पर दौड़ रही हैं।
यह भी प्रतीत होता है कि इन बसों के चालक और परिचालक किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं।’’
अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि अगर दुर्घटनाग्रस्त बस के मामले में सरकारी नियमों का पालन नहीं पाया जाता है तो चालक, परिचालक और लाइसेंस धारक के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने कहा कि साथ ही ऐसे लाइसेंस धारक की बसों के परिचालन पर रोक लगाने पर भी विचार किया जाए।
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