करते रहिए मीटिंग-मीटिंग, इधर हूतियों ने दाग दी बैलेस्टिक मिसाइल
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर कई हवाई हमले किए। सऊदी ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने राजधानी रियाद की ओर भेजे गए हूतियों के दो ड्रोन और दक्षिण सीमावर्ती इलाके खमीज मुशैद को निशाना बनाने वाली एक बैलेस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोक दिया। हालांकि हुती विद्रोहियों ने कहा कि उनका जो ऑपरेशन था वह सफल हुआ। इसके साथ ही आभा और जाजान समेत कई इलाकों में हवाई खतरे की चेतावनी जारी की गई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के मुताबिक यमन से रियाद की दिशा में दो ड्रोन लॉन्च किए गए थे। सऊदी एयर डिफेंस ने दोनों को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। इसके अलावा खमीज मुशैद की ओर दागी गई एक बैलेस्टिक मिसाइल को भी रोकने का दावा किया गया है। खमीज मुशैद सऊदी अरब के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में स्थित है और वहां एक प्रमुख एयरबेस भी है। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक रात के दौरान आभा और जजान में संभावित हवाई खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया गया। अधिकारियों ने लोगों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और खतरे की स्थिति में घरों के अंदर रहने की सलाह दी। यह पहली बार नहीं है जब हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब को निशाना बनाया हो। इससे पहले 19 सितंबर को भी रियाद की ओर बैलेस्टिक मिसाइल दागे जाने की खबर सामने आई थी।
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सऊदी अधिकारियों ने तब भी मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की बात कही थी। हालांकि हूती ने तब भी यही कहा था कि उन्होंने सऊदी के जिस ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ये ऑपरेशन लांच किया था वो ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा। हुतियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के कुछ अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। अंसारुल्लाह के ताजा हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। वर्ल्ड स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के युद्ध विराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर बमबारी फिर से शुरू करने की उम्मीद जताई है। ईरान के प्रस्ताव में कथित तौर पर 7 दिन का युद्ध विराम, परमाणु वार्ता फिर से शुरू करना और स्ट्रीट ऑफ होमोस को दोबारा खोलना शामिल था। इसके बदले में अमेरिका से ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाने की मांग की गई थी। हालांकि वॉलस्ट्रीट जनरल के मुताबिक ट्रंप का संदेह है कि तेहरान अमेरिकी मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करेगा। इधर हूती विद्रोही सऊदी अरब को लगातार निशाना बना रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में हूती हमले सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं है बल्कि इनका असर लाल सागर, बाबल मंदब और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
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हाल के दिनों में हूतियों की सैन्य गतिविधियां बढ़ने के साथ सऊदी ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। अमेरिका, ईरान, तनाव और हूतियों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां एक दूसरे से जुड़ती हुई नजर आ रही है। ऐसे में अगर वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो अमेरिकी हमले दोबारा शुरू हो सकते हैं। तो, यमन और सऊदी अरब में भी तनाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। हालांकि अमेरिकी सैन्य कारवाही की भविष्य के स्वरूप और समय को लेकर अभी भी अनिश्चितता है। फिलहाल सऊदी अरब के लिए तत्काल चुनौती अपने शहरों और महत्वपूर्ण सैन्य एवं ऊर्जा ठिकानों को होती ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाने की है। अब देखना यह होगा कि हुती विद्रोही आगे क्या कदम उठाएंगे। यमन में जंग सऊदी अरब ने शुरू की है लेकिन इसे अंजाम तक पहुंचाएंगे अंसारुल्लाह। हूतियों का रुख देखकर लगने लगा है कि सऊदी अरब ने गलत पंगा ले लिया है। सऊदी ने साल 2015 से भी सबक नहीं लिया और यमन में हूतियों पर अटैक कर दिया। इसके बाद हूती अंसारुल्लाह लगातार सऊदी अरब पर हमलावर हैं। अब बड़ी खबर यह आ रही है कि यमन के वेस्ट यानी पश्चिम में स्ट्रेटेजिक तौर पर बेहद अहम शहर हैस पर हुती जंगजुओं ने फिर से कंट्रोल हासिल कर लिया है।
अक्टूबर फेस्ट का काला इतिहास [Oktoberfest: The Indian Connection nobody talks about]| Baebaak Isha
अक्टूबर फेस्ट जर्मनी का वह मशहूर फेस्ट है जहां आने वाले लोग हर साल 70 लाख लीटर से भी ज्यादा बीयर पी जाते हैं. लेकिन 200 साल से भी ज्यादा पुराना यह आयोजन सिर्फ बीयर तक सीमित नहीं है. यहां संगीत है, बवेरिया की संस्कृति की झलक है और लाखों लोगों के साथ जश्न मनाने का मौका है. लेकिन इस मौज मस्ती भरे माहौल का अतीत इतना खुशनुमा नहीं था. इससे जुड़ा है नाजियों का इतिहास. इसमें एक राजा-रानी की कहानी भी है. यहां कभी एंटरटेनमेंट के नाम पर दुनियाभर से लाए गए “एग्जॉटिक” इंसानों से करतब कराए जाते थे. बेबाक ईशा के इस एपिसोड में जानिए अक्टूबरफेस्ट के इतिहास का वह हिस्सा जो आजतक आपने नहीं सुना. It all started with a wedding. On October 12, 1810, Bavarian crown prince Ludwig I married Saxon princess Therese of Saxe-Hildburghausen. To pep up the ceremony, a horse race was proposed and a race track built. Today's Oktoberfest takes place on the grounds where the original horse race was held. At the end of the century, Oktoberfest still wasn't a beer fest - in fact, some songs that encouraged drinking were forbidden. Staunchly against alcohol, Hitler never appeared at Oktoberfest. He regarded the event with suspicion, just as he did Christmas. But by 1936, Nazi flags had replaced all other flags on the festival lawn, and Jewish vendors were forbidden from participating. The last Oktoberfest before the war was held in 1938 and dubbed the "Great German Folk Festival." By the 1960's, Oktoberfest was back on its feet and growing - just in time for Munich to play host to the Olympics in 1972. What began as a horse race and became world-famous as a celebration of all things Bavarian is now an international trademark. #BaebaakIsha #OktoberFest #DWHistory #dwhindi 0:00- How Oktoberfest started 0:53- The Royal Wedding from where it all begin 3:03- When Indian Kids were brought to Oktoberfest 3:39- The Nazi past of the Oktoberfest 5:26- The De-Nazification of the Oktoberfest 5:48- When Oktoberfest was attacked
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