भारत ने अफगानिस्तान में 7.5 टन जीवन रक्षक कैंसर की दवाइयां पहुंचाईं
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। भारत ने अफगानिस्तान में कैंसर मरीजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने गुरुवार को काबुल में 7.5 टन जीवन रक्षक कैंसर दवाएं पहुंचाईं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, भारत ने कैंसर के मरीजों की तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए काबुल को 7.5 टन जीवन रक्षक कैंसर की दवाएं पहुंचाई हैं। भारत अफगानिस्तान के लोगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मावलवी नूर जलाल जलाली ने दिसंबर में नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने हेल्थकेयर सेक्टर में आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, बातचीत स्वास्थ्य सहयोग बढ़ाने, मेडिकल प्रोफेशनल्स के बीच विशेषज्ञता साझा करने, अफगान स्वास्थ्य कर्मचारियों की क्षमता बनाने और अफगानिस्तान को अच्छी गुणवत्ता की दवाओं की सप्लाई पक्का करने पर केंद्रित थी। कैंसर का इलाज, अफगान मरीजों के लिए मेडिकल वीजा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए समर्थन पर भी चर्चा हुई।
जलाली ने हेल्थ सेक्टर में हाल ही में मिले सपोर्ट के लिए भारत को धन्यवाद दिया और अफगानिस्तान के हेल्थकेयर सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए और जरूरतों के बारे में बताया। मीटिंग के दौरान नड्डा ने अफगान के लोगों का समर्थन करने के लिए नई दिल्ली की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की थी।
बता दें, भारत एक अच्छा पड़ोसी होने के नाते हमेशा से ही मुसीबत के समय में मदद के लिए खड़ा रहता है। दोनों देशों के बीच गहरा संबंध है। पिछली मुलाकात में भारत के स्वास्थ्य मंत्री ने पुष्टि की थी कि दवाओं और वैक्सीन के साथ एक सीटी स्कैन मशीन जल्द ही काबुल के बच्चों के हॉस्पिटल में भेजी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने आगे कहा कि भारत अफगान मरीजों के लिए इलाज तक पहुंच को आसान बनाने के लिए काम करेगा और आगे भी मदद देने के लिए तैयार है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, अफगान पब्लिक हेल्थ मिनिस्टर मावलवी नूर जलाल जलाली के साथ एक प्रोडक्टिव मीटिंग हुई। अफगानिस्तान के साथ लगातार मानवीय मदद और हेल्थकेयर सहयोग के लिए भारत के कमिटमेंट को फिर से कन्फर्म किया और दवाओं की लॉन्ग टर्म सप्लाई पर खास ध्यान देते हुए इस सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने बताया कि भारत ने पिछले चार सालों में अफगानिस्तान को 327 टन दवाइयां और वैक्सीन सप्लाई की हैं। अफगानिस्तान की तरफ से रेडियोथेरेपी मशीन और एक्स्ट्रा मेडिकल सप्लाई के प्रस्ताव पर भी काम चल रहा है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
देश में भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 39 लाख से ज्यादा वर्षा जल संचयन परियोजनाएं स्थापित की गईं
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। देश में भूजल को फिर से भरने के लिए बड़ी संख्या में काम किए जा रहे हैं। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सितंबर 2024 में शुरू की गई कैच द रेन- जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) पहल के तहत अब तक 39.6 लाख से ज्यादा कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल संग्रहण परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
इस पहल का मकसद वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों को फिर से भरना, बोरवेल रिचार्ज और रिचार्ज शाफ्ट जैसे तरीकों से भूजल स्तर को सुधारना है, ताकि आने वाले समय में पानी की कमी न हो।
सरकार द्वारा तैयार भूजल कृत्रिम रिचार्ज मास्टर प्लान में अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति के अनुसार रिचार्ज तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है। इस योजना के तहत देशभर में लगभग 1.42 करोड़ वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि करीब 185 अरब घन मीटर भूजल को दोबारा भरा जा सके।
भूजल भारत की जल सुरक्षा का सबसे अहम आधार है। खेती, पीने का पानी, और पर्यावरण काफी हद तक भूजल पर निर्भर हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी निकालने, पानी की गुणवत्ता खराब होने, और जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल पर दबाव बढ़ गया है, जिससे इसका सही और टिकाऊ प्रबंधन जरूरी हो गया है।
इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने नीति सुधार, वैज्ञानिक अध्ययन, ढांचा निर्माण और लोगों की भागीदारी पर आधारित एक व्यापक योजना अपनाई है। जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में देश भर में 43 हजार से ज्यादा भूजल निगरानी केंद्र, 712 जल शक्ति केंद्र और 53,264 अटल जल गुणवत्ता जांच केंद्र काम कर रहे हैं।
इसके अलावा अटल भूजल योजना (अटल जल) के तहत गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे जल संकट वाले राज्यों में सामुदायिक स्तर पर भूजल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत अब तक 6.68 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया गया है।
25 दिसंबर 2019 को शुरू की गई यह योजना जल जीवन मिशन के तहत जल स्रोतों को टिकाऊ बनाने में मदद करती है। पांच साल की इस योजना पर कुल 6,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें संस्थागत मजबूती और बेहतर परिणामों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इसके साथ ही मिशन अमृत सरोवर योजना, जो अप्रैल 2022 में शुरू हुई थी, के तहत देश के हर जिले में तालाब बनाए जा रहे हैं। हर तालाब कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में फैला होता है और इसमें करीब 10,000 घन मीटर पानी संग्रहित किया जा सकता है। अब तक 68 हजार से ज्यादा तालाब पूरे हो चुके हैं।
भूजल पर मॉडल विधेयक, जल शक्ति अभियान, जल संचय जन भागीदारी, भूजल रिचार्ज मास्टर प्लान 2020, अटल भूजल योजना, और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाएं मिलकर भूजल संरक्षण और इसकी निगरानी और सही उपयोग को मजबूत बना रही हैं।
सरकार द्वारा तैयार भूजल मॉडल विधेयक को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है। अब तक 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे अपनाया है, जिनमें बिहार, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।
केंद्र सरकार राज्यों के साथ लगातार बैठकें, सेमिनार और सम्मेलनों के जरिए भूजल के सही इस्तेमाल और संरक्षण को बढ़ावा दे रही है। बढ़ते जल संकट को देखते हुए सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और टिकाऊ विकास के लिए भूजल प्रबंधन को बेहद जरूरी बताया है।
--आईएएनएस
डीबीपी/डीकेपी
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