Sweet Recipe: घर पर आसानी से बनाएं हलवाई जैसी खस्ता Laung Lata, नोट करें स्टेप बाई स्टेप Recipe
घर पर कोई खास इवेंट हो या कोई मेहमान आने वाले हों, या कोई खास मौका हो, इस दौरान कुछ मीठा खाने को न हो, ये कैसे हो सकता है। आमतौर पर लोग इन मौकों पर मार्केट में मिलने वाली मिठाई खरीदकर लाते हैं। तो वहीं कुछ लोग घर पर मिठाई बनाना पसंद करते हैं। घर पर लोग लड्डू, मालपुआ या फिर लौंगलता बनाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनको बनाने में ज्यादा झंझट नहीं करना पड़ता है और यह आसानी से बनकर तैयार हो जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों को लौंग लता बनाना मुश्किल लगता है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको लौंगलता बनाने की एकदम आसान रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं।
सामग्री
मेवे-1/2 कटोरी कटे हुए
खोया-25 ग्राम
मैदा- 50 ग्राम
नारियल पाउडर-1/2 छोटा चम्मच
खसखस-1/2 छोटा चम्मच
इलायची-1-2
लौंग-5-6 साबुत
गुलाब जल-1 छोटा चम्मच
घी-200 ग्राम
चीनी-100 ग्राम
ऐसे बनाएं लौंगलता
इसको बनाने के लिए पहले मैदे को बारीक छन्नी से छानकर एक बड़ी थाली में निकाल लें। फिर एक बड़ी थाली या कटोरे में निकालें और इसमें एक छोटा चम्मच घी डालें। अब दोनों हाथों से रगड़कर इसको अच्छे से मिलाएं।
इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर आटा गूंथ लें और दूसरी तरफ पैन में खोया डालकर स्लो आंच में सुनहरा होने तक भूनें। फिर इसमें खसखस, नारियल, इलायची पाउडर और मेवे डालकर अच्छे से मिक्स करें।
एक पैन में चीनी और एक कप पानी डालकर चाशनी बनने के लिए रख दें। जब चाशनी तैयार हो जाए, तो इसमें गुलाबजल मिलाएं और गैस के फ्लेम को बंद कर दें।
अब तैयार किए गए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और इनको रोटी की तरह बेलें। फिर 1 बड़ा चम्मच स्टफिंग लेकर रोटी पर डालें और चारों ओर से रोटी को बंद कर दें। इसके ऊपर से लौंग लगा दें।
एक कड़ाही में घी डालकर मीडियम आंच पर गर्म होने के लिए रख दें। जब घी गर्म हो जाए, तो इसमें लौंगलता डालकर सुनहरा होने तक भूनें। फिर इसको 15 से 20 मिनट के लिए चाशनी में भिगोएं।
कुछ देर बाद लौंगलता बनकर तैयार हो जाएगा और इसको सर्व करें। आप इसको बनाकर फ्रिज में भी स्टोर कर सकती हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
मैदे में घी मिलाने के बाद आटे को न तो बहुत ज्यादा सख्त और न बहुत ज्यादा नरम गूंथना चाहिए।
स्टफिंग भरने के बाद किनारों को पानी या मैदे के घोले से अच्छे से चिपकाएं।
ऊपर से साबुत लौंग लगाने के दौरान ध्यान रखें कि वह स्टफिंग के अंदर तक जाए।
हमेशा लौंगलता को धीमी या फिर मीडियम आंच पर तलना चाहिए।
एक तार की चाशनी हो और हल्की गर्म होनी चाहिए।
बच्चों में नशाखोरी सिर्फ जनस्वास्थ्य नहीं बल्कि Child Protection का मामला: CJI Surya Kant
(फाइल फोटो के साथ जारी) पटना, 26 सितंबर भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि बच्चों द्वारा मादक पदार्थों का सेवन किए जाने की समस्या को केवल जनस्वास्थ्य से जुड़ी चिंता के रूप में नहीं, बल्कि बाल संरक्षण के मुद्दे के रूप में भी देखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां बिहार लोक भवन में ‘मादक पदार्थों से परे बचपन: संरक्षण, देखभाल और पुनर्वास’ विषय पर ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ व्याख्यान देते हुए ‘लांसेट’ के एक हालिया अध्ययन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अध्ययन के अनुसार भारत में हर पांच में से कम से कम एक किशोर के मादक पदार्थों के सेवन के मध्यम से उच्च जोखिम में होने का अनुमान है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों से पूरी स्थिति का पता नहीं चलता। