मध्यप्रदेश ताप बिजली घरों में कोयले की कमी का दावा, उमंग सिंघार का हमला, बोले- सरकार अपने प्रचार की चकाचौंध में गुम
देश में अब नवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू हो गईं हैं लेकिन त्योहार से पहले ही मध्यप्रदेश के लोगों, खासकर किसानों की चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आ गई है। दावा किया जा रहा है कि राज्य में ताप बिजली घरों में कोयले का स्टॉक घटकर करीब 4.04 लाख मीट्रिक टन रह गया है। यह इतना कम स्टॉक है कि राज्य में मौजूदा खपत के अनुसार सिर्फ 6 दिन ही काम चल पाएगा।
बता दें कि राज्य में कई इलाके ऐसे में हैं जहां काफी कम बारिश हुई है। जिसके कारण खेतों सिंचाई का काम भी जारी है। ऐसे में ताप बिजली घरों में कोयले का स्टॉक की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, कोयले के कम स्टॉक के दावे को लेकर अब प्रदेश में सियासी बवाल शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को लेकर मोहन सरकार पर हमला बोला है।
कोयले के स्टॉक को लेकर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर कर लिखा कि मध्यप्रदेश में बिजली संकट की आहट साफ सुनाई दे रही है लेकिन सरकार अपने प्रचार की चकाचौंध में गुम है। ताप बिजली घरों में कोयले का स्टॉक घटकर सिर्फ 4.04 लाख मीट्रिक टन यानी करीब छह दिन का रह गया है। प्रमुख ताप बिजली घरों का उत्पादन भी 1088.4 मेगावाट से घटकर 404.2 मेगावाट तक आ गया है।
सरकार के 24 घंटे बिजली के दावे पर उमंग सिंघार का तंज
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आगे रबी का सीजन है। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ेगी और नवरात्रि के दौरान घरेलू बिजली की खपत भी बढ़ेगी। ऐसे समय में मध्यप्रदेश के पास पर्याप्त कोयला तक नहीं है। उमंग सिंघार ने सीएम डॉ. मोहन यादव से कहा कि 24 घंटे बिजली का ढोल पीटना बंद करिए और किसानों के लिए बिजली सुनिश्चित करिए। जनता को उजाले के वादे मिले थे लेकिन सरकार ने संकट का अंधेरा तैयार कर दिया है।
गौरतलब है कि राज्य में बिजली उत्पादन का करीब 83 प्रतिशत आधार कोयला है जबकि पानी से लगभग 17 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होता है। दोनों स्रोतों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 5498.53 मेगावाट है। इसमें ताप बिजलीघरों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट प्रदेश का सबसे बड़ा ताप बिजलीघर है जिसकी क्षमता अकेले 2520 मेगावाट है। ऐसे में ताप बिजलीघरों में कोयले के स्टॉक में कमी के दावे ने प्रदेश की जनता की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में नवरात्रि और दीपावली जैसे बड़े त्योहार भी हैं। इन त्योहारों के दौरान बिजली की खपत बढ़ने की संभावना रहती है।
मध्यप्रदेश में बिजली संकट की आहट साफ सुनाई दे रही है, लेकिन सरकार अपने प्रचार की चकाचौंध में गुम है।
ताप बिजली घरों में कोयले का स्टॉक घटकर सिर्फ 4.04 लाख मीट्रिक टन यानी करीब 6 दिन का रह गया है। प्रमुख ताप बिजली घरों का उत्पादन भी 1088.4 मेगावाट से घटकर 404.2 मेगावाट तक आ गया…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 26, 2026
Bhopal Master Plan : BJP बोली मास्टर प्लान में भोपाल के लोगों की चिंता, कांग्रेस ने लगाया 20 साल पीछे धकेलने का आरोप
Bhopal Master Plan : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी कर दिया हैं , उनका कहना है कि इस ड्राफ्ट में शहर के साथ शहर के लोगों की चिंता की गई है साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया है, उन्होंने इसमें शहर के लोगों से सुझाव मांगे हैं , प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके आधार पर शहर का विकास किया जायेगा, उधर कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाये हैं।
भोपाल के मास्टर प्लान को भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल की जनता के हिसाब से तैयार विकास का खाका बताया है, मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने मीडिया से बात करते हुए कहा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अनंत चतुर्दशी के दिन सम्पूर्ण समीक्षा के बाद मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी किया है।
BJP ने मास्टर प्लान की तारीफ की
उन्होंने कहा ड्राफ्ट की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि भोपाल और इसके आसपास के जो प्राकृतिक संसाधन हैं उसका पूरा ध्यान रखा गया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरा ध्यान रखा गया है इसमें भोपाल के निवासियों और व्यवसायियों की चिंता भी की गई है उन्होंने कहा अब जनता इसपर सुझाव देगी, विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे उसके बाद इसे लागू किया जायेगा।
कुणाल चौधरी ने सरकार की मंशा पर उठाये सवाल
उधर भोपाल के मास्टर प्लान पर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है, कांग्रेस नेता ने कहा भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल को 20 साल पीछे धकेल दिया है, उन्होंने बताया कि आखिरी मास्टर प्लान 1995 में आया था और उसी को 2005 में रिपीट कर दिया, और अन जो मास्टर प्लान दो दशक बाद आया है उसमें भी बहुत विसंगतियां हैं।
IAS अधिकारियों और नेताओं पर निशाना
चौधरी ने कहा सरकार को नीति और नीयत स्पष्ट करना चाहिए , जनता परेशान है व्यापारी परेशान है उन्हें भय है कि केवल भाजपा से जुड़े लोगों को ही तो फायदा नहीं होगा ? या फिर बड़े बड़े अधिकारियों नेताओं की जमीनों को बचाने के लिए या जनता के लिए सरकार को ये स्पष्ट करना चाहिए।
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