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हर आंकड़े के पीछे एक बच्चा है और हर बच्चे की परिस्थितियां दूसरे बच्चे से अलग होती हैं। बच्चों को जोखिम की स्थिति में पहुंचाने वाली परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं, इसलिए उनसे निपटने के उपाय भी इन भिन्नताओं को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बच्चों द्वारा मादक पदार्थों के सेवन की समस्या को केवल जनस्वास्थ्य से जुड़ी चिंता के रूप में नहीं, बल्कि बाल संरक्षण के मुद्दे के रूप में भी समझा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बच्चे केवल भविष्य के ही नागरिक नहीं है, वे वर्तमान में भी देश के नागरिक हैं।
उन्हें सुरक्षा, गरिमा, शिक्षा, देखभाल और आगे बढ़ने का अवसर पाने का अधिकार है। इसलिए बचपन को वापस लौटाने का अर्थ केवल मादक पदार्थों के सेवन को रोकना नहीं होना चाहिए।’’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि नशे की लत से निपटने के लिए ‘‘बाल-संवेदनशील दृष्टिकोण’’ अपनाए जाने की जरूरत है ताकि बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी गरिमा, गोपनीयता एवं आत्मसम्मान की भी रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि ये ‘‘प्रभावी पुनर्वास के अभिन्न अंग’’ हैं, न कि गौण पहलू।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘किसी कठिन दौर से गुजरने के कारण किसी बच्चे पर जीवन भर के लिए कोई ठप्पा नहीं लगना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पुनर्वास का अर्थ ऐसी परिस्थितियां पैदा करना है जिनमें बच्चा फिर से उन चीजों का अनुभव कर सके जो बचपन में मिलनी चाहिए जैसे शिक्षा, रिश्ते, खेल, विश्वास और मौजूदा मुश्किलों से आगे बेहतर भविष्य का भरोसा।’’ प्रधान न्यायाधीश ने लोगों से बच्चों का ‘‘खोया हुआ बचपन वापस दिलाने’’ और उन्हें नशे की लत से बचाने का सामूहिक संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशे की लत से जूझ रहे किसी बच्चे से आगे बढ़ने, सीखने, स्वस्थ होने और समाज का हिस्सा बने रहने का अवसर नहीं छिनना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘किसी बच्चे ने यदि मादक पदार्थ का सेवन किया है तो यह तथ्य हमें पूरी कहानी नहीं बताता।
इससे यह पता नहीं चलता कि उस बच्चे ने क्या झेला है, मादक पदार्थों का सेवन शुरू होने से पहले उसकी परिस्थितियां कैसी थीं, उसके आसपास अब भी कौन से खतरे मौजूद हैं या उसे स्वस्थ होने में किस तरह की मदद की जरूरत है।’’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि रोकथाम, शुरुआती पहचान, उपचार, शिक्षा, परिवार का सहयोग, पुनर्वास और उपचार के बाद की देखभाल स्वस्थ होने की पूरी प्रक्रिया की अहम कड़ियां हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि इनमें से कोई भी कड़ी गायब हो तो बच्चा सहायता के दायरे से बाहर हो सकता है।’’ प्रधान न्यायाधीश ने जोखिम की स्थिति में मौजूद और मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित बच्चों को समय पर उचित सेवाओं से जोड़ने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने, सेवाओं को अधिक सुलभ करने, कर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण देने, गोपनीयता सुनिश्चित करने और उपचार के बाद भी सहायता जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मादक पदार्थों के सेवन और नशे की लत से जूझ रहे बच्चों की मदद के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और गुणवत्तापूर्ण कानूनी सेवाओं की उपलब्धता पर भी जोर दिया।
